
Mahua Moitra on TMC Crisis: तृणमूल कांग्रेस (TMC) से लगातार नेताओं और सांसदों के इस्तीफे के बीच पार्टी के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा का कहना है कि पार्टी के खत्म होने की चर्चाएं पूरी तरह बेबुनियाद हैं और यह सब भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा फैलाया जा रहा राजनीतिक प्रचार है।सुष्मिता देव के इस्तीफे के तुरंत बाद दिए गए एक इंटरव्यू में महुआ मोइत्रा ने पार्टी में चल रहे घटनाक्रम, बागी सांसदों के दावों और TMC की मौजूदा स्थिति पर खुलकर अपनी राय रखी।
सुष्मिता देव के पार्टी छोड़ने के सवाल पर महुआ मोइत्रा ने कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक देश है और हर व्यक्ति को अपने राजनीतिक फैसले लेने की स्वतंत्रता है। उन्होंने कहा कि सुष्मिता देव पहले कांग्रेस में थीं और बाद में TMC में शामिल हुई थीं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा भेजा और दो बार सांसद बनने का अवसर दिया। अब उन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला किया है तो इसके पीछे की वजह वही बेहतर तरीके से बता सकती हैं। महुआ मोइत्रा ने कहा कि सुष्मिता देव के फैसले के लिए वह खुद जिम्मेदार नहीं हैं और उनके जाने के कारणों पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा।
हाल के दिनों में कुछ नेताओं ने दावा किया है कि TMC के कई सांसद पार्टी से अलग होने की तैयारी में हैं। इस पर महुआ मोइत्रा ने कहा कि फिलहाल बागी खेमे के पास 16 सांसद होने का दावा किया जा रहा है, जबकि कुछ लोग 20 सांसदों का समर्थन होने की बात भी कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर वास्तव में उनके पास इतने सांसदों का समर्थन होता तो इसके प्रमाण सामने आते, कोई आधिकारिक पत्र जारी होता या फिर संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाती। महुआ मोइत्रा के अनुसार, उन्हें पूरा भरोसा है कि बागी नेताओं के पास 20 सांसदों का समर्थन नहीं है।
महुआ मोइत्रा ने कहा कि केवल कुछ सांसदों के अलग हो जाने से कोई नया राजनीतिक समूह मान्यता प्राप्त नहीं कर सकता। उन्होंने बताया कि दलबदल विरोधी कानून के तहत किसी दल से अलग होने के लिए केवल संसदीय दल नहीं, बल्कि पूरी राजनीतिक पार्टी के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन जरूरी होता है। इसके अलावा, अलग होने वाले समूह को किसी अन्य पार्टी में विलय भी करना पड़ता है। उनके मुताबिक, बागी नेताओं के पास इतनी संख्या नहीं है कि वे कानूनी रूप से अलग राजनीतिक इकाई के रूप में मान्यता प्राप्त कर सकें।
महुआ मोइत्रा ने कहा कि यदि कुछ सांसद अलग बैठना चाहते हैं और संसद में अलग समूह बनाना चाहते हैं तो उन्हें ऐसा करने से कोई नहीं रोक सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि इससे उन्हें कोई विशेष राजनीतिक या संसदीय लाभ नहीं मिलेगा। उनके अनुसार, वे चाहे खुद को किसी भी नाम से पेश करें या BJP का समर्थन करें, लेकिन इससे उनका राजनीतिक भविष्य प्रभावित हो सकता है।
जब महुआ मोइत्रा से पूछा गया कि क्या वह सुष्मिता देव को राजनीतिक अवसरवादी मानती हैं, तो उन्होंने इस सवाल का सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि सुष्मिता देव उनकी मित्र हैं और उनके फैसलों या राजनीतिक मंशा पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा। महुआ ने कहा कि इस सवाल का जवाब केवल सुष्मिता देव ही दे सकती हैं।
पार्टी के भीतर लगातार हो रहे इस्तीफों के बावजूद महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि TMC के कई नेता इस स्थिति को सकारात्मक नजरिए से देख रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक तरह से पार्टी का "शुद्धिकरण" हो रहा है और इससे संगठन भविष्य में और मजबूत बन सकता है। उनके अनुसार, जो लोग पार्टी की विचारधारा और नेतृत्व के साथ नहीं चलना चाहते, उनके अलग होने से संगठन को नुकसान के बजाय फायदा हो सकता है।
महुआ मोइत्रा ने कहा कि ममता बनर्जी एक भावुक और मानवीय नेता हैं, जो अपने सहयोगियों के प्रति लंबे समय तक वफादारी निभाती हैं। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी अपने साथ काम करने वाले नेताओं पर आसानी से भरोसा करती हैं और उन्हें लंबे समय तक अवसर देती हैं। महुआ के मुताबिक, कई ऐसे नेता भी वर्षों तक पार्टी में बने रहे जिन्हें पहले ही संगठन से बाहर कर दिया जाना चाहिए था, लेकिन ममता बनर्जी ने उन्हें लगातार मौके दिए।
महुआ मोइत्रा ने इस दौरान BJP की कार्यशैली का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि BJP में नेतृत्व परिवर्तन और संगठनात्मक फैसले अधिक कठोर तरीके से लिए जाते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को समय के साथ सक्रिय राजनीति से दूर कर दिया गया। इसके विपरीत, उन्होंने दावा किया कि ममता बनर्जी अपने सहयोगियों के प्रति अधिक संवेदनशील और धैर्यवान रवैया अपनाती हैं।
महुआ मोइत्रा ने साफ कहा कि TMC के खत्म होने या कमजोर पड़ने की चर्चाएं वास्तविकता से दूर हैं। उनके मुताबिक, पार्टी अभी भी पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक मजबूत ताकत है और मौजूदा घटनाक्रम को पार्टी के भीतर चल रही स्वाभाविक राजनीतिक प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि समय आने पर यह स्पष्ट हो जाएगा कि बागी नेताओं के दावे कितने सही हैं और पार्टी की वास्तविक ताकत क्या है।
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