“10 मिनट खड़ी रहीं, कोई मिलने नहीं आया” केजीएमयू पर बरसीं बीजेपी नेत्री अपर्णा यादव

Published : Jan 09, 2026, 04:10 PM IST

केजीएमयू लव जिहाद केस में विशाखा कमेटी की रिपोर्ट सामने आ गई है। रिपोर्ट में जूनियर डॉक्टर रमीज उद्दीन को यौन शोषण, ब्लैकमेल और धर्मांतरण के दबाव का दोषी पाया गया। महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने केजीएमयू प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए।

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विशाखा कमेटी की रिपोर्ट के बाद गरमाया मामला, प्रशासन पर बरसीं अपर्णा यादव

केजीएमयू जैसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान से जुड़ा लव जिहाद और यौन शोषण का मामला अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। विशाखा कमेटी की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद न सिर्फ आरोपी की भूमिका उजागर हुई है, बल्कि केजीएमयू प्रशासन की कार्यशैली पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस पूरे प्रकरण में महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव का गुस्सा अब खुलकर सामने आया है।

केजीएमयू लव जिहाद केस में गठित विशाखा कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर रमीज उद्दीन को महिला रेजिडेंट डॉक्टर के साथ यौन शोषण, ब्लैकमेलिंग और जबरन धर्मांतरण का दबाव बनाने का दोषी पाया गया है। रिपोर्ट आने के बाद संस्थान की जिम्मेदारी और जवाबदेही पर बहस तेज हो गई है।

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वाइस चांसलर से मिलने पहुंचीं अपर्णा यादव

इसी मामले को लेकर 09 जनवरी को महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव केजीएमयू पहुंचीं और वाइस चांसलर से मुलाकात का प्रयास किया। अपर्णा यादव करीब 10 मिनट तक केजीएमयू परिसर में मौजूद रहीं, लेकिन उनसे मिलने कोई भी जिम्मेदार अधिकारी नहीं पहुंचा।

अपर्णा यादव ने केजीएमयू प्रशासन पर नाराजगी जताते हुए कहा कि महिला आयोग को शायद गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। उन्होंने कहा कि वह केवल कुछ जरूरी जानकारी लेने आई थीं, लेकिन वाइस चांसलर तक ने उनसे मुलाकात नहीं की। यह रवैया बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और संस्थान की सोच को दर्शाता है।

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प्रशासन के संपर्क में था आरोपी रमीज

अपर्णा यादव ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि पीड़िता ने उन्हें बताया था कि उसने केजीएमयू के हेड ऑफ डिपार्टमेंट को पूरी जानकारी दी थी, इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि आरोपी रमीज उद्दीन केजीएमयू प्रशासन के संपर्क में था, लेकिन इसके बावजूद दो दिन बाद वह फरार हो गया।

अपर्णा यादव ने विशाखा कमेटी की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पीड़िता को एक सीनियर डॉक्टर द्वारा यह तक कहा गया कि वह महिला आयोग क्यों गई। उनका आरोप है कि आरोपी को बचाने के लिए व्यक्ति विशेष के इशारे पर काम किया गया।

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बयान बदलने का दबाव, महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल

महिला आयोग की उपाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जिन लोगों ने इस मामले में बयान दिए हैं, उन पर स्टेटमेंट बदलने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि केजीएमयू में महिलाओं के साथ छेड़छाड़, जबरन धर्मांतरण और अन्य गंभीर घटनाएं हो रही हैं, लेकिन प्रशासन पूरी तरह मौन है। अपर्णा यादव ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से केजीएमयू में बिना लाइसेंस के ब्लड बैंक संचालित हो रहा है।

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सबसे पहले अपर्णा यादव ने उठाया था मामला

गौरतलब है कि पीड़िता ने सबसे पहले अपनी आपबीती महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव को ही सुनाई थी। पीड़िता महिला आयोग कार्यालय पहुंची थी, जहां अपर्णा यादव से मुलाकात के बाद इस पूरे मामले ने तूल पकड़ा। अपर्णा यादव ही पहली नेता थीं, जिन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की थी। केजीएमयू से जुड़े इस संवेदनशील मामले में अब निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और जांच एजेंसियों के कदम पर टिकी हैं।

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