Farming Business: मध्य प्रदेश की प्रोफेसर निधि कटारे की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। 10 साल जिस कॉलेज में पढ़ाया, उसे टूटता देख वो टूट गईं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी माइक्रोबायोलॉजी की नॉलेज से मशरूम की खेती शुरू की। आज वो हर महीने 1.5 लाख रुपये कमा रही हैं।

Nidhi Katare Mushroom Business: मध्य प्रदेश की प्रोफेसर निधि कटारे की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। एक दिन अचानक उनकी जिंदगी बदल गई। जिस कॉलेज में उन्होंने 10 साल तक पढ़ाया, उसे अपनी आंखों के सामने मलबे में तब्दील होते देखा। वो बुरी तरह टूट गई थीं। लेकिन उन्होंने अपने दर्द को ही अपनी ताकत बना लिया। आज वो मशरूम की खेती और इसके प्रोडक्ट्स से हर महीने 1.5 लाख रुपये तक की शानदार कमाई कर रही हैं।

10 साल जहां पढ़ाया, वो कॉलेज हो गया जमींदोज!

उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में पली-बढ़ीं निधि कटारे ने ग्वालियर की जीवाजी यूनिवर्सिटी से माइक्रोबायोलॉजी में एमएससी की है। साल 2007 में उन्होंने ग्वालियर के ही एक प्राइवेट कॉलेज में पढ़ाना शुरू किया। करीब एक दशक तक उन्होंने वहां बच्चों को पढ़ाया। कॉलेज की साइंस लैब भी उन्होंने ही तैयार करवाई थी। लेकिन 2016 में एक दिन जब वो कॉलेज पहुंचीं, तो पता चला कि बिल्डिंग को जल्द ही गिराया जाने वाला है। अपनी सालों की मेहनत को मलबे में बदलता देख निधि को गहरा सदमा लगा। उन्हें लगा जैसे उनकी सारी मेहनत बेकार हो गई। इसी दौरान उन्होंने तय किया कि अब वो अपना खुद का कुछ काम करेंगी।

बच्चों को जो पढ़ाती थीं, उसी का शुरू किया बिजनेस

निधि कॉलेज में बच्चों को मशरूम कल्टीवेशन यानी मशरूम की खेती के बारे में भी पढ़ाती थीं। माइक्रोबायोलॉजी बैकग्राउंड होने की वजह से उन्हें मशरूम उगाने के साइंटिफिक तरीकों की अच्छी खासी नॉलेज थी। ऐसे में जब दूसरे कॉलेजों से जॉब के ऑफर आए, तो उन्होंने उन्हें ठुकरा दिया। उन्होंने अपनी इसी नॉलेज को बिजनेस में बदलने का फैसला किया। साल 2017 में उन्होंने 'Natural Bio Impact and Research Pvt Ltd' नाम से अपनी कंपनी शुरू की। सिर्फ 3,000 रुपये लगाकर उन्होंने 10 किलो ऑयस्टर मशरूम स्पॉन (बीज) खरीदा और अपने घर के 10x10 फीट के कमरे में मशरूम उगाना शुरू कर दिया।

पहली कोशिश में नहीं मिली उम्मीद के मुताबिक कामयाबी

बिजनेस शुरू करते ही उन्हें तुरंत कामयाबी नहीं मिली। उन्हें उम्मीद थी कि 10 किलो स्पॉन से करीब 100 किलो मशरूम निकलेगा। लेकिन असल में पैदावार उम्मीद से करीब 30 फीसदी कम हुई। प्रोडक्शन कम होने से मुनाफा भी खास नहीं हुआ। इसके बावजूद निधि और उनके पति ने हार नहीं मानी और लगातार कोशिश करते रहे।

1,500 स्क्वायर फीट के घर को ही बना दिया लैब

निधि ने अपने 1,500 स्क्वायर फीट के पुश्तैनी घर को ही लैब में बदल दिया। वहां उन्होंने इनक्यूबेशन, इनोक्यूलेशन और पाश्चराइजेशन के लिए अलग-अलग कमरों का सेटअप तैयार किया। आज वो हर महीने करीब 1,000 किलो मशरूम स्पॉन तैयार कर रही हैं। इन बीजों को वो मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कम से कम 150 किसानों को बेच रही हैं।

ताजे मशरूम से लेकर ड्राई मशरूम तक कई प्रोडक्ट्स

निधि मुख्य रूप से 'Pleurotus Florida' वैरायटी के ऑयस्टर मशरूम उगाती हैं। ताजे मशरूम को वो करीब 100 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचती हैं। वहीं, धूप में सुखाए गए मशरूम को फार्मा कंपनियों को करीब 800 रुपये प्रति किलो के रेट पर बेचा जाता है। उनका बिजनेस सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। मशरूम स्पॉन और ताजे-सूखे मशरूम के अलावा, वो मशरूम पापड़, अचार, बिस्किट और प्रोटीन पाउडर जैसे कई प्रोडक्ट्स भी बना रही हैं। इन सबके जरिए आज निधि हर महीने 1.5 लाख रुपये तक की कमाई कर रही हैं।

पति ने भी छोड़ी नौकरी, पत्नी के बिजनेस में दिया साथ

इस कामयाबी के पीछे निधि के पति संजय कटारे का भी बड़ा हाथ है। जब निधि ने बिजनेस शुरू किया था, तब संजय रिलायंस में ब्रांच मैनेजर के तौर पर काम कर रहे थे। बाद में पत्नी के बिजनेस को बढ़ाने के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी। वो मार्केटिंग और बिजनेस एक्सपेंशन में मदद करने लगे। शुरुआत में मशरूम के लिए सही बाजार खोजना एक बड़ा चैलेंज था। एक वक्त ऐसा भी था जब संजय ने दिल्ली के बाजारों में व्यापारियों से संपर्क करने के लिए घर-घर जाकर मशरूम बेचे थे।

कोरोना काल में मिला नया मौका

शुरुआती दिनों में कम पैदावार की वजह से मुनाफा कमाना मुश्किल हो रहा था। एक समय तो ऐसा भी आया जब कपल ने बिजनेस बंद करके वापस प्राइवेट जॉब में लौटने का मन बना लिया था। लेकिन कोविड-19 महामारी की पहली लहर के दौरान फार्मा कंपनियों की तरफ से ऑयस्टर मशरूम की डिमांड अचानक बढ़ गई। इससे उनके बिजनेस को एक नई रफ्तार मिली और उन्हें अपना कारोबार और बढ़ाने का कॉन्फिडेंस मिला।

टीचर होने का फर्ज आज भी निभा रही हैं!

अपना बिजनेस शुरू करने के बावजूद निधि ने अपने पसंदीदा काम यानी पढ़ाने को पूरी तरह से नहीं छोड़ा है। वो आज भी 11वीं और 12वीं क्लास के बच्चों को बायोलॉजी पढ़ाती हैं। पढ़ाना उन्हें पसंद है, इसलिए वो इसे जारी रखे हुए हैं, जबकि बिजनेस से वो अपनी आजीविका चला रही हैं। उनके लिए यह बिजनेस सिर्फ पैसे कमाने का जरिया नहीं है। वो अपनी खुद की एक पहचान बनाना चाहती हैं, जिसे वो आने वाली पीढ़ी को सौंप सकें।