Iran में फंसे अमेरिकी पायलट ने भेजा 3 शब्दों का ऐसा मैसेज, सुनते ही कांप उठा अमेरिका! Donald Trump ने सुनाई अनसुनी कहानी

Published : Apr 06, 2026, 07:11 AM IST

Iran-US Rescue Mission: ईरान और अमेरिका जंग के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने एक इंटरव्यू में उस रोंगटे खड़े कर देने वाले रेस्क्यू ऑपरेशन का खुलासा किया, जिसमें एक अमेरिकी F-15 क्रू मेंबर को मौत के मुंह से निकाला गया था। 

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डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?

ट्रंप ने बताया कि इस मिशन के दौरान पायलट के भेजे गए महज तीन शब्दों के रेडियो मैसेज ने व्हाइट हाउस और पेंटागन के अधिकारियों के पसीने छुड़ा दिए थे। अधिकारियों को डर था कि कहीं उनका पायलट दुश्मन के जाल में तो नहीं फंस गया। इस मैसेज के बाद यूएस की पूरी प्लानिंग ही बदल गई।

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मैसेज के वो '3 शब्द' जिससे बदल गई अमेरिकी की प्लानिंग

ईरान की सीमा के भीतर क्रैश हुए विमान से सुरक्षित बाहर निकलने के बाद, घायल वेपन्स सिस्टम ऑफिसर ने अपनी लोकेशन कन्फर्म करने के लिए एक रेडियो सिग्नल भेजा। ट्रंप के अनुसार, उस ऑफिसर ने संदेश में 'God is good' (ईश्वर महान है) कहा था। शुरुआत में अमेरिकी अधिकारियों को लगा कि यह ईरान द्वारा बिछाया गया कोई जाल या 'एंबुश' हो सकता है। कुछ समय के लिए यह कन्फ्यूजन बना रहा कि क्या पायलट जिंदा है या फिर ईरानी फोर्सेज ने उसे पकड़कर उसके रेडियो से मैसेज भेजा है। बाद में डिफेंस अधिकारियों ने पुष्टि की कि वह जिंदा है और लगातार बचने की कोशिश कर रहा है, तब जाकर राहत की सांस ली गई।

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24 घंटे मौत के साये में, पहाड़ों में छिपा रहा अमेरिकी अफसर

घायल अमेरिकी अफसर 24 घंटे से ज्यादा समय तक ईरान के पहाड़ी इलाके में छिपा रहा। उस इलाके में हजारों ईरानी सैनिक और स्थानीय लोग उसकी तलाश में जुटे थे और कथित तौर पर उसे पकड़ने के लिए इनाम तक घोषित किया गया था। बताया गया कि वह एक पहाड़ी दरार में छिपा हुआ था, जहां से वह लगातार अपनी लोकेशन बदलता रहा ताकि दुश्मन के हाथ न लगे। इस दौरान अमेरिकी सर्विलांस टेक्नोलॉजी उसकी लोकेशन ट्रैक करने में जुटी रही, लेकिन हर कदम पर खतरा बना हुआ था।

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दिन में फायरिंग, रात में सीक्रेट मिशन, ऐसे हुआ रेस्क्यू

इस ऑपरेशन का पहला हिस्सा दिन के उजाले में हुआ, जब F-15 पायलट को भारी गोलीबारी के बीच से बाहर निकाला गया। इसे अमेरिकी अधिकारियों ने बेहद तेज और सटीक कार्रवाई (bold and quick snatch) बताया। लेकिन असली चुनौती रात के मिशन में थी, जब करीब 200 सैनिकों की मदद से दूसरे क्रू मेंबर को बचाने के लिए ऑपरेशन चलाया गया। अमेरिका ने ईरान के अंदर ही एक अस्थायी बेस बनाकर इस मिशन को अंजाम दिया। अंधेरे, दुश्मन और मुश्किल भूगोल के बीच यह रेस्क्यू काफी रिस्की था।

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इजराइल की भी एंट्री, ऐसे मिला सपोर्ट

इजराइल (Israel) ने भी इस ऑपरेशन में सीमित लेकिन अहम भूमिका निभाई। भले ही इजराइली इंटेलिजेंस ने सीधे तौर पर अफसर की लोकेशन ट्रैक करने में मदद नहीं की, लेकिन उसने ईरानी सैनिकों की मूवमेंट की जानकारी दी। इसके अलावा, इजराइली एयरफोर्स ने कथित तौर पर एक स्ट्राइक भी की, जिससे ईरानी फोर्सेज की आगे बढ़ने की रफ्तार धीमी हो गई। डोनाल्ड ट्रंप ने इस साझेदारी को मजबूत बताते हुए कहा कि दोनों देशों ने मिलकर इस मिशन को सफल बनाया।

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