
Kiren Rijiju Mallikarjun Kharge: संसद के मानसून सत्र को आधिकारिक तौर पर खत्म करने की अधिसूचना में हो रही देरी के बीच केंद्र सरकार के एक और विशेष सत्र बुलाने की चर्चा तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से राय मांगी है। अटकलें हैं कि नवरात्रि शुरू होने से पहले बुलाए जाने वाले इस सत्र में परिसीमन बिल पेश किया जा सकता है।
संसद का मानसून सत्र पिछले महीने की 13 तारीख को समाप्त हुआ था, लेकिन 32 दिन गुजरने के बाद भी इसे अनिश्चितकाल के लिए स्थगित यानी प्रोरोग करने की राष्ट्रपति की अधिसूचना जारी नहीं हुई है। आम तौर पर सत्र समाप्त होने के करीब एक सप्ताह के भीतर ऐसी अधिसूचना जारी हो जाती है।
ऐसे में सरकार के अगले कदम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। साल 2015 में भी GST विधेयक को पारित कराने के प्रयास के दौरान सत्र को प्रोरोग करने में 28 दिनों तक इंतजार किया गया था, हालांकि उस समय सरकार की कोशिश सफल नहीं हो सकी थी।
कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि सरकार परिसीमन से जुड़ा विधेयक संसद में लाने की तैयारी कर रही है। इसी बीच अब विशेष सत्र की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। माना जा रहा है कि सरकार अगले महीने 11 तारीख से शुरू होने वाले नवरात्रि पर्व से पहले संसद की बैठक बुलाना चाहती है। चूंकि मानसून सत्र को अभी आधिकारिक तौर पर प्रोरोग नहीं किया गया है, इसलिए जरूरत पड़ने पर सरकार कम समय के नोटिस पर संसद की बैठक बुला सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, सरकार दो दिन का विशेष सत्र बुलाकर परिसीमन बिल पेश करने और उसे पारित कराने की कोशिश कर सकती है। इस संबंध में मल्लिकार्जुन खड़गे के कार्यालय को संदेश भेजे जाने की बात सामने आई है। हालांकि, उन्हें अभी सत्र का आधिकारिक एजेंडा नहीं बताया गया है और खड़गे के कार्यालय की ओर से भी कोई जवाब सामने नहीं आया है। खड़गे पहले ही कह चुके हैं कि यदि सरकार विशेष सत्र बुलाना चाहती है तो उसे सभी राजनीतिक दलों के साथ सर्वदलीय बैठक करनी चाहिए।
परिसीमन बिल को लोकसभा में पारित कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। लोकसभा में यह आंकड़ा 362 सांसदों का है। मानसून सत्र के दौरान भी सरकार ने इस संख्या तक पहुंचने के लिए समर्थन जुटाने की कोशिश की थी, लेकिन उसे अपेक्षित सफलता नहीं मिली।
शुरुआत में ऐसी चर्चा थी कि DMK जैसी कुछ पार्टियां सरकार के साथ आ सकती हैं, लेकिन बाद में उनका समर्थन नहीं मिला। ऐसे में अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार ने विशेष सत्र बुलाने से पहले जरूरी राजनीतिक समर्थन जुटा लिया है।
सरकार का तर्क है कि महिला आरक्षण को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए परिसीमन जरूरी है। परिसीमन के जरिए लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या तथा उनके क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किया जाता है। वहीं, विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाता रहा है। खासकर उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में आगामी चुनावों को देखते हुए परिसीमन का मुद्दा राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में चुनाव नजदीक होने के कारण बीजेपी परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे को जोर-शोर से उठा सकती है। पार्टी विपक्ष पर यह आरोप भी लगा सकती है कि परिसीमन का विरोध करके वह महिलाओं को आरक्षण देने की प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार विशेष सत्र बुलाने और परिसीमन बिल लाने को लेकर अंतिम फैसला कर चुकी है या नहीं। खड़गे से संपर्क और संसद को प्रोरोग करने में देरी के बीच राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे पर हलचल जरूर बढ़ गई है।
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