
Iran-US War Day 3: ईरान ने अपने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का बदला लेने की कसम खाई है। यही वजह है कि वो इजराइल समेत खाड़ी के तमाम मुस्लिम देशों में स्थित अमेरिकी एयरबेस को निशाना बना रहा है। इसी बीच, खबर है कि ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई (IRGC) ने दावा किया है कि उसने तेल अवीव में इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस को निशाना बनाया। इसके अलावा हाइफा में सिक्योरिटी और मिलिट्री सेंटर्स तथा पूर्वी यरुशलम पर भी हमला किया है।
Fars News Agency के हवाले से जारी बयान में कहा गया कि “ज़ायोनी शासन के आपराधिक प्रधानमंत्री के ऑफिस और एयरफ़ोर्स कमांडर के मुख्यालय को टारगेट किया गया। इस हमले में ‘खेबर’ मिसाइलों के इस्तेमाल का दावा किया गया। सोमवार को यरुशलम के ऊपर कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं। इजराइली सेना ने बयान जारी कर कहा कि ईरान से लॉन्च की गई नई मिसाइलों का पता लगाया गया है। सेना के अनुसार, डिफेंस सिस्टम सक्रिय हैं और खतरे को रोकने की कोशिश की जा रही है।
ईरान की रेड क्रिसेंट सोसायटी के मुताबिक, US-इजराइली अभियान में अब तक ईरान में कम से कम 555 लोग मारे गए हैं। शनिवार से इजराइल और अमेरिका ने ईरान के कई इलाकों में हमले किए हैं। खामेनेई की हत्या के बाद शुरू हुई यह लड़ाई अब पूरे क्षेत्र में फैल चुकी है।
कुवैत में स्थित अमेरिकी दूतावास से काला धुआं उठता देखा गया। हालांकि एम्बेसी ने सीधे हमले की पुष्टि नहीं की, लेकिन लोगों से दूर रहने की अपील करते हुए सुरक्षा अलर्ट जारी किया। बयान में कहा गया कि कुवैत पर मिसाइल और UAV (ड्रोन) हमलों का खतरा बना हुआ है। एम्बेसी में न आएं। एम्बेसी स्टाफ सुरक्षित स्थान पर है। इसके अलावा दुबई, बहरीन, इराक और अन्य जगहों पर भी धमाकों की खबरें आई हैं।
कुवैत में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे और पावर स्टेशन को भी निशाना बनाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि 2003 में इराक युद्ध और 1990 में कुवैत पर हमले के बाद यह खाड़ी क्षेत्र में सबसे बड़ी सैन्य बढ़ोतरी है। अधिकारियों के मुताबिक, ईरानी जवाबी हमलों में अब तक खाड़ी क्षेत्र में 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें कुवैत में एक व्यक्ति भी शामिल है। लगातार बढ़ते हमलों के कारण पूरे पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
Ursula von der Leyen ने साइप्रस में एक ब्रिटिश एयर बेस और सऊदी तेल साइट अरामको पर हमलों के बाद ईरान और उसके सहयोगियों की आलोचना की। ब्रसेल्स में उन्होंने कहा कि हमें संघर्ष को कम करने और फैलने से रोकने के लिए गंभीर प्रयास करने होंगे। क्षेत्र की स्थिरता सबसे ज़्यादा जरूरी है।
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