
बोस्टन: अमेरिका में एक बेहद दर्दनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाले मर्डर ट्रायल ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। जनवरी 2023 में 32 वर्षीय लिंडसे क्लैंसी ने अपने ही तीन मासूम बच्चों-8 महीने के कैलन, 5 साल की कोरा और 3 साल के डॉसन की गला घोंटकर हत्या कर दी थी। 'द गार्डियन' की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान जब डॉक्टरों, थेरेपिस्ट और मेडिकल एक्सपर्ट्स ने गवाही दी, तो यह मामला सिर्फ़ एक अपराध की कहानी न रहकर, अमेरिका के स्वास्थ्य सिस्टम पर एक बहुत बड़ा सवाल बनकर उभरा।
अदालत में पेश की गई गवाही से लिंडसे क्लैंसी की एक ऐसी छवि सामने आई, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। पड़ोसियों, शिक्षकों और रिश्तेदारों ने उसे एक "अत्यंत प्यार करने वाली मां" बताया जो अपने बच्चों का बेपनाह ख़्याल रखती थी। घटना वाले दिन भी लिंडसे अपनी बेटी को रूटीन चेकअप के लिए पीडियाट्रिशियन के पास ले गई थी, जहाँ डॉक्टर के मुताबिक सब कुछ "बिल्कुल सामान्य" लग रहा था। लेकिन इस सामान्य से दिखने वाले जीवन के पीछे एक खौफ़नाक मंज़र पक रहा था। इंसोम्निया (नींद न आना), एंग्जायटी और गहरे अवसाद से जूझ रही लिंडसे ने बार-बार डॉक्टरों से मदद की गुहार लगाई थी। उसे एक के बाद एक 13 अलग-अलग प्रकार की मनोरोग की दवाएं (psychiatric medications) दी गईं, लेकिन किसी ने उसके भीतर पनप रहे असली ख़तरे को नहीं पहचाना।
On Day 11 of the Lindsay Clancy murder trial, the prosecution questioned psychiatric nurse Rebecca Jollotta about her treatment of the 35-year-old, who is accused of murdering her three young children in January 2023.
During an in-person visit with Clancy and her husband,… pic.twitter.com/PN5u5tv2qg— Mosheh Oinounou (@Mosheh) August 11, 2026
बचाव पक्ष का तर्क है कि लिंडसे 'पोस्टपार्टम साइकोसिस' (प्रसवोत्तर मानसिक विकार) से पीड़ित थी और घटना के वक्त उसका वास्तविकता से संपर्क पूरी तरह टूट चुका था। पोस्टपार्टम मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. निकोल कुमी ने कोर्ट को बताया कि बच्चे के जन्म के बाद नींद न आना और "ज़ॉम्बी जैसा" महसूस होना एक गंभीर चेतावनी का संकेत होता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, चूंकि लिंडसे के पहले से तीन बच्चे थे, उसके आसपास के लोगों और हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ने मान लिया कि वह मां बनने के तनाव को संभालना जानती है। डॉ. कुमी ने कहा, "वह अपने घर और हेल्थकेयर सिस्टम से मदद की गुहार लगा रही थी, लेकिन उसे बस दवाएं देकर आगे भेज दिया गया। यह डिलीवरी के बाद माताओं की देखभाल में मौजूद एक भयानक ख़ामी है।"
अभियोजन पक्ष का कहना है कि बच्चों की हत्या करने के बाद लिंडसे ने अपनी कलाई और गर्दन काटी और फिर दूसरी मंज़िल की खिड़की से छलांग लगा दी, जिससे वह जीवन भर के लिए कमर के नीचे से लकवाग्रस्त (paralysed) हो गई। अभियोजन इसे सोची-समझी हत्या और आत्मघाती कदम मानता है, जबकि बचाव पक्ष इसे एक गंभीर 'साइकोटिक ब्रेक' का नतीजा बताता है जहाँ मतिभ्रम (delusions) और हेलुसिनेशन ने उसके सोचने-समझने की शक्ति छीन ली थी। कोर्टरूम में माहौल उस वक्त बेहद तनावपूर्ण हो गया जब जूरी को मासूम बच्चों की ऑटोप्सी तस्वीरें दिखाई गईं और लिंडसे बिलख-बिलखकर रोने लगी।
मामले की एक विचलित करने वाली बात यह है कि बच्चों की हत्या वाले दिन भी क्लैंसी अपनी बेटी को नियमित रूप से बाल रोग विशेषज्ञ के पास ले गई थीं। डॉक्टर लिंडसे रॉशर्ट ने अदालत को बताया कि उन्हें वह मुलाकात सामान्य लगी थी। लेकिन डॉ. कुमी के मुताबिक, बाहर से सामान्य दिखाई देने वाला व्यवहार इस बात का प्रमाण नहीं है कि व्यक्ति के भीतर भी सबकुछ सामान्य है।
इस ट्रायल ने अमेरिका में माताओं के मानसिक स्वास्थ्य (Maternal Healthcare Crisis) को लेकर बहस छिड़ दी है। जूरी के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या एक समर्पित और प्यार करने वाली मां रातों-रात कातिल बन गई, या फिर दवाइयों के ओवरडोज़ और अनसुनी की गई चीखों ने एक हंसते-खेलते परिवार को इस भयावह त्रासदी की ओर धकेल दिया? इस मामले का फ़ैसला न केवल लिंडसे का भविष्य तय करेगा, बल्कि पोस्टपार्टम साइकोसिस को देखने के कानूनी और मेडिकल नज़रिए को भी हमेशा के लिए बदल देगा।
Asianet News Hindi पर पढ़ें देशभर की सबसे ताज़ा National News in Hindi, जो हम खास तौर पर आपके लिए चुनकर लाते हैं। दुनिया की हलचल, अंतरराष्ट्रीय घटनाएं और बड़े अपडेट — सब कुछ साफ, संक्षिप्त और भरोसेमंद रूप में पाएं हमारी World News in Hindi कवरेज में। अपने राज्य से जुड़ी खबरें, प्रशासनिक फैसले और स्थानीय बदलाव जानने के लिए देखें State News in Hindi, बिल्कुल आपके आसपास की भाषा में। उत्तर प्रदेश से राजनीति से लेकर जिलों के जमीनी मुद्दों तक — हर ज़रूरी जानकारी मिलती है यहां, हमारे UP News सेक्शन में। और Bihar News में पाएं बिहार की असली आवाज — गांव-कस्बों से लेकर पटना तक की ताज़ा रिपोर्ट, कहानी और अपडेट के साथ, सिर्फ Asianet News Hindi पर।