JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, रिजल्ट और मूल्यांकन विवाद के खिलाफ झारखंड में छात्र आंदोलन कर रहे हैं और CBI जांच की मांग कर रहे हैं। आखिर क्या है पूरा विवाद, जानते हैं।
JPSC-JSSC Exam Controversy: झारखंड में हजारों युवाओं के लिए सरकारी भर्ती परीक्षा सिर्फ एक परीक्षा नहीं, बल्कि पक्की सरकारी नौकरी तक पहुंचने का रास्ता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में झारखंड पब्लिक सर्विस कमीशन (JPSC) और झारखंड स्टाफ सिलेक्शन कमीशन (JSSC) की परीक्षाएं लगातार विवादों में रही हैं। पेपर लीक, परीक्षा में गड़बड़ी, रिजल्ट में देरी, मूल्यांकन पर सवाल और कोर्ट केस जैसे मामलों ने भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ताजा विवाद अब राज्य के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में बदल चुका है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला?
स्टूडेंट्स vs सरकार: नाराज छात्र विधानसभा घेराव की तैयारी में
सोमवार को भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्र झारखंड विधानसभा की ओर मार्च करने की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर, राज्य सरकार का कहना था कि उसने छात्रों की 98 फीसदी मांगें मान ली हैं। हालांकि, छात्रों ने सरकार के इस दावे को खारिज कर दिया। छात्रों का कहना है कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक कथित गड़बड़ियों, खासकर JSSC CGL परीक्षा, की जांच CBI से कराने की मांग नहीं मानी जाती। बता दें कि उम्मीदवारों के लिए समस्या सिर्फ पेपर लीक या नकल के आरोपों तक सीमित नहीं है। सरकारी नौकरी के लिए युवा कई वर्षों तक तैयारी करते हैं। ऐसे में भर्ती प्रक्रिया में देरी का सीधा असर उनकी उम्र, करियर और आगे की तैयारी पर पड़ता है। यही वजह है कि छात्र अब पूरी भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने की मांग कर रहे हैं।
JPSC के तीन सदस्यों ने क्यों दिया इस्तीफा?
मौजूदा विवाद के बीच रविवार को JPSC के तीन सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया। अजीता भट्टाचार्य, अनिमा हंसदा और जमाल अहमद ने आयोग के चेयरपर्सन एल खियांग्ते के 22 जुलाई को पद छोड़ने के कुछ दिन बाद इस्तीफा दिया। राज्यपाल संतोष गंगवार ने इन तीनों सदस्यों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। इन तीनों सदस्यों को झारखंड CID ने परीक्षा में पेपर लीक और दूसरी कथित गड़बड़ियों से जुड़े मामले में पूछताछ के लिए भी बुलाया है। भट्टाचार्य से सोमवार को, जमाल अहमद से 12 अगस्त और अनिमा हंसदा से 14 अगस्त को पूछताछ होनी है।
JPSC का ताजा विवाद कैसे शुरू हुआ?
JPSC का ताजा विवाद अप्रैल में आयोजित 14वीं कंबाइंड सिविल सर्विसेज परीक्षा से शुरू हुआ। इस परीक्षा के जरिए 103 पदों पर भर्ती होनी थी। प्रीलिम्स परीक्षा के बाद 2,204 उम्मीदवारों को मेन्स परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया।
प्रीलिम्स रिजल्ट सामने आने के बाद उम्मीदवारों ने कई सवाल उठाए। इनमें कैटेगरी के हिसाब से कट-ऑफ जारी नहीं करने और मेरिट लिस्ट तैयार करने के तरीके से जुड़े सवाल शामिल थे।
उम्मीदवारों ने यह भी सवाल किया कि मेरिट लिस्ट पर आयोग के संवैधानिक सदस्य के हस्ताक्षर क्यों नहीं थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर कथित OMR आंसर शीट सामने आने से विवाद और बढ़ गया।
वायरल OMR शीट ने बढ़ाए सवाल
सोशल मीडिया पर वायरल एक कथित OMR शीट में दावा किया गया कि दूसरे राज्य के एक उम्मीदवार ने पेपर-1 में सिर्फ 48 सवाल हल किए थे, फिर भी वह मेन्स परीक्षा के लिए क्वालिफाई कर गया। इसी तरह के आरोप बाद में एक बैकलॉग भर्ती परीक्षा को लेकर भी सामने आए। हालांकि, वायरल OMR शीट की वास्तविकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसके बावजूद इन आरोपों के बाद JPSC कार्यालय के बाहर प्रदर्शन शुरू हो गए। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले की CID जांच के आदेश दिए और एक स्पेशल जांच टीम भी बनाई।
JPSC परीक्षा विवाद में निजी एजेंसी और भर्ती रैकेट का एंगल
जांच आगे बढ़ने के साथ इसका दायरा भी बढ़ा। CID ने परीक्षा आयोजित कराने वाली निजी एजेंसी से जुड़े कई अधिकारियों और कर्मचारियों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार लोगों में गोड्डा में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर अभय तिवारी भी शामिल था। जांचकर्ताओं का आरोप है कि वह कथित भर्ती रैकेट में भूमिका निभा रहा था।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जांचकर्ताओं को पता चला कि तिवारी सरकारी अधिकारी होने के साथ-साथ परीक्षा से जुड़ी निजी टेस्टिंग एजेंसी TSR Data Processing Private Limited (TDPL) में मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर भी काम कर रहा था।
इस एजेंसी को झारखंड सरकार ने मई 2025 में समझौते की शर्तों का पालन नहीं करने के आरोप में ब्लैकलिस्ट किया था। इसके बावजूद बाद में उसे परीक्षा से जुड़ा काम दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी को दूसरे राज्यों में भी ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था।
CID इस बात की जांच कर रही है कि क्या अभय तिवारी, एजेंसी और उनके कुछ रिश्तेदारों के बीच भर्ती से जुड़ा कोई संबंध था। उन पर उम्मीदवारों से पैसे मांगने वाले बिचौलिए के तौर पर काम करने के आरोप भी जांच के दायरे में हैं। हालांकि, इन आरोपों पर अभी अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
JSSC CGL परीक्षा भी क्यों बनी बड़ा विवाद?
JSSC Combined Graduate Level (CGL) परीक्षा भर्ती प्रक्रिया में लगातार विवादों का एक बड़ा उदाहरण बन गई है। CGL परीक्षा पहली बार जनवरी 2024 में आयोजित हुई थी। परीक्षा से कुछ घंटे पहले प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगे, जिसके बाद परीक्षा रद्द कर दी गई।
इसके बाद JSSC ने सितंबर 2024 में दोबारा परीक्षा आयोजित की। यह परीक्षा 823 केंद्रों पर हुई। नकल रोकने के लिए सरकार ने परीक्षा के दौरान करीब छह घंटे तक इंटरनेट सेवा भी बंद रखी थी।
इसके बावजूद उम्मीदवारों ने फिर कथित पेपर लीक और अलग-अलग शिफ्ट से क्वालिफाई करने वाले उम्मीदवारों की संख्या में असामान्य अंतर जैसे आरोप लगाए।मामला झारखंड हाई कोर्ट पहुंचा। कोर्ट ने आरोपों की जांच पूरी होने तक दिसंबर 2024 में फाइनल रिजल्ट जारी करने पर रोक लगा दी।
छात्र अब क्या मांग कर रहे हैं?
मौजूदा आंदोलन की शुरुआत JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध से हुई थी। लेकिन अब यह आंदोलन पूरी भर्ती व्यवस्था में सुधार की मांग में बदल गया है।
प्रदर्शनकारी 2019 के बाद आयोजित कई परीक्षाओं को लेकर सवाल उठा रहे हैं। इनमें JSSC CGL, JSSC Junior Engineer और PGT परीक्षा शामिल हैं।
छात्रों की प्रमुख मांगों में संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने, कैटेगरी के अनुसार कट-ऑफ जारी करने, OMR कॉपी और रिस्पॉन्स शीट उपलब्ध कराने और गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल है।
इन सभी मांगों के बीच छात्रों की सबसे बड़ी मांग JSSC CGL समेत कथित गड़बड़ियों की CBI जांच कराना है।
फिलहाल छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। इनमें देवेंद्र नाथ महतो भी शामिल हैं। रविवार को ब्लड ग्लूकोज लेवल गिरने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। मंत्रियों ने उनसे वीडियो कॉल पर बात की और उपवास खत्म करने की अपील की।
सरकार का दावा- 98 फीसदी मांगें मानी गईं
रविवार को छात्रों और राज्य सरकार के बीच बातचीत का छठा दौर हुआ। इसके बाद सरकार ने दावा किया कि उसने छात्रों की 98 फीसदी मांगें मान ली हैं।
सरकार की ओर से घोषित कदमों में 14वीं JPSC प्रीलिम्स परीक्षा को रद्द करना भी शामिल है।
हालांकि, छात्र सरकार के इस दावे से सहमत नहीं हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी मुख्य मांगों, खासकर कथित भर्ती गड़बड़ियों की CBI जांच और जवाबदेही तय करने को लेकर स्पष्ट फैसला नहीं होता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
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