धुआं-धुआं हो गई दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी! अरामको पर ईरान का भयानक हमला-Watch Video

Published : Mar 02, 2026, 03:09 PM IST
Iran Drone Attack on Oil Refinery Aramco

सार

Iran Attack Saudi Arabia Aramco Refinery: सऊदी अरब की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको की रास तनूरा रिफाइनरी पर ईरान का ड्रोन हमला हुआ है। रिफाइनरी बंद होने के बाद तेल की कीमतों में 9% तक उछाल देखा गया। इसका असर दुनियाभर की तेल सप्लाई पर पड़ सकता है। 

Aramco Saudi Arabia Attack Video: इजराइल-अमेरिका के साथ जारी जंग के तीसरे दिन सोमवार को ईरान ने दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी में से एक अरामको पर ड्रोन अटैक कर दिया है। इस हमले के बाद पूरी कंपनी धुआं-धुआं हो गई। ईरान ने रास तनूरा रिफाइनरी को निशाना बनाया, जो सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी अरामको की सबसे बड़ी रिफाइनरी में से एक है। इस हमले के बाद हर तरफ हड़कंप मच गया। इस रिफाइनरी से रोजाना लाखों बैरल तेल बाहर भेजा जाता है। यही तेल अमेरिका, एशिया और यूरोप तक पहुंचता है, इसलिए इस हमले का असर दुनिया के तेल बाजार पर तुरंत देखा गया और कीमतें तेजी से बढ़ गईं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस हमले के तुरंत बाद ही रिफाइनरी को बंद कर दिया गया।

अरामको ड्रोन अटैक का वीडियो

 

 

रास तनूरा रिफाइनरी क्यों है खास?

रास तनूरा सिर्फ सऊदी की नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी तेल लोडिंग जगहों में से एक है। इस जगह से तेल बड़े टैंकरों में भरकर दुनियाभर भेजा जाता है। यह रिफाइनरी एक दिन में करीब 6 लाख बैरल तेल संभाल सकती है। हमले के बाद इसके बंद होने की खबर के चलते तेल की कीमतों में 9% से ज्यादा उछाल देखा गया।

दुनिया की बड़ी तेल कंपनी में से एक है अरामको

अरामको दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनियों में से एक है। इस पर सऊदी सरकार का कंट्रोल है। इसका हेडक्वार्टर धहरान में है। अरामको के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है। यह सिर्फ तेल निकालती ही नहीं, बल्कि रिफाइनिंग, गैस और पेट्रोकेमिकल्स के क्षेत्र में भी काम करती है। पिछलु कुछ सालों में कंपनी ने ग्रीन एनर्जी और नई टेक्नोलॉजी में भी निवेश बढ़ाया है। सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था काफी हद तक इसी कंपनी पर निर्भर करती है, इसलिए इसका कामकाज प्रभावित होने से देश और दुनिया दोनों में असर पड़ता है।

अरामको कब बनी?

अरामको की स्थापना साल 1933 में हुई थी। तब अमेरिकी कंपनियों के साथ मिलकर सऊदी ने इसे शुरू किया था, लेकिन फिर धीरे-धीरे 1980 तक इसका पूरा कंट्रोल सऊदी के पास आ गया और अब वहां की सरकार की देखरेख में ही इसे चलाया जाता है।

अरामको पर हमले का ग्लोबल असर

ईरान के इस ड्रोन हमले ने न सिर्फ रिफाइनरी पर नुकसान किया, बल्कि वैश्विक तेल सप्लाई को भी झटका दिया। अगर इस स्थिति में देर होती है, तो तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं और आम आदमी की जेब पर असर दिख सकता है।

Disclaimer: यह सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो है। एशियानेट हिंदी न्यूज इस वीडियो में दिखाई गई जानकारी या घटनाओं की सत्यता की पुष्टि नहीं करता है।

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