
मध्य पूर्व की राजनीति में इन दिनों एक नया विवाद चर्चा का केंद्र बन गया है। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी संवेदनशील जानकारी अमेरिका को साझा की। यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु समझौते को लेकर बातचीत की संभावनाएं फिर से चर्चा में हैं और पाकिस्तान खुद को दोनों पक्षों के बीच एक संभावित मध्यस्थ के रूप में प्रस्तुत कर रहा है।
हालांकि पाकिस्तान सरकार ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है, लेकिन अमेरिकी कांग्रेस में इस मुद्दे का उठना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चा होना इस मामले को और अधिक गंभीर बना देता है।
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विवाद की शुरुआत सीआईए के पूर्व विश्लेषक लैरी जॉनसन के उस दावे से हुई, जिसमें उन्होंने अपने खुफिया सूत्रों का हवाला देते हुए कहा कि हाल ही में इशाक डार और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मुलाकात के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा हुई थी। दावे के अनुसार, डार ने रुबियो को बताया कि यदि ईरान के साथ जल्द कोई समझौता नहीं होता है तो तेहरान परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सकता है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि इस जानकारी को सुनकर अमेरिकी पक्ष हैरान रह गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हो सकी है।
मामला तब और सुर्खियों में आया जब 2 जून को अमेरिकी कांग्रेस में इस विषय पर चर्चा हुई। सांसद स्कॉट पेरी ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो से सीधे सवाल पूछा कि क्या उन्हें पाकिस्तान की ओर से ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में कोई विशेष जानकारी दी गई थी। रुबियो ने जवाब देते हुए कहा कि उन्हें ऐसी किसी जानकारी की जानकारी नहीं है और उन्होंने इस तरह की कोई रिपोर्ट नहीं सुनी है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का स्पष्ट रुख है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। रुबियो का यह बयान उन दावों के विपरीत माना जा रहा है, जिनमें कहा गया था कि इशाक डार ने उन्हें गोपनीय जानकारी दी थी।
अमेरिकी कांग्रेस में चर्चा के दो दिन बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने औपचारिक प्रतिक्रिया जारी की। मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इशाक डार और मार्को रुबियो की मुलाकात में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई बातचीत नहीं हुई थी। पाकिस्तान ने इन रिपोर्टों को भ्रामक और तथ्यों से परे बताते हुए खारिज कर दिया। इस्लामाबाद का कहना है कि मुलाकात का एजेंडा द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय मुद्दों तक सीमित था।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की हालिया रिपोर्टों के अनुसार ईरान के पास बड़ी मात्रा में 60 प्रतिशत तक संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संवर्धन का स्तर 90 प्रतिशत तक पहुंचता है तो उसका उपयोग परमाणु हथियार निर्माण में किया जा सकता है। इसी वजह से अमेरिका, इजराइल और पश्चिमी देशों की चिंताएं लगातार बढ़ती रही हैं। दूसरी ओर ईरान लगातार यह कहता आया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल शांतिपूर्ण और ऊर्जा संबंधी उद्देश्यों के लिए है।
इस पूरे मामले को गंभीर इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि हाल के महीनों में पाकिस्तान खुद को ईरान और अमेरिका के बीच संवाद बढ़ाने वाले देश के रूप में पेश कर रहा है। यदि किसी मध्यस्थ देश पर गोपनीय जानकारी साझा करने के आरोप लगते हैं, तो उसकी विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। हालांकि फिलहाल आरोपों के समर्थन में कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है। न तो अमेरिकी प्रशासन ने इन दावों की पुष्टि की है और न ही ईरान ने इस विषय पर कोई सार्वजनिक टिप्पणी की है।
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