
नई दिल्ली/गुरुग्राम: विज्ञान ने बेऔलाद दंपतियों को माता-पिता बनने का सुख तो दिया, लेकिन इसी विज्ञान की आड़ में जब लापरवाही या साज़िश का खेल खेला जाए, तो ज़िंदगी एक बुरे सपने में बदल जाती है। गुरुग्राम के राहुल राठौर और उनकी पत्नी मीनू राठौर के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। जिस IVF (इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन) तकनीक के ज़रिए उन्होंने अपने आंगन में खुशियां चहकने की उम्मीद की थी, उसी तकनीक ने उन्हें एक ऐसे दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां ममता और सच के बीच एक खौफनाक जंग छिड़ गई है।
*We Need Urgent Help*
Parents Contact No :- 8130397073
🚨Please is video ko zyada se zyada share karein. Shayad ek share in Massum Bacho ko unke real parents se milva de or hamari family ko hamare bachcho tak pahunchane mein madad kar de. Please iss video ko apne WhatsApp,… pic.twitter.com/KqHduQL7gw— Rahul Rathore (@RathoreRahul39) June 8, 2026
जनवरी 2026 की शुरुआत राठौर परिवार के लिए दोहरी खुशियां लेकर आई थी। मीनू राठौर ने दो खूबसूरत जुड़वां बेटियों को जन्म दिया। घर में बधाइयों का तांता लगा था, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए, राहुल और मीनू की आंखों में खुशियों की जगह एक अनजाना डर और शक घर करने लगा। दोनों बच्चियों की शक्ल-सूरत न तो अपनी मां मीनू से मिल रही थी और न ही पिता राहुल से। शुरुआत में इसे सामान्य माना गया, लेकिन दिल के किसी कोने में बैठा शक का कीड़ा शांत नहीं हो रहा था। आखिरकार, सच का पता लगाने के लिए उन्होंने आधुनिक विज्ञान की ही एक और विधा का सहारा लिया-DNA टेस्ट। उन्हें उम्मीद थी कि यह टेस्ट उनके शक को महज़ एक वहम साबित कर देगा, लेकिन रिपोर्ट ने जो खुलासा किया, उससे उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
जिस पितृत्व (Paternity) टेस्ट का इस्तेमाल अक्सर कोर्ट-कचहरी और विवादों को सुलझाने के लिए होता है, उसने इस हंसते-खेलते परिवार को कभी न भूलने वाला ज़ख्म दे दिया। DNA टेस्ट के नतीजों ने चीख-चीख कर गवाही दी कि मीनू के गर्भ से पैदा हुईं वे जुड़वां बच्चियां बायोलॉजिकली राहुल और मीनू की हैं ही नहीं! इस रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि दिल्ली के उस नामी क्लिनिक में मीनू राठौर के गर्भ (Uterus) में किसी दूसरे अनजान जोड़े का भ्रूण (Embryo) ट्रांसफर कर दिया गया था। यानी नौ महीने तक जिस बच्चे को मीनू ने अपने खून से सींचा, वह किसी और की अमानत था।
What if the babies you brought home after IVF were not biologically yours?
This couple says their world collapsed after DNA tests allegedly showed that both of their children do not match either the father or the mother.
They claim the children’s physical features also raised…— Nut Boult (@NutBoult) June 12, 2026
इस खौफनाक सच के सामने आने के बाद राहुल राठौर ने पूरी क्रोनोलॉजी बयां की। उन्होंने बताया कि द्वारका के एक प्रतिष्ठित अस्पताल ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित एक इनफर्टिलिटी क्लिनिक में रेफर किया था, जहां डॉ. शिवानी सचदेव इस पूरे केस को देख रही थीं। दंपति का आरोप है कि 9 जनवरी 2025 को डॉक्टरों ने उन्हें आश्वस्त किया था कि भ्रूण पूरी तरह से उनके ही स्पर्म और एग का इस्तेमाल करके तैयार किया जाएगा। इसके बाद 14 मई 2025 को मीनू के गर्भ में भ्रूण डाला गया। डॉक्टरों के इस भरोसे के पीछे आखिर क्या खेल चल रहा था? क्या यह महज़ एक मानवीय भूल थी या फिर इसके पीछे मेडिकल माफिया का कोई बड़ा रैकेट काम कर रहा था?
इस पूरे मामले में सबसे दर्दनाक स्थिति मीनू राठौर की है। जन्म देने के बाद भी वह मानसिक रूप से इस कदर टूट चुकी हैं कि वे बच्चियों को ब्रेस्टफीडिंग (स्तनपान) तक नहीं करा पा रही हैं। रोते हुए मीनू ने कहा, "मुझे मेरा अपना बच्चा चाहिए। जिस तरह मैं अपने असली बच्चे को ढूंढ रही हूँ, वैसे ही वह मां भी अपने बच्चे के लिए तड़प रही होगी, जिसका बच्चा इस वक्त मेरे पास है।" हालांकि, इस कड़वे सच के बावजूद राठौर दंपति की इंसानियत ज़िंदा है। उन्होंने साफ कहा है कि भले ही ये बच्चियां उनकी नहीं हैं, फिर भी वे उनकी पूरी देखभाल कर रहे हैं क्योंकि इन मासूमों का कोई कसूर नहीं है।
यह मामला सिर्फ गुरुग्राम या दिल्ली तक सीमित नहीं दिख रहा है। मीनू राठौर ने एक और चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि जब से उनका मामला सामने आया है, उन्हें कई देशों के ऐसे जोड़ों के फोन आ रहे हैं, जिनके साथ अलग-अलग IVF क्लीनिकों ने इसी तरह की धोखाधड़ी की है। इससे यह आशंका गहरा गई है कि क्या इसके पीछे कोई इंटरनेशनल फर्टिलिटी स्कैम चल रहा है?
फिलहाल, दिल्ली की एक अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस को तुरंत FIR दर्ज करने और गहन जांच के निर्देश दिए हैं। राहुल राठौर ने मांग की है कि सच को सामने लाने के लिए अस्पताल के IVF रिकॉर्ड, लैब दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और CCTV फुटेज को तुरंत ज़ब्त कर सुरक्षित किया जाए। वहीं, पीड़ित मां ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से भी इस मामले में न्याय की गुहार लगाई है। अब देखना यह है कि पुलिस की तफ्तीश में इस मेडिकल लापरवाही या साज़िश का क्या सच बाहर आता है।
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