
Iran-Israel War Day 7: ईरान के साथ अमेरिका-इजराइल युद्ध भयावह रूप लेता जा रहा है। इसी बीच पता चला है कि 28 फरवरी को इजरायल-अमेरिका ने एक संयुक्त अभियान में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को जिस एडवांस्ड मिसाइल से निशाना बनाया था, उसका नाम ब्लू स्पैरो है। बताया जा रहा है कि खामेनेई के घर पर 30 से ज्यादा मिसाइलें दागी गई थीं।
ब्लू स्पैरो (Blue Sparrow) इजरायल की एक एडवांस बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे आमतौर पर लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया जाता है। इसकी खास बात यह है कि यह अपने टारगेट पर हमला करने से पहले एक खास तरह का फ्लाइट पाथ अपनाती है। इसकी उड़ान का रास्ता ऐसा होता है कि यह पहले पृथ्वी के वातावरण के किनारे तक पहुंचती है और फिर बेहद तेज गति से अपने लक्ष्य की ओर गिरती है। इसी वजह से इसे अक्सर 'स्पेस मिसाइल' भी कहा जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस मिसाइल की रेंज करीब 2,000 किलोमीटर तक बताई जाती है। यह मिसाइल बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी पर चलती है, यानी पहले ऊपर जाती है और फिर तेजी से लक्ष्य पर गिरती है। यह मिसाइल अपने रास्ते में एक री-एंट्री व्हीकल छोड़ती है, जो बेहद तेज गति से लक्ष्य पर हमला करता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्लू स्पैरो मिसाइल का मलबा पश्चिमी इराक में मिला है। इससे यह संकेत मिलता है कि हमले के दौरान मिसाइल ने इराक के ऊपर से उड़ान भरी और फिर ईरान में अपने लक्ष्य पर हमला किया। यह तरीका इसलिए अपनाया जाता है ताकि हमले को ज्यादा सटीक बनाया जा सके।
फोर्ब्स की रिपोर्ट में कुछ डिफेंस एनालिस्ट के हवाले से बताया गया है कि स्पैरो मिसाइल सिस्टम के कुछ वर्जन को इस तरह बदला गया है कि लड़ाकू विमान लंबी दूरी से बैलिस्टिक-स्टाइल हथियार लॉन्च कर सकें। इससे एयरक्राफ्ट को दुश्मन के एयर-डिफेंस सिस्टम के करीब जाने की जरूरत नहीं पड़ती। यानी भारी सुरक्षा वाले टारगेट पर भी दूर से हमला किया जा सकता है।
ब्लू स्पैरो इजरायल की मिसाइलों के एक बड़े परिवार का हिस्सा है। इसमें अन्य मिसाइलें भी शामिल हैं, जैसे- ब्लैक स्पैरो (Black Sparrow), सिल्वर स्पैरो (Silver Sparrow)। असल में इन सिस्टम को पहले सोवियत स्कड मिसाइलों की नकल करने के लिए डिजाइन किया गया था, ताकि एयर-डिफेंस सिस्टम की टेस्टिंग की जा सके।
ब्लू स्पैरो मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज गति और ऊंचाई है। जब यह मिसाइल अंतरिक्ष के करीब तक जाकर वापस आती है, तो उसका हमला बेहद तेज और अचानक होता है। इस कारण एयर-डिफेंस सिस्टम के पास प्रतिक्रिया देने के लिए बहुत कम समय बचता है। इसी वजह से इस मिसाइल का इस्तेमाल आम तौर पर बेहद संवेदनशील और खास सैन्य अभियानों में ही किया जाता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत ने सीधे तौर पर ब्लू स्पैरो मिसाइल नहीं खरीदी है, लेकिन इसी तकनीक पर आधारित ROCKS (Crystal Maze-2) मिसाइल को अपने हथियार भंडार में शामिल किया है। भारतीय वायुसेना ने अप्रैल 2024 में अपने लड़ाकू विमान से इस मिसाइल का सफल फ्लाइट टेस्ट भी किया था।
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