
खानापुर के विधायक विट्ठल हलगेकरः राजनीति का नाम सुनते ही हमारी आँखों के सामने लग्ज़री गाड़ियाँ, सफ़ेद कपड़ों वाली फौज और ज़ोर-शोर से होता प्रचार आ जाता है। लेकिन इन सबके बीच, 'सादगी' शब्द को नया मतलब देने वाले शख्स हैं कर्नाटका के खानापुर के बीजेपी विधायक विट्ठल हलगेकर। उन्हें सिर्फ 'साधारण' कहना काफी नहीं, बल्कि समाज के लिए 'प्रेरणा' कहना ज़्यादा सही होगा।
विट्ठल हलगेकर असल में गणित के टीचर (M.Sc) हैं। जब वे पढ़ाते थे, तो शाम को बच्चों को ट्यूशन देते थे। हैरानी की बात यह है कि वे महीने की फीस सिर्फ एक रुपया लेते थे! उन्हीं एक-एक रुपयों को जोड़कर उन्होंने एक स्वयं-सहायता समूह को दिया और आज हज़ारों करोड़ रुपये का कारोबार करने वाले 'महालक्ष्मी स्वयं-सहायता समूह' को खड़ा किया। गणित के टीचर का लगाया वो हिसाब आज हज़ारों परिवारों का सहारा बन गया है।
अक्सर पति के सत्ता में आते ही पत्नियों का रहन-सहन बदल जाता है। लेकिन विट्ठल की पत्नी रुक्मिणी आज भी तोपिनकट्टी गाँव के आंगनवाड़ी में टीचर के तौर पर काम कर रही हैं। अपनी कोई संतान न होने का दर्द भुलाकर, वे उस गाँव के सभी बच्चों को अपने बच्चों की तरह प्यार करती हैं और उन्हें खेल-खेल में पढ़ाती हैं। विधायक की पत्नी होने के नाते सुविधाओं के पीछे न भागकर, आज भी अपने काम में लगे रहना वाकई काबिले-तारीफ है।
आज की राजनीति में तो परिवार वाले भी पावर दिखाते हैं। लेकिन हलगेकर के दोनों भाई आज भी मिस्त्री का काम करके अपना गुज़ारा करते हैं। खुद विधायक विट्ठल हलगेकर भी विधानसभा सत्र में जाने से पहले, सुबह 9 बजे तक खेत में एक मज़दूर की तरह काम करते हैं और उसके बाद ही सदन के लिए निकलते हैं। सत्ता का नशा उन पर हावी नहीं हुआ और वे अपनी मिट्टी से जुड़े एक सच्चे किसान हैं।
खानापुर में उनके चलाए जा रहे शांतिनिकेतन सीबीएसई स्कूल में कई गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा दी जाती है। वहां आने वाले कुछ बच्चे अपनी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी अंजलि निंबालकर की तस्वीर वाला बैग लेकर आते हैं। जब किसी ने यह देखकर उनसे सवाल किया, तो हलगेकर का जवाब दिल छू लेने वाला था: 'बेचारे बच्चों को क्या पता? उन्हें तो बस बैग मिलने की खुशी है, उस पर किसी की भी फोटो हो, क्या फर्क पड़ता है।' यह कहकर उन्होंने अपनी बड़ी सोच का परिचय दिया।
जब वे आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के एक दल को एक मंत्री के पास ले गईं, तो उन्हें पता था कि उस दल में सभी कम्युनिस्ट विचारधारा को मानने वाले हैं, फिर भी हलगेकर की पत्नी रुक्मिणी ने उनकी मदद की। उन्होंने यह घमंड नहीं दिखाया कि वे एक बीजेपी विधायक की पत्नी हैं, बल्कि इस मासूमियत के साथ कि बस समस्या हल हो जाए, उन्होंने सबसे एक जैसा व्यवहार किया। आज के राजनीतिक माहौल में यह एक बड़े बदलाव जैसा लगता है।
हलगेकर भले ही पुरानी सोच वाले व्यक्ति लगते हों, लेकिन लेन-देन में वे मॉडर्न हैं। उनकी जेब में कैश नहीं होता, बल्कि हमेशा 'गूगल पे' ऑन रहता है! वे भ्रष्टाचार-मुक्त और जन-हितैषी राजनीति की एक मिसाल हैं। चुनाव के समय गरीबों के घर वोट मांगने जाने वाले और जीतने के बाद मुंह फेर लेने वाले नेताओं के बीच, विट्ठल हलगेकर एक उम्मीद की किरण बनकर उभरे हैं।
एशियानेट सुवर्णन्यूज़ के सीनियर रिपोर्टर रवि शिवराम की रिपोर्ट