
Middle East War: मिडिल-ईस्ट में चल रही जंग के बीच अमेरिका-ईरान और कई बीच-बचाव करने वाले देश मिलकर 45 दिन के सीजफायर यानी युद्धविराम पर बात कर रहे हैं। लेकिन अंदरखाने की खबर ये है कि यह डील होना बिल्कुल भी आसान नहीं है और अगले 48 घंटे बेहद अहम माने जा रहे हैं। अगर इस दौरान कोई समझौता नहीं हुआ, तो हालात बड़े युद्ध में बदल सकते हैं, जिसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा,खासकर तेल और सप्लाई पर सबसे ज्यादा असर दिख सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी जो बातचीत चल रही है उसमें तुरंत कोई बड़ा समझौता होने की संभावना काफी कम है। फिर भी इसे आखिरी मौका माना जा रहा है, क्योंकि अगर ये बातचीत फेल होती है तो बड़े हमले हो सकते हैं। डर इस बात का है कि ईरान के पावर प्लांट्स और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा सकता है। इसके जवाब में खाड़ी देशों में तेल और पानी से जुड़ी सुविधाओं पर हमला हो सकता है, जिससे पूरी दुनिया की सप्लाई चेन हिल सकती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान को साफ संदेश दिया है कि अगर समझौता नहीं हुआ तो कड़ा एक्शन लिया जाएगा। पहले जो डेडलाइन तय की गई थी, उसे थोड़ा बढ़ा दिया गया है, लेकिन दबाव अभी भी बना हुआ है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान पीछे नहीं हटता, तो उसके पावर प्लांट्स समेत कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अगर होर्मुज जलमार्ग नहीं खोला गया, तो हालात और बिगड़ सकते हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) दुनिया के सबसे अहम तेल रूट्स में से एक है। यहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। अगर ये बंद होता है या यहां तनाव बढ़ता है, तो सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर असर पड़ता है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर सहमति बनाना आसान नहीं है। ईरान इसे अपनी ताकत मानता है और इसे जल्दी छोड़ने को तैयार नहीं है।
जो प्लान सामने आया है, उसमें दो स्टेज हो सकते हैं। पहले स्टेज में 45 दिन का सीजफायर लागू होगा, ताकि दोनों पक्ष शांति से लंबी अवधि के समझौते पर बात कर सकें। अगर जरूरत पड़ी तो इस अवधि को बढ़ाया भी जा सकता है। दूसरे स्टेज में फाइनल डील होगी, जिसमें युद्ध पूरी तरह खत्म करने की कोशिश की जाएगी। लेकिन असली दिक्कत यही है कि शुरुआती सीजफायर में ही बड़े मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही।
ईरान का कहना है कि वह पहले भी ऐसे हालात देख चुका है, जहां सीजफायर के बाद फिर से हमले शुरू हो गए। इसलिए वह इस बार बिना पक्की गारंटी के कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता। साथ ही, वह अपने सबसे बड़े हथियार होर्मुज पर कंट्रोल और यूरेनियम स्टॉक को इतनी आसानी से छोड़ने को तैयार नहीं है।
जानकारों का मानना है कि अगर ये बातचीत टूटती है, तो हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं। अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला कर सकते हैं। जवाब में ईरान खाड़ी देशों में तेल और पानी की सप्लाई पर हमला कर सकता है। इसका सीधा असर दुनियाभर में तेल की कीमतों, व्यापार और यहां तक कि आम लोगों की जेब पर पड़ेगा। हालांकि हालात तनावपूर्ण हैं, लेकिन बातचीत अभी भी जारी है। कई देश बीच में आकर समझौता करवाने की कोशिश कर रहे हैं। उम्मीद है कि आखिरी समय में कोई रास्ता निकल सकता है, लेकिन फिलहाल स्थिति बेहद अनिश्चित बनी हुई है।
इसे भी पढ़ें- Iran में फंसे अमेरिकी पायलट ने भेजा 3 शब्दों का ऐसा मैसेज, सुनते ही कांप उठा अमेरिका! Donald Trump ने सुनाई अनसुनी कहानी
इसे भी पढ़ें- 10 दिन की डेडलाइन खत्म! अब 7 अप्रैल को ईरान में तबाही मचाएगा अमेरिका? ट्रंप का अल्टीमेटम
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।