
भारतीय नौसेना समुद्र में अपनी एंटी-मिसाइल रक्षा क्षमताओं को और मजबूत करने जा रही है। इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने अगली पीढ़ी के एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (EAT NG) ड्रोन के लिए जानकारी मांगी है (RFI जारी किया है)। ये ड्रोन दुश्मन की तेज रफ्तार एंटी-शिप मिसाइलों की तरह काम करेंगे, ताकि भारतीय नौसेना अपनी तैयारियों को और पुख्ता कर सके। यहां यह भी याद रखना जरूरी है कि DRDO का बनाया 'अभ्यास' नाम का एरियल टारगेट ड्रोन पहले ही कई सफल परीक्षणों के बाद बड़े पैमाने पर बनाया जा रहा है। इन नए ड्रोन्स को आधिकारिक तौर पर EAT (NG) यानी अगली पीढ़ी के एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट कहा जाता है। लाइव-फायर अभ्यास के दौरान इन्हें मार गिराया जाएगा। इससे जंगी जहाजों के क्रू को समुद्र की सतह के करीब उड़ने वाली आधुनिक मिसाइलों जैसे खतरों से निपटने की असली ट्रेनिंग मिलेगी।
नौसेना ने इन ड्रोन्स के लिए काफी कड़ी तकनीकी जरूरतें रखी हैं…
यह RFI भारत के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता अभियान का हिस्सा है। मंत्रालय ने वेंडरों से पूछा है कि क्या वे इन ड्रोन्स की सप्लाई 'बाय इंडियन-IDDM' कैटेगरी के तहत कर सकते हैं, जिसमें 50% से ज्यादा स्वदेशी सामान होना जरूरी है। दूसरा विकल्प 'बाय इंडियन' कैटेगरी है, जिसमें 60% से ज्यादा स्वदेशी सामान की शर्त है। ये दोनों कैटेगरी रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया 2020 के तहत आती हैं।
भारतीय नौसेना के जंगी जहाजों पर कई तरह के सतह से हवा में मार करने वाले मिसाइल सिस्टम तैनात हैं, जिनमें इजरायली बराक सीरीज भी शामिल है। इन मिसाइलों की क्षमता को परखने के लिए समय-समय पर असली जैसे टारगेट पर लाइव-फायरिंग की जरूरत पड़ती है। INS विक्रांत और INS विक्रमादित्य, दोनों के ऑपरेशनल होने और नौसेना के तेजी से हो रहे विस्तार के साथ, क्रू को एंटी-मिसाइल डिफेंस में माहिर बनाए रखना एक बड़ी प्राथमिकता बन गया है।
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