गुरुग्राम IVF स्कैम:'पैदा तो मैंने किया, पर ये जुड़वां बच्चियां मेरी नहीं!' एक मां का खौफनाक सच

Published : Jun 14, 2026, 11:14 AM ISTUpdated : Jun 14, 2026, 11:19 AM IST
ivf clinic gurgaon embryo swap dna test twins investigation couple rathore

सार

क्या IVF क्लिनिक में भ्रूण बदलकर किसी और का बच्चा दे दिया गया? DNA टेस्ट में माता-पिता से मैच न होने का असली कारण क्या है? क्या IVF प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही या धोखाधड़ी हुई? आखिर किसकी पहचान हैं जुड़वां बेटियां-और सच कब सामने आएगा? 

नई दिल्ली/गुरुग्राम: विज्ञान ने बेऔलाद दंपतियों को माता-पिता बनने का सुख तो दिया, लेकिन इसी विज्ञान की आड़ में जब लापरवाही या साज़िश का खेल खेला जाए, तो ज़िंदगी एक बुरे सपने में बदल जाती है। गुरुग्राम के राहुल राठौर और उनकी पत्नी मीनू राठौर के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ। जिस IVF (इन विट्रो फर्टिलाइज़ेशन) तकनीक के ज़रिए उन्होंने अपने आंगन में खुशियां चहकने की उम्मीद की थी, उसी तकनीक ने उन्हें एक ऐसे दोराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां ममता और सच के बीच एक खौफनाक जंग छिड़ गई है।

 

 

शक की पहली चिंगारी: जब शक्लें नहीं मिलीं तो धड़क उठा दिल

जनवरी 2026 की शुरुआत राठौर परिवार के लिए दोहरी खुशियां लेकर आई थी। मीनू राठौर ने दो खूबसूरत जुड़वां बेटियों को जन्म दिया। घर में बधाइयों का तांता लगा था, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीतते गए, राहुल और मीनू की आंखों में खुशियों की जगह एक अनजाना डर और शक घर करने लगा। दोनों बच्चियों की शक्ल-सूरत न तो अपनी मां मीनू से मिल रही थी और न ही पिता राहुल से। शुरुआत में इसे सामान्य माना गया, लेकिन दिल के किसी कोने में बैठा शक का कीड़ा शांत नहीं हो रहा था। आखिरकार, सच का पता लगाने के लिए उन्होंने आधुनिक विज्ञान की ही एक और विधा का सहारा लिया-DNA टेस्ट। उन्हें उम्मीद थी कि यह टेस्ट उनके शक को महज़ एक वहम साबित कर देगा, लेकिन रिपोर्ट ने जो खुलासा किया, उससे उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

DNA रिपोर्ट का महाविस्फोट: 'आप इन बच्चों के बायोलॉजिकल पेरेंट्स नहीं हैं!'

जिस पितृत्व (Paternity) टेस्ट का इस्तेमाल अक्सर कोर्ट-कचहरी और विवादों को सुलझाने के लिए होता है, उसने इस हंसते-खेलते परिवार को कभी न भूलने वाला ज़ख्म दे दिया। DNA टेस्ट के नतीजों ने चीख-चीख कर गवाही दी कि मीनू के गर्भ से पैदा हुईं वे जुड़वां बच्चियां बायोलॉजिकली राहुल और मीनू की हैं ही नहीं! इस रिपोर्ट ने साफ कर दिया कि दिल्ली के उस नामी क्लिनिक में मीनू राठौर के गर्भ (Uterus) में किसी दूसरे अनजान जोड़े का भ्रूण (Embryo) ट्रांसफर कर दिया गया था। यानी नौ महीने तक जिस बच्चे को मीनू ने अपने खून से सींचा, वह किसी और की अमानत था।

 

 

बंद कमरों का खेल: एग और स्पर्म के बदले 'भ्रूण की अदला-बदली'?

इस खौफनाक सच के सामने आने के बाद राहुल राठौर ने पूरी क्रोनोलॉजी बयां की। उन्होंने बताया कि द्वारका के एक प्रतिष्ठित अस्पताल ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित एक इनफर्टिलिटी क्लिनिक में रेफर किया था, जहां डॉ. शिवानी सचदेव इस पूरे केस को देख रही थीं। दंपति का आरोप है कि 9 जनवरी 2025 को डॉक्टरों ने उन्हें आश्वस्त किया था कि भ्रूण पूरी तरह से उनके ही स्पर्म और एग का इस्तेमाल करके तैयार किया जाएगा। इसके बाद 14 मई 2025 को मीनू के गर्भ में भ्रूण डाला गया। डॉक्टरों के इस भरोसे के पीछे आखिर क्या खेल चल रहा था? क्या यह महज़ एक मानवीय भूल थी या फिर इसके पीछे मेडिकल माफिया का कोई बड़ा रैकेट काम कर रहा था?

ममता का दर्द: "जिस तरह मैं तड़प रही हूं, कोई और मां भी तड़प रही होगी"

इस पूरे मामले में सबसे दर्दनाक स्थिति मीनू राठौर की है। जन्म देने के बाद भी वह मानसिक रूप से इस कदर टूट चुकी हैं कि वे बच्चियों को ब्रेस्टफीडिंग (स्तनपान) तक नहीं करा पा रही हैं। रोते हुए मीनू ने कहा, "मुझे मेरा अपना बच्चा चाहिए। जिस तरह मैं अपने असली बच्चे को ढूंढ रही हूँ, वैसे ही वह मां भी अपने बच्चे के लिए तड़प रही होगी, जिसका बच्चा इस वक्त मेरे पास है।" हालांकि, इस कड़वे सच के बावजूद राठौर दंपति की इंसानियत ज़िंदा है। उन्होंने साफ कहा है कि भले ही ये बच्चियां उनकी नहीं हैं, फिर भी वे उनकी पूरी देखभाल कर रहे हैं क्योंकि इन मासूमों का कोई कसूर नहीं है।

इंटरनेशनल कनेक्शन और कानूनी शिकंजा: क्या खुलेगा कोई बड़ा राज?

यह मामला सिर्फ गुरुग्राम या दिल्ली तक सीमित नहीं दिख रहा है। मीनू राठौर ने एक और चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि जब से उनका मामला सामने आया है, उन्हें कई देशों के ऐसे जोड़ों के फोन आ रहे हैं, जिनके साथ अलग-अलग IVF क्लीनिकों ने इसी तरह की धोखाधड़ी की है। इससे यह आशंका गहरा गई है कि क्या इसके पीछे कोई इंटरनेशनल फर्टिलिटी स्कैम चल रहा है?

फिलहाल, दिल्ली की एक अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस को तुरंत FIR दर्ज करने और गहन जांच के निर्देश दिए हैं। राहुल राठौर ने मांग की है कि सच को सामने लाने के लिए अस्पताल के IVF रिकॉर्ड, लैब दस्तावेज़, इलेक्ट्रॉनिक डेटा और CCTV फुटेज को तुरंत ज़ब्त कर सुरक्षित किया जाए। वहीं, पीड़ित मां ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से भी इस मामले में न्याय की गुहार लगाई है। अब देखना यह है कि पुलिस की तफ्तीश में इस मेडिकल लापरवाही या साज़िश का क्या सच बाहर आता है।

PREV

Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।

Read more Articles on

Recommended Stories

Jaipur Traffic: कैमरे में कैद-स्क्रीन पर नाम! अब चौराहों पर होगी ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की बेइज्जती
92 करोड़ की विदेशी फंडिंग से नक्सल नेटवर्क! अमेरिकी मिशनरी संस्था समेत 7 लोगों पर FIR