
Strait of Hormuz Impact on India: मिडिल ईस्ट (Middle East) से एक ऐसी खबर आ रही है, जिसने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं। ईरान ने एक बार फिर दुनिया की सबसे अहम समुद्री लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का ऐलान कर दिया है। लेबनान पर हो रहे इजराइली हमले से नाराज ईरान ने यह कदम उठाया है। हालांकि, अमेरिका का दावा है कि होर्मुज बंद होने का उसके पास कोई सबूत नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि अगर हालात फिर से बिगड़ते हैं, तो भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा? क्या पेट्रोल, डीजल और LPG फिर महंगे हो सकते हैं? आइए जानते हैं पूरा मामला और भारत पर कितना असर पड़ सकता है...
ईरान की सैन्य कमान और रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े अधिकारियों ने दावा किया कि अमेरिका और इजराइल ने युद्धविराम समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया। ईरान का आरोप है कि लेबनान में संघर्ष जारी है, इजराइल हमले कर रहा है, इसलिए उसने जवाबी कदम उठाने का फैसला किया है। ईरान ने जहाजों को चेतावनी भी दी है कि वे इस क्षेत्र के पास आने से बचें। साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि आगे और कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।
अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने ईरान के दावे को चुनौती दी है। अमेरिका का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही जारी है और उनके 55 कॉमर्शियल जहाज वहां से सुरक्षित निकले हैं और बड़ी मात्रा में तेल लेकर गए हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी कहा कि तेल के टैंकर लगातार चल रहे हैं और रास्ता पूरी तरह बंद नहीं है।
होर्मुज स्ट्रेट पश्चिम एशिया का वह समुद्री रास्ता है, जहां से दुनिया का एक-तिहाई तेल और गैस गुजरता है। खाड़ी देशों से निकलने वाले लाखों बैरल तेल की सप्लाई इसी रास्ते के जरिए दुनिया तक पहुंचती है। यही वजह है कि जब भी इस इलाके में तनाव बढ़ता है, पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार की धड़कनें तेज हो जाती हैं। फरवरी आखिरी से चल रहे जंग की वजह से यह रास्ता बंद था, जिससे दुनियाभर में तेल और गैस की किल्लतें बढ़ गई थीं, लेकिन अमेरिका से शांति समझौते की डील की वजह से इसके खुलने की उम्मीद थी, इस बीच ईरान ने फिर से इस रास्ते को बंद कर दिया है।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल (Crude Oil) विदेशों से मंगाता है। रास्ता बंद होने या तनाव बढ़ने से माल ढुलाई का खर्च (Shipping Cost) बढ़ जाता है। अगर इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल के दाम बढ़े, तो भारत में भी पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। हालांकि, अंतिम फैसला कई बातों पर निर्भर करेगा। जैसे तनाव कितने दिन चलता है, होर्मुज स्ट्रेट वास्तव में कितना प्रभावित होता है, तेल उत्पादक देशों की प्रतिक्रिया क्या रहती है, वैश्विक बाजार में तेल की उपलब्धता कितनी रहती है।
रसोई गैस (LPG) पर असर
भारत पहले अपनी 90% एलपीजी पश्चिम एशिया से मंगाता था, लेकिन इस बार मिडिल ईस्ट में चल रहे जंग और होर्मुज के बंद होने के चलते भारत ने अपनी रणनीति बदली और अमेरिका, अर्जेंटीना, फ्रांस, नीदरलैंड, चिली समेत कई देशों से गैस और एनर्जी प्रोडक्ट्स खरीदना शुरू कर दिया। इस वजह से देश में गैस की कमी (Shortage) तो नहीं होगी। चूंकि गैस बहुत दूर वाले देशों से आ रही है, इसलिए जहाजों का किराया और सप्लाई चेन का खर्च काफी बढ़ गया है।
राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका-ईरान की बैठक का क्या नतीजा निकलता है। अगर बातचीत सफल रही और समंदर का रास्ता सुरक्षित रहा, तो आने वाले महीनों में गैस और तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। लेकिन अगर इजराइल के हमले जारी रहे और ईरान अड़ा रहा, तो बाजार में अनिश्चितता बनी रहेगी।
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