TB Mukt Bharat Abhiyaan: जेपी नड्डा ने लॉन्च की 'JOSH' टीम, युवाओं के हाथ में टीबी मुक्त भारत की कमान

Published : Oct 08, 2026, 04:19 PM IST
TB Mukt Bharat Abhiya

सार

TB Treatment: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत 'जोश' (JOSH) टीमों की शुरुआत की है। इसका मकसद युवाओं को साथ लेकर टीबी के खिलाफ जागरूकता फैलाना और सही समय पर जांच सुनिश्चित करना है।

TB Free India: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने गुरुवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में एक बड़ा कदम उठाया। उन्होंने 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत 'जोश' (JOSH - जॉइंट स्क्वाड फॉर हेल्थ) टीमों को लॉन्च किया। इस पहल का सीधा मकसद युवाओं को साथ जोड़कर टीबी को जड़ से खत्म करना है। युवा अब गांव-गांव जाकर टीबी से बचाव, समय पर जांच, इलाज और इससे जुड़े भेदभाव को खत्म करने का मैसेज देंगे।

टीबी को हराने के लिए जन आंदोलन

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, जेपी नड्डा ने इस मौके पर कहा कि 'जोश' टीमों का लॉन्च होना टीबी के खिलाफ हमारी लड़ाई में एक मील का पत्थर है। उन्होंने बताया कि टीबी मुक्त भारत का सपना अब सिर्फ एक सरकारी प्रोग्राम नहीं रहा, बल्कि यह एक जन आंदोलन बन चुका है। इसमें जन भागीदारी और कम्युनिटी ओनरशिप सबसे अहम हैं।

नड्डा ने साफ किया कि सिर्फ सरकार के भरोसे टीबी को खत्म नहीं किया जा सकता। इसके लिए आम लोगों, नागरिकों, चुने हुए प्रतिनिधियों, फ्रंटलाइन वर्कर्स और खासकर देश के युवाओं को आगे आना होगा।

युवाओं की ताकत का जिक्र करते हुए नड्डा ने कहा कि उनकी एनर्जी और लगन इस अभियान को नई रफ्तार दे सकती है। मंत्रालय ने पहले ही नेताओं और कम्युनिटी लीडर्स को जोड़ा है, लेकिन चुनौती इतनी बड़ी है कि हमें ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले वॉलंटियर्स की जरूरत है। उन्होंने युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के साथ-साथ रक्षा मंत्रालय का भी शुक्रिया अदा किया, जिनकी मदद से यह पहल जमीन पर उतर रही है।

इलाज की पूरी चेन को मजबूत करना

नड्डा ने आगे कहा कि 'जोश' टीमें सरकार, समाज और नागरिकों को एक साथ लाने का काम करेंगी। इनका काम सिर्फ जानकारी देना नहीं है, बल्कि लोगों के बीच जाकर बात करना, उनका भरोसा जीतना और उनके डर को दूर करना है, ताकि लोग खुद आगे आकर टेस्ट और इलाज कराएं।

स्वास्थ्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि हमारी रणनीति सिर्फ जागरूकता और स्क्रीनिंग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने कहा, "जागरूकता और स्क्रीनिंग जरूरी है, लेकिन हमारी जिम्मेदारी यहीं खत्म नहीं होती। हमें यह पक्का करना होगा कि मरीज की जांच हो, इलाज शुरू हो और वह पूरा भी हो।" उन्होंने एक्टिव केस फाइंडिंग पर जोर दिया ताकि उन लोगों की पहचान हो सके जिन्हें टीबी है लेकिन उन्हें इसके लक्षणों का पता नहीं है।

उन्होंने बताया कि कई लोग बिना जाने टीबी के साथ जी रहे हैं और हेल्थकेयर सिस्टम से बाहर हैं। ऐसे लोगों की जल्द पहचान करना बहुत जरूरी है, ताकि न सिर्फ उनका इलाज हो सके, बल्कि उनके परिवार और समाज में बीमारी को फैलने से रोका जा सके। उन्होंने 'जोश' टीमों से अपील की कि वे ऐसे लोगों की पहचान करें और उन्हें टेस्ट के लिए आगे आने को कहें।

भारत की तरक्की और तकनीक का इस्तेमाल

टीबी के खिलाफ भारत की सफलता का जिक्र करते हुए नड्डा ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ताजा रिपोर्ट का हवाला दिया। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में टीबी के मामलों में 12 प्रतिशत की कमी आई है, जबकि भारत में यह आंकड़ा 21 प्रतिशत है। इसके अलावा, भारत का टीबी ट्रीटमेंट कवरेज बढ़कर 92 प्रतिशत हो गया है, जो 78 प्रतिशत के ग्लोबल एवरेज से काफी ज्यादा है। उन्होंने कहा कि यह सफलता हमारे लगातार प्रयासों का नतीजा है, लेकिन हमें अभी रुकना नहीं है।

उन्होंने कहा कि भारत ने काफी तरक्की की है, लेकिन हमें इस रफ्तार को बनाए रखना होगा। हर टीबी मरीज की पहचान होनी चाहिए और उसे सही समय पर इलाज मिलना चाहिए, तभी हम टीबी मुक्त भारत का सपना पूरा कर पाएंगे।

नड्डा ने टीबी से निपटने में तकनीक और इनोवेशन के रोल पर भी बात की। उन्होंने बताया कि भारत स्क्रीनिंग और जांच को लोगों तक पहुंचाने के लिए तकनीक का खूब इस्तेमाल कर रहा है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से चलने वाली पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें शामिल हैं, जो टीबी के लक्षणों को जल्दी पकड़ लेती हैं। इसके अलावा, रैपिड मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक तकनीक से टीबी और ड्रग रेजिस्टेंस का तुरंत पता चल जाता है, जिससे मरीज का इलाज बिना देरी के शुरू हो जाता है।

'जोश' टीमों का रोल और शुरुआत

वॉलंटियर्स से अपील करते हुए नड्डा ने कहा कि वे लोगों की बात सुनें, उनकी चिंताएं दूर करें और टीबी से जुड़े डर और कलंक को मिटाएं। उन्होंने साफ किया कि टीबी से बचा जा सकता है और इसका इलाज संभव है। किसी भी मरीज के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने वॉलंटियर्स से साफ-सफाई, हेल्दी लाइफस्टाइल और तंबाकू-नशे से दूर रहने के बारे में भी जागरूकता फैलाने को कहा।

नड्डा ने कहा कि बीमारी का पता चलना तो बस शुरुआत है। हर मरीज को सही इलाज मिलना चाहिए और उसके ठीक होने तक सपोर्ट करना चाहिए। उन्होंने दवाओं, पोषण और इलाज पूरा करने की अहमियत बताई। साथ ही कहा कि भारत ने ड्रग-रेजिस्टेंट टीबी के लिए छोटे और असरदार इलाज के विकल्प भी तैयार किए हैं।

'जोश' टीमों के रोलआउट पर बात करते हुए नड्डा ने बताया कि पहले फेज में इसे 11 राज्यों में लॉन्च किया जा रहा है और धीरे-धीरे इसे पूरे देश में फैलाया जाएगा। ये टीमें जिला और ब्लॉक स्तर पर काम करेंगी और इनकी मॉनिटरिंग डिजिटल तरीके से होगी। उन्हें पूरा भरोसा है कि युवाओं की यह पहल उन लोगों तक पहुंचने में मदद करेगी जो अब तक हेल्थकेयर सिस्टम से दूर हैं।

कम्युनिटी की उपलब्धियों का सम्मान

स्वास्थ्य मंत्री ने 697 जिलों की उन 67,933 पंचायतों को भी बधाई दी, जिन्हें 2026 में टीबी मुक्त घोषित किया गया है। उन्होंने इसे जन भागीदारी और लोकल लीडरशिप की बड़ी जीत बताया। उन्होंने जमीनी स्तर पर काम करने वाले नेताओं, हेल्थ वर्कर्स, वॉलंटियर्स और आम लोगों की जमकर तारीफ की।

आखिरी प्रहार की जरूरत

नड्डा ने कहा कि भारत अब अपने लक्ष्य के बेहद करीब है, इसलिए हमें एक आखिरी और मजबूत प्रहार करने की जरूरत है। उन्होंने एनसीसी (NCC) कैडेट्स और 'माई भारत' (MY Bharat) वॉलंटियर्स से टीबी मुक्त भारत आंदोलन का एंबेसडर बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि वे हर घर तक बचाव, जांच और इलाज का मैसेज पहुंचाएं। आखिर में नड्डा ने सभी से एक साथ मिलकर काम करने को कहा और 'जोश' टीमों को बधाई देते हुए टीबी मुक्त भारत के लिए पूरी ताकत झोंकने की अपील की।

केंद्रीय मंत्रालयों ने दिया पूरा साथ

इस मौके पर केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि "स्वस्थ नागरिक, स्वस्थ समाज, स्वस्थ देश" का सपना तभी पूरा होगा जब हर नागरिक इसमें अपना योगदान देगा। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमेशा लोगों को जागरूकता फैलाने और सही समय पर इलाज के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने जेपी नड्डा की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने टीबी मुक्त भारत के विजन को हकीकत में बदलने के लिए युवाओं को 'जोश' टीमों के जरिए एक साथ ला दिया है।

WHO के 2030 तक टीबी खत्म करने के लक्ष्य का जिक्र करते हुए मांडविया ने कहा कि भारत इस दिशा में लीड कर रहा है और हम ग्लोबल टाइमलाइन से पहले ही इस लक्ष्य को हासिल कर लेंगे। उन्होंने कहा कि भारत युवाओं का देश है और राष्ट्र निर्माण में उनकी ऊर्जा का सही इस्तेमाल होना चाहिए।

मांडविया ने बताया कि पीएम मोदी ने युवाओं को जोड़ने के लिए 'माई भारत' प्लेटफॉर्म दिया है। लाखों एनसीसी कैडेट्स और एनएसएस (NSS) वॉलंटियर्स समाज सेवा के लिए तैयार हो रहे हैं। जेपी नड्डा की लीडरशिप में इन युवाओं को टीबी उन्मूलन कार्यक्रम से जोड़कर ही 'जोश' टीमों की पहल मुमकिन हो पाई है।

मांडविया ने कहा कि ये वॉलंटियर्स ग्राउंड लेवल पर टीबी मरीजों की पहचान करने, पोषण के बारे में बताने और मरीजों को दवा पूरी करने के लिए समझाने में बड़ा रोल निभाएंगे। उन्हें पूरा भरोसा है कि भारत 2030 से पहले ही टीबी मुक्त हो जाएगा और दुनिया को युवाओं की ताकत का अहसास कराएगा।

'जोश' (जॉइंट स्क्वाड फॉर हेल्थ) टीमों के नेशनल लॉन्च का स्वागत करते हुए रेखा गुप्ता ने कहा कि यह पहल टीबी को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय की तारीफ की कि उसने युवा और खेल मंत्रालय के साथ-साथ रक्षा मंत्रालय को भी इस अभियान से जोड़ा है।

मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि युवाओं की एनर्जी 'जोश' टीमों को टीबी के खिलाफ एक बड़ी ताकत बनाएगी। युवा वॉलंटियर्स लोगों को समय पर इलाज के लिए प्रेरित करेंगे और बीमारी से जुड़े भेदभाव को खत्म करेंगे। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि 'जोश' टीमें पूरे देश में बचाव और इलाज का मैसेज पहुंचाने में कामयाब होंगी।

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि टीबी के खिलाफ यह लड़ाई हर गांव और हर घर तक पहुंचनी चाहिए, खासकर वहां जहां डर और कलंक की वजह से लोग इलाज नहीं कराते। उन्होंने 'जोश' टीमों से अपील की कि वे लोगों का भरोसा जीतें और उन्हें टेस्ट के लिए आगे लाएं। कोई भी मरीज अपनी बीमारी न छिपाए और न ही अकेला महसूस करे।

सेठ ने कहा कि एनसीसी कैडेट्स और 'माई भारत' वॉलंटियर्स का जज्बा इस अभियान को नई ऊर्जा देगा। उन्होंने युवाओं से सेवा भाव के साथ काम करने और मरीजों के परिवारों का साथ देने को कहा। जब युवा इस अभियान की कमान संभालेंगे, तो यह सच में एक जन आंदोलन बन जाएगा।

अपनी बात खत्म करते हुए उन्होंने भरोसा जताया कि यह जज्बा पीएम मोदी के 'विकसित भारत' और टीबी मुक्त भारत के विजन को पूरा करने में बड़ा योगदान देगा।

डिजिटल और आउटरीच पहलों की शुरुआत

इस इवेंट में कई नई डिजिटल और आईईसी (IEC) पहल भी लॉन्च की गईं। टीमों की मदद के लिए 'जोश फ्लिपबुक' और 'जोश ब्रोशर' जारी किए गए। इसके अलावा 'खुशी अवतार' नाम से एक ई-संगिनी (e-Sangini) पहल भी शुरू की गई। यह 12 भारतीय भाषाओं में टीबी के लक्षणों, इलाज और सवालों के जवाब देगी, साथ ही मरीजों को समय पर दवा लेने की याद दिलाएगी।

युवाओं की इन टीमों को सपोर्ट करने के लिए 'टीबी मुक्त भारत ऐप' पर एक खास 'जोश टीम्स' फीचर भी लॉन्च किया गया।

इस नेशनल लॉन्च में देश भर के 804 जिलों ने वर्चुअली हिस्सा लिया। पहले फेज में 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 55 जिलों में 'जोश' टीमें तैनात की गई हैं। बाकी जिलों में भी जल्द ही इन टीमों को तैयार किया जाएगा। इवेंट में 697 जिलों की उन 67,933 पंचायतों को भी सम्मानित किया गया, जिन्हें 2026 में टीबी मुक्त घोषित किया गया है। यह उपलब्धि लोकल लेवल पर हेल्थ वर्कर्स, नेताओं और आम लोगों की मेहनत का नतीजा है।

'जोश' टीम का स्ट्रक्चर और काम

'जोश' पहल को स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और दिल्ली सरकार (Government of NCT of Delhi) मिलकर चला रहे हैं। यह पहल टीबी को खत्म करने के लिए सरकार, युवाओं और समाज को एक साथ लाने का बेहतरीन उदाहरण है।

हर 'जोश' टीम में पांच 'माई भारत' वॉलंटियर्स और पांच एनसीसी कैडेट्स शामिल हैं। इन्हें ब्लॉक या वार्ड लेवल पर एक क्लास-1 (Class-I) अफसर लीड करेगा। ये टीमें कम्युनिटी लेवल पर काम करेंगी, लोगों को टीबी के बारे में बताएंगी, मिथकों को दूर करेंगी और समय पर इलाज के लिए प्रेरित करेंगी।

घर-घर जाकर ये टीमें टीबी के लक्षणों, बचाव और इलाज पूरा करने के फायदों के बारे में बात करेंगी। वे परिवारों को समझाएंगी कि टीबी के मरीजों के साथ भेदभाव न करें और उन्हें इलाज के लिए सपोर्ट करें।

'जोश' टीमों का लॉन्च युवाओं को टीबी मुक्त भारत अभियान का एक्टिव पार्टनर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। सरकारी अधिकारियों, 'माई भारत' वॉलंटियर्स, एनसीसी कैडेट्स, हेल्थ वर्कर्स और आम लोगों के साथ मिलकर यह पहल टीबी के खिलाफ आखिरी लड़ाई को मजबूत करेगी और एक स्वस्थ व टीबी मुक्त भारत का संकल्प पूरा करेगी।

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