Britain Undersea Cables: रूस से समुद्र के नीचे केबलों पर खतरे की आशंका के बीच अमेरिका ने ब्रिटेन की मदद के लिए 2 परमाणु पनडुब्बियां भेजीं। UK–US के बीच अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग का 90 फीसदी से ज्यादा लेन-देन इन्हीं केबलों पर टिका है। GIUK गैप संवेदनशील क्षेत्र, NATO स्वालबार्ड पर भी सतर्क।

Russia Undersea Cable Threat: यूरोप और रूस के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब समुद्र के नीचे बिछी संचार और ऊर्जा केबलें सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बनती जा रही हैं। ब्रिटेन के First Sea Lord General Sir Gwyn Jenkins ने अटलांटिक को लेकर हालिया भाषण में चेतावनी दी कि समुद्र के नीचे मौजूद केबल, पाइपलाइन और दूसरी महत्वपूर्ण संरचनाएं देश की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम हैं।

समुद्र के नीचे क्यों बढ़ी चिंता?

आज बड़ी मात्रा में इंटरनेट डेटा, संचार और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय गतिविधियां समुद्र के नीचे बिछे फाइबर-ऑप्टिक केबल नेटवर्क पर निर्भर हैं। इसलिए किसी एक केबल में खराबी आने से पूरी व्यवस्था ठप नहीं होती, क्योंकि डेटा को दूसरे रास्तों से भेजा जा सकता है। लेकिन कई महत्वपूर्ण लाइनों को एक साथ नुकसान पहुंचने पर संचार और वित्तीय गतिविधियों में गंभीर व्यवधान पैदा हो सकता है।

रूस की गतिविधियों पर ब्रिटेन की नजर

ब्रिटेन और उसके सहयोगी हाल के महीनों में उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक क्षेत्र में रूसी पनडुब्बियों और समुद्री गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। अप्रैल में ब्रिटेन ने बताया था कि उसकी नौसेना और वायुसेना ने रूसी पनडुब्बियों को महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे के आसपास निगरानी अभियान के दौरान ट्रैक किया था। ब्रिटेन ने उस समय कहा था कि किसी केबल या पाइपलाइन को नुकसान पहुंचने का सबूत नहीं मिला।

अटलांटिक पर क्यों है इतना जोर?

General Sir Gwyn Jenkins ने 16 सितंबर के अपने भाषण में अटलांटिक को ब्रिटेन की सुरक्षा और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक भविष्य के किसी संघर्ष में समुद्री रास्तों, केबलों और ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा अहम होगी। ब्रिटेन अब समुद्र के नीचे मौजूद बुनियादी ढांचे की निगरानी के लिए जहाजों, विमानों, ड्रोन और सेंसर जैसी क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दे रहा है।

GIUK Gap क्यों है रणनीतिक इलाका?

ग्रीनलैंड, आइसलैंड और ब्रिटेन के बीच का GIUK Gap उत्तरी अटलांटिक का बेहद महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र है। यह रूस से आने वाली पनडुब्बियों की आवाजाही और अटलांटिक तक पहुंच की निगरानी के लिहाज से अहम माना जाता है। ब्रिटिश और NATO रणनीतिक आकलनों में इस इलाके को लंबे समय से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग और निगरानी क्षेत्र माना गया है।

स्वालबार्ड के पास सामने आया नया मामला

सितंबर में Reuters ने पश्चिमी अधिकारियों के हवाले से बताया कि NATO सहयोगियों ने आर्कटिक में स्वालबार्ड के पास रूसी समुद्री गतिविधि को ट्रैक किया था। रिपोर्ट के मुताबिक रूसी GUGI से जुड़े गहरे समुद्र में काम करने वाले उपकरणों के जरिए महत्वपूर्ण फाइबर-ऑप्टिक केबलों को नुकसान पहुंचाने की तकनीक का अभ्यास किया जा रहा था। ब्रिटेन, अमेरिका और नॉर्वे की संयुक्त कार्रवाई के बाद रूसी जहाजों को अपना अभियान पूरा किए बिना क्षेत्र छोड़ना पड़ा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि इस दौरान किसी केबल को नुकसान नहीं पहुंचा।

अब समुद्र के नीचे भी बढ़ रही निगरानी

ब्रिटेन के लिए चुनौती सिर्फ युद्धपोतों या समुद्री सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गई है। समुद्र के नीचे मौजूद केबल और पाइपलाइन भी रणनीतिक बुनियादी ढांचे का हिस्सा बन चुके हैं। यही वजह है कि ब्रिटेन और उसके NATO सहयोगी उत्तरी अटलांटिक और आर्कटिक क्षेत्र में निगरानी बढ़ा रहे हैं। हालिया घटनाओं ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि भविष्य के किसी बड़े तनाव में समुद्र के नीचे मौजूद ढांचे की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी।