Trump-Modi Trade Deal: क्या भारत सच में अमेरिकी सामानों पर ज़ीरो टैरिफ देगा? जानिए पूरा सच

Published : Feb 03, 2026, 08:22 AM IST

BREAKING TRADE DEAL EXPLAINED: क्या भारत वाकई अमेरिकी सामानों पर ज़ीरो टैरिफ लगाने जा रहा है? ट्रंप के दावे, मोदी की चुप्पी और $500 बिलियन खरीद की बात ने भारत की ट्रेड पॉलिसी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह ऐतिहासिक बदलाव है या सिर्फ रणनीतिक बयान?

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India US Trade Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने भारत-अमेरिका व्यापार रिश्तों में हलचल मचा दी है। ट्रंप का दावा है कि भारत और अमेरिका के बीच एक बड़ी ट्रेड डील तय हो गई है, जिसमें भारतीय सामानों पर अमेरिकी टैरिफ घटेगा और बदले में भारत अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर टैक्स कम कर सकता है-संभव है कि शून्य तक। क्या यह सच में ज़ीरो टैरिफ डील है या सिर्फ एक राजनीतिक बयान?

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ट्रंप-मोदी बातचीत में असल में क्या तय हुआ?

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है। उन्होंने पीएम मोदी को “महान मित्र और मजबूत नेता” बताया। ट्रंप के मुताबिक:

  • भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ 25% से घटाकर 18% किया जाएगा।
  • भारत अमेरिकी सामानों पर टैरिफ और नॉन-टैरिफ बाधाएं कम करेगा।
  • भारत, रूस से तेल खरीद कम कर अमेरिका से ज़्यादा तेल ले सकता है।
  • हालांकि, भारत सरकार की तरफ से इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अब तक नहीं हुई है।
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ज़ीरो टैरिफ का मतलब क्या सच में सभी टैक्स खत्म?

ट्रेड विशेषज्ञों का कहना है कि “ज़ीरो टैरिफ” शब्द का मतलब यह जरूरी नहीं कि सभी अमेरिकी सामानों पर तुरंत टैक्स खत्म कर दिया जाए। अक्सर इसका मतलब होता है:

  • कुछ चुनिंदा अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर टैक्स कम करना।
  • धीरे-धीरे ड्यूटी घटाने की योजना।
  • नॉन-टैरिफ बाधाओं में ढील देना।
  • इन बाधाओं में शामिल हैं:
  • लाइसेंसिंग नियम
  • कोटा सिस्टम
  • सर्टिफिकेशन और अप्रूवल
  • लोकल सोर्सिंग की शर्तें
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क्या भारत की ट्रेड पॉलिसी में बड़ा बदलाव आने वाला है?

अगर यह डील लागू होती है, तो यह भारत की लंबे समय से चली आ रही संरक्षणवादी ट्रेड नीति में बड़ा बदलाव होगा। अब तक भारत घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए ऊंचे टैरिफ लगाता रहा है। विदेशी कृषि और मैन्युफैक्चरिंग पर सख्ती रखता रहा है। लेकिन इस डील से अमेरिकी कृषि उत्पाद, एनर्जी सप्लाई, टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सामान भारतीय बाजार में आसानी से आ सकते हैं।

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EU डील और US डील का क्या कनेक्शन है?

दिलचस्प बात यह है कि भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ (EU) के साथ भी एक बड़ा ट्रेड समझौता किया है, जिसमें 96% से ज्यादा सामानों पर टैरिफ कम या खत्म होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर EU को इतनी छूट मिली है, तो अमेरिका भी वही रियायत मांग सकता है।

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$500 Billion की खरीद-हकीकत या दावा?

ट्रंप ने यह भी कहा कि भारत अमेरिका से:

  • एनर्जी
  • टेक्नोलॉजी
  • कृषि
  • कोयला

जैसे उत्पादों की $500 बिलियन डॉलर से ज्यादा की खरीद करेगा। लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक फ्रेमवर्क नहीं और न ही कोई लिखित समझौता सार्वजनिक किया गया है।

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डील बड़ी, लेकिन तस्वीर अभी धुंधली

ट्रंप-मोदी ट्रेड डील की घोषणा भले ही बड़ी हो, लेकिन इसके असल नियम, शर्तें और समयसीमा अभी साफ नहीं हैं। जब तक भारत सरकार की ओर से आधिकारिक दस्तावेज सामने नहीं आते, तब तक ज़ीरो टैरिफ सिर्फ एक संभावना ही है-पक्का फैसला नहीं।

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