
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में 15 साल पुरानी सत्ता गंवाने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शुरू हुआ अंदरूनी कलह अब खुलकर सामने आ गया है और पार्टी टूटने की कगार पर है। बागी सांसद आज दिल्ली में एक अहम बैठक कर रहे हैं। इन बागियों को एकजुट करने में लगे बीजेपी नेता और बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी इस बैठक में शामिल होंगे। बीजेपी के समर्थन से ये बागी गुट खुद को 'असली टीएमसी' बता रहा है और कल लोकसभा स्पीकर को चिट्ठी सौंपने की तैयारी में है।
यह पूरा मामला ठीक वैसा ही है जैसा कुछ समय पहले पश्चिम बंगाल विधानसभा में हुआ था। वहां 58 बागी टीएमसी विधायकों ने एक अलग विपक्षी गुट बना लिया था, जिसे स्पीकर ने मान्यता भी दे दी थी। अब लोकसभा में भी बागी सांसद कुछ ऐसा ही करने की फिराक में हैं। इस बगावत की मुख्य वजह ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के नेशनल जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी का बढ़ता दबदबा बताया जा रहा है, जिससे पार्टी के पुराने नेता नाराज हैं।
इस बगावत के बीच ममता बनर्जी ने भी बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने पार्टी से नाराज चल रहे और संगठन छोड़ चुके नेताओं को पूरी तरह किनारे करते हुए टीएमसी में नए सिरे से बदलाव किए हैं। नेशनल वर्किंग कमेटी में सौगत रॉय और ज्योतिप्रिय मल्लिक को शामिल किया गया है। वहीं, पार्टी छोड़ चुके बागियों को उनके पदों से हटा दिया गया है। सायनी घोष और सुदीप बंदोपाध्याय को उनकी जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया गया है। इस बैठक में महुआ मोइत्रा और बिमान बनर्जी जैसे बड़े नेता जूम (Zoom) के जरिए वर्चुअली शामिल हुए।
पार्टी के अंदरूनी झगड़ों के बीच तृणमूल कांग्रेस में यह एक बड़ा फेरबदल है। पार्टी के अलग-अलग विंग और स्थानीय इकाइयों में भी बड़े बदलाव किए गए हैं। युवा नेता अर्नब बनर्जी को राज्य तृणमूल यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि कुणाल घोष को उत्तरी कोलकाता का संगठनात्मक जिला अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। पार्टी की नेशनल वर्किंग कमेटी की बैठक में इन नए फैसलों पर मुहर लगी। इसके अलावा, मोसर्रफ होसैन को अल्पसंख्यक सेल का अध्यक्ष और अलिफा अहमद को महिला विंग (महिला मोर्चा) का अध्यक्ष चुना गया है।
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