
Liechtenstein women succession: स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रिया के बीच बसा छोटा यूरोपीय देश लिकटेंस्टीन इन दिनों अपने शाही उत्तराधिकार नियमों में किए गए बदलाव को लेकर चर्चा में है। करीब 44 हजार आबादी वाले इस देश ने घोषणा की है कि भविष्य में सिंहासन के उत्तराधिकारी के चयन में पुरुषों को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। यानी अब शाही परिवार की पहली संतान बेटी होने पर वह भी देश की अगली शासक बन सकती है।
यह ऐतिहासिक बदलाव लिकटेंस्टीन के राष्ट्रीय दिवस के मौके पर सामने आया। नए नियम के तहत अब उत्तराधिकार का आधार लिंग नहीं, बल्कि संतान के जन्म का क्रम होगा।
लिकटेंस्टीन के शाही घराने के मुताबिक, अब सिंहासन के उत्तराधिकारी का फैसला करते समय पुरुष संतान को महिला संतान पर प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। इसका सीधा मतलब है कि यदि किसी भविष्य के शासक की पहली संतान लड़की होती है, तो वह अगली शासक बनने की हकदार होगी।
यानी आने वाले समय में लिकटेंस्टीन की गद्दी पर राजकुमार के साथ-साथ राजकुमारी भी बैठ सकती है। यह बदलाव देश की राजशाही में लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
लिकटेंस्टीन के मौजूदा शासक प्रिंस हंस-एडम द्वितीय हैं, जो 1989 से शाही परिवार के प्रमुख हैं। हालांकि, उत्तराधिकार के नियम में हुए इस बदलाव का तत्काल असर उनके उत्तराधिकारी प्रिंस एलॉइस पर नहीं पड़ेगा।
प्रिंस एलॉइस हंस-एडम द्वितीय की पहली संतान हैं और लंबे समय से शाही परिवार के आधिकारिक कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। वह पिछले करीब दो दशकों से देश के अधिकांश आधिकारिक मामलों को संभाल रहे हैं।
लिकटेंस्टीन के शाही परिवार का इतिहास काफी पुराना है। इसका वंश 1608 से जुड़ा है, जब कार्ल प्रथम को वंशानुगत राजकुमार बनाया गया था। हालांकि, मौजूदा लिकटेंस्टीन क्षेत्र पर इस शाही परिवार का शासन 1719 से माना जाता है।
1719 में लिकटेंस्टीन पवित्र रोमन साम्राज्य के अंतर्गत एक संप्रभु रियासत बना। इसके बाद 1806 में उसे बाहरी संप्रभुता मिली और 1866 में जर्मन परिसंघ के विघटन के बाद वह पूरी तरह स्वतंत्र हो गया।
लिकटेंस्टीन में 15 अगस्त को राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। इसी दिन देश में शाही परिवार और राज्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसी अवसर पर उत्तराधिकार नियमों में बदलाव की घोषणा ने इसे और खास बना दिया।
लिकटेंस्टीन एक डबल-लैंडलॉक्ड देश है, यानी यह खुद किसी समुद्र से नहीं जुड़ा है और इसके पड़ोसी देश भी समुद्र तक सीधे पहुंच नहीं रखते। छोटा होने के बावजूद यहां के शासक के पास यूरोप की कई अन्य संवैधानिक राजशाहियों के मुकाबले काफी व्यापक राजनीतिक शक्तियां हैं।
महिला उत्तराधिकार को लेकर यूरोप में इससे पहले भी महत्वपूर्ण बदलाव हो चुके हैं। ब्रिटेन ने 2011 में अपने उत्तराधिकार कानून में संशोधन किया था। इसके बाद राजा या रानी की पहली संतान बेटी होने पर उसे छोटे भाई के मुकाबले प्राथमिकता मिलने का रास्ता साफ हुआ।
लिकटेंस्टीन का ताजा फैसला भी इसी व्यापक बदलाव की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जहां शाही उत्तराधिकार में सिर्फ पुरुष होने को प्राथमिकता देने की पुरानी परंपरा को खत्म किया जा रहा है।
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