92 करोड़ की विदेशी फंडिंग से नक्सल नेटवर्क! अमेरिकी मिशनरी संस्था समेत 7 लोगों पर FIR

Published : Jun 14, 2026, 10:40 AM IST
92 करोड़ की विदेशी फंडिंग से नक्सल नेटवर्क! अमेरिकी मिशनरी संस्था समेत 7 लोगों पर FIR

सार

नक्सली गतिविधियों के लिए ₹92 करोड़ की विदेशी फंडिंग का खुलासा। ED की शिकायत पर बेंगलुरु पुलिस ने अमेरिकी संस्था TTI और 7 लोगों पर UAPA के तहत FIR दर्ज की है। अवैध डेबिट कार्ड से ₹44 करोड़ निकाले गए।

बेंगलुर : भारत में नक्सली गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए विदेश से 92 करोड़ रुपये की फंडिंग का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत पर बेंगलुरु पुलिस ने एक अमेरिकी ईसाई मिशनरी संस्था और 7 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। आरोपियों में कर्नाटक के चार लोग भी शामिल हैं।

बेंगलुरु के कोत्तनूर पुलिस स्टेशन में अमेरिका की 'द टिमोथी इनिशिएटिव' (TTI) नाम की संस्था के खिलाफ केस दर्ज हुआ है। इसके अलावा, बेंगलुरु के जोनाथन एस. राजन, मीका मार्क, अजित वर्गीस मथाई, मैसूर के सुप्रीम जॉय, छत्तीसगढ़ के वर्गीस चाको और असम के बबलू कुर्मी को भी आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ UAPA और भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत साजिश रचने, धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज बनाने के आरोप में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

44 करोड़ रुपये निकाले गए

यह पूरा मामला तब खुला जब ED ने इस साल अप्रैल में एक बड़ी कार्रवाई की थी। जांच में 95 करोड़ रुपये से ज्यादा के अवैध विदेशी फंड के इस्तेमाल का पता चला था। जांच में सामने आया कि 'संतोष कुमार' नाम से अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक के एक हजार से ज्यादा विदेशी डेबिट कार्ड अवैध रूप से भारत में बांटे गए। इन कार्ड्स का इस्तेमाल कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और असम जैसे राज्यों में हुआ और करीब 44 करोड़ रुपये निकाले गए।

शेल कंपनियों का जाल भी सामने आया

आरोपियों में से एक मीका मार्क के पास से 24 विदेशी डेबिट कार्ड मिले थे। जांच में पता चला कि इन कार्ड्स का इस्तेमाल छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों के लिए किया गया। वहीं, एक और आरोपी अजित वर्गीस से पूछताछ में बेंगलुरु में चल रही शेल कंपनियों के लेन-देन का भी खुलासा हुआ। पैसों का कुछ ट्रांजैक्शन बेंगलुरु के कोत्तनूर इलाके में हुआ था, इसीलिए यहीं के पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है।

उग्रवाद की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल होता था पैसा

जांच में यह भी सामने आया है कि ATM से निकाला गया यह अवैध पैसा TTI की गतिविधियों, जैसे कि धर्मोपदेश और वामपंथी उग्रवाद की ट्रेनिंग देने के लिए पूरे भारत में इस्तेमाल किया जा रहा था। फिलहाल, एक ACP के नेतृत्व में पुलिस टीम इस मामले की जांच कर रही है, जो अपनी रिपोर्ट ED को सौंपेगी।

कैसे खुला यह पूरा मामला?

इस साल 18 अप्रैल को मीका मार्क नाम के एक शख्स को केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था। उसके पास से ट्रूइस्ट बैंक के 24 विदेशी डेबिट कार्ड मिले। जांच में पता चला कि वह कई बार भारत आया और हर बार अपने साथ विदेशी डेबिट कार्ड लेकर आता था। वह भारत में TTI के लिए पैसों के लेन-देन का मुख्य काम देखता था। इन सभी कार्ड्स पर 'संतोष कुमार' (एक गुमनाम नाम) लिखा हुआ था। वह आरोपी अजित वर्गीस के कहने पर असली दस्तावेजों को छिपा रहा था। उसने भारत में 1000 से ज्यादा ऐसे नकली डेबिट कार्ड बांटे थे।

आरोपी ने सबूत मिटाने के लिए क्लाउड ऐप पर मौजूद डेटा को रिमोट एक्सेस के जरिए TTI के अमेरिकी सर्वर से डिलीट कर दिया। साथ ही, उसने बैंक खाते भी डिलीट कर दिए। उसने नक्सल प्रभावित इलाकों में 6.34 करोड़ रुपये का नकद लेन-देन भी किया था। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने कुल मिलाकर 95 करोड़ रुपये से ज्यादा के अवैध धन का इस्तेमाल किया है।

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