
पश्चिम बंगाल की राजनीति में रविवार को उस वक्त तनाव बढ़ गया, जब पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी कांचरापाड़ा पहुंचीं। वह पुलिस कस्टडी में जान गंवाने वाले टीएमसी कार्यकर्ता बिरजू कीट के परिवार से मिलने गई थीं। इसी दौरान उनके काफिले को प्रदर्शनकारियों ने घेर लिया और विरोध में नारेबाजी की।
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनकी कार पर पत्थर, जूते और कीचड़ फेंका गया। उन्होंने इसके लिए भाजपा और पुलिस पर गंभीर सवाल उठाए। दूसरी ओर, भाजपा ने इस घटना से किसी भी पार्टी कार्यकर्ता के जुड़े होने से इनकार किया और कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री की कार पर इस तरह का हमला स्वीकार्य नहीं है। घटना की पुष्टि के लिए आधिकारिक जांच और पुलिस कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।
रविवार को कांचरापाड़ा पहुंचीं ममता बनर्जी का स्थानीय प्रदर्शनकारियों ने विरोध किया। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने उनके काफिले को रोकने की कोशिश की और कार के आसपास नारेबाजी की।
ममता बनर्जी का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान उनकी गाड़ी पर पत्थर और जूते फेंके गए। उन्होंने कहा कि यदि पत्थर उन्हें लग जाता तो गंभीर चोट लग सकती थी। इस घटना के बाद उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए।
कभी ऐसा हमला नहीं देखा... मेरी गाड़ी पर पत्थर मारा... कांच खुला रहता तो सभी मर जाते...
पूर्व सीएम ममता बनर्जी pic.twitter.com/3rZcFl7vI8— Romita Tiwari (@romita_tiwari) August 9, 2026
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घटना के बाद ममता बनर्जी ने राज्य सरकार और पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय भाजपा से जुड़े लोगों को बचा रही है।
ममता ने कहा कि अगर सुरक्षा व्यवस्था इस तरह की है तो आम लोगों की सुरक्षा पर भी सवाल उठता है। उन्होंने घटना को लेकर कानूनी कार्रवाई करने की बात कही। हालांकि, भाजपा ने ममता के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में किसने प्रदर्शन किया और पथराव या जूते फेंकने की घटना में कौन लोग शामिल थे, यह जांच का विषय है।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने घटना को लेकर स्पष्ट किया कि अगर किसी ने पूर्व मुख्यमंत्री की कार पर पत्थर, कीचड़ या चप्पल फेंकी है तो भाजपा उसका समर्थन नहीं करती। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की घटना पश्चिम बंगाल की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। भाजपा नेता के अनुसार, यदि घटना हुई है तो राज्य पुलिस को मामले की जांच कर कार्रवाई करनी चाहिए।
इस तरह भाजपा ने एक तरफ ममता बनर्जी के आरोपों से पार्टी को अलग किया, वहीं दूसरी तरफ घटना की निंदा भी की।
ममता बनर्जी का कांचरापाड़ा दौरा तृणमूल कांग्रेस से जुड़े बिरजू कीट की पुलिस कस्टडी में हुई मौत के बाद हुआ। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, हालिशहर थाने की पुलिस ने बिरजू कीट को जबरन वसूली समेत कुछ आरोपों में गिरफ्तार किया था। अदालत ने उन्हें पुलिस कस्टडी में भेजा था।
इसके बाद पुलिस कस्टडी के दौरान उनकी मौत हो गई। उनकी पत्नी और कांचरापाड़ा नगरपालिका की पूर्व टीएमसी पार्षद जेनी शर्मा कीट ने आरोप लगाया कि लॉकअप में पुलिस की पिटाई के कारण उनके पति की मौत हुई। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। पुलिस की ओर से मामले पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही मौत के कारण और घटनाक्रम की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
बिरजू कीट के परिवार से मुलाकात के बाद ममता बनर्जी ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस लोगों की सुरक्षा करने के बजाय राजनीतिक संरक्षण देने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर गंभीर चिंता है और इस मामले में कानूनी कदम उठाए जाएंगे।
#WATCH बैरकपुर: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की गाड़ी पर उस समय हमला हुआ जब वह नॉर्थ 24 परगना में एक TMC कार्यकर्ता से मिलने जा रही थीं।
पूर्व CM ममता बनर्जी के अनुसार, "पुलिस के सामने ही असामाजिक तत्वों ने मेरी कार पर बड़े-बड़े पत्थर फेंके। गाड़ी पर हमला इतना… pic.twitter.com/enaYtdPOZU— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 9, 2026
यह घटना ऐसे समय हुई है जब इससे पहले टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी को भी विरोध का सामना करना पड़ा था। वह डायमंड हार्बर में पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे थे। वहां प्रदर्शनकारियों की ओर से अंडे फेंके जाने और उनके साथ धक्का-मुक्की किए जाने के दावे सामने आए थे। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।
कांचरापाड़ा की घटना में ममता बनर्जी के आरोप और भाजपा का बचाव, दोनों सामने आ चुके हैं। भाजपा ने पार्टी कार्यकर्ताओं के शामिल होने से इनकार किया है, जबकि ममता बनर्जी ने पुलिस और सत्तारूढ़ व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
ऐसे में अब पुलिस जांच, मौके के वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान यह स्पष्ट करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं कि प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या हुआ और कार पर कथित पथराव या अन्य वस्तुएं फेंकने में कौन शामिल था। फिलहाल यह घटना पश्चिम बंगाल में सियासी टकराव और कानून-व्यवस्था को लेकर एक नया विवाद जरूर खड़ा कर चुकी है।
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