India LPG Crisis: लंबी लाइनें, महंगे सिलेंडर और बंद किचन-क्या देश में लॉकडाउन जैसे हालात बन रहे?

Published : Mar 12, 2026, 09:35 AM IST

India LPG Crisis: कई शहरों में LPG सिलेंडर की कमी से ढाबे और रेस्टोरेंट बंद होने लगे हैं। ब्लैक मार्केट में कीमत 3000 रुपये तक पहुंच गई है और डिलीवरी जॉब्स 50-60% घट गई हैं। क्या भारत नए गैस सप्लाई संकट की ओर बढ़ रहा है? 

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India Gas Crisis: भारत के कई शहरों से ऐसी खबरें सामने आ रही हैं जिनसे लोगों को कोविड लॉकडाउन के दिनों की याद आने लगी है। वजह है LPG सिलेंडर की कमी, ब्लैक मार्केट में बढ़ती कीमतें और फूड बिजनेस पर पड़ता असर। ज़मीन से मिल रही रिपोर्ट बताती हैं कि कई ढाबे, फूड स्टॉल और छोटे रेस्टोरेंट या तो महंगे दाम पर खाना बेचने को मजबूर हैं या फिर अस्थायी तौर पर बंद हो रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी छोटे दुकानदारों और गिग वर्कर्स को हो रही है, जिनकी रोज़ी-रोटी सीधे फूड बिजनेस पर निर्भर है।

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LPG Cylinder Shortage: क्या सच में गैस सिलेंडर की कमी हो रही है?

नोएडा के सेक्टर 16 में समोसे बेचने वाले प्रमोद कुमार की कहानी इस संकट की झलक दिखाती है। प्रमोद बताते हैं कि पहले जो सिलेंडर उन्हें करीब 1000 रुपये में मिल जाता था, वही अब 1500 से 2300 रुपये तक पहुंच गया है। मजबूरी में उन्हें अपने समोसों के दाम भी करीब 50% तक बढ़ाने पड़े। उनके आसपास के कई ढाबे और खाने की दुकानें पहले ही बंद होने लगी हैं क्योंकि उन्हें समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहा। प्रमोद कहते हैं कि अगर सिलेंडर नहीं आया तो दुकान खोलना मुश्किल हो जाएगा।

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Gas Price Hike: ब्लैक मार्केट में क्यों पहुंच गई 3000 रुपये तक कीमत?

कई जगहों पर गैस सिलेंडर ब्लैक मार्केट में 3000 रुपये तक बिकने की खबरें सामने आई हैं। छोटे ढाबे और फूड स्टॉल वाले अक्सर घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल करते हैं और जब सप्लाई कम हो जाती है तो उन्हें ब्लैक मार्केट का सहारा लेना पड़ता है। इसका सीधा असर खाने की कीमतों पर भी पड़ रहा है। कहीं चाय 10 से 15 रुपये हो गई है तो कहीं समोसे और लिट्टी के दाम बढ़ गए हैं।

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Restaurant Closure Crisis: क्यों बंद होने लगे ढाबे और फूड स्टॉल?

LPG की कमी का सबसे ज्यादा असर फूड बिजनेस पर दिख रहा है। कई रेस्टोरेंट और ढाबों ने अपने मेन्यू से कुछ आइटम हटा दिए हैं। कुछ जगहों पर रोटी और पराठा बनाना बंद कर दिया गया है क्योंकि गैस की खपत ज्यादा होती है। कुछ दुकानदार अब लकड़ी या कोयले के चूल्हे का इस्तेमाल करने लगे हैं। कई जगहों पर इंडक्शन कुकटॉप की मांग भी अचानक बढ़ गई है।

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Gig Workers Job Loss: क्या लाखों लोगों की नौकरी खतरे में है?

फूड बिजनेस में गिरावट का असर डिलीवरी जॉब्स पर भी पड़ रहा है। एक यूनियन के मुताबिक, कई बड़े शहरों में फूड डिलीवरी ऑर्डर 50 से 60 प्रतिशत तक कम हो गए हैं। इससे हजारों नहीं बल्कि लाखों गिग वर्कर्स की कमाई पर असर पड़ा है। 2025-26 में भारत में करीब 12 से 15 मिलियन लोग प्लेटफॉर्म और फ्रीलांस काम कर रहे थे, जिनमें बड़ी संख्या फूड डिलीवरी से जुड़ी है।

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Government Claim: क्या सरकार कह रही है कि सप्लाई सामान्य है?

सरकार का कहना है कि घरेलू LPG सप्लाई में कोई कमी नहीं है और उत्पादन बढ़ाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक देश में LPG प्रोडक्शन करीब 25% तक बढ़ा दिया गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए एसेंशियल कमोडिटीज़ एक्ट (Essential Commodities Act) लागू किया है और बुकिंग के बीच वेटिंग टाइम भी बढ़ा दिया गया है।

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LPG Supply Crisis: फिर भी लोगों में घबराहट क्यों बढ़ रही है?

सरकारी दावों के बावजूद ज़मीन पर अलग तस्वीर दिख रही है। कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें लग रही हैं और लोगों को सिलेंडर के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ परिवारों ने तो मजबूरी में लकड़ी पर खाना बनाना शुरू कर दिया है। फिलहाल हालात देखकर लोगों के मन में यही डर है कि अगर सप्लाई जल्दी सामान्य नहीं हुई तो खाने-पीने के छोटे बिजनेस और लाखों नौकरियां गंभीर संकट में पड़ सकती हैं।

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