'उसे धक्के देकर बाहर निकालो': अरे! ममता बनर्जी को लेकर ये क्या और क्यों बोल गए महेश जेठमलानी?

Published : May 06, 2026, 09:16 AM IST

पश्चिम बंगाल की सियासत में बड़ा टकराव-ममता बनर्जी का हार के बावजूद इस्तीफा से इनकार, महेश जेठमलानी ने राज्यपाल से उन्हें हटाने को कहा। चुनाव नतीजों, संवैधानिक अधिकार और “कुर्सी बचाओ” की जंग के बीच क्या होगा अगला कदम-कोर्ट, गवर्नर या राजनीतिक दबाव?

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Mamata Banerjee Resignation Row: भारत की राजनीति में एक असाधारण संवैधानिक टकराव उभरता दिख रहा है, जहां पश्चिम बंगाल की राजनीति एक अभूतपूर्व संवैधानिक टकराव की ओर बढ़ती दिख रही है। ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) के इस्तीफा न देने के फैसले ने सत्ता, कानून और मर्यादा-तीनों को एक ही मंच पर ला खड़ा किया है। वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी (Mahesh Jethmalani) के तीखे बयान ने इस विवाद को और भड़का दिया है।

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“इस्तीफ़ा नहीं दूंगी”-एक बयान जिसने सब कुछ बदल दिया

चुनावी हार के बावजूद ममता बनर्जी ने साफ कहा कि वह इस्तीफा नहीं देंगी। उनका दावा है कि उनकी पार्टी की करीब 100 सीटें “छीन ली गईं”। यह बयान सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि संवैधानिक बहस का केंद्र बन गया है। क्या एक मुख्यमंत्री चुनाव परिणामों के बाद भी पद पर बने रह सकते हैं? यही सवाल अब सियासी गलियारों में गूंज रहा है।

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“बाहर निकालो”-जेठमलानी का बड़ा संवैधानिक वार

महेश जेठमलानी ने इस पूरे घटनाक्रम को “लोकतंत्र के लिए चुनौती” बताया। उनके मुताबिक, जैसे ही चुनाव परिणामों को आधिकारिक रूप से प्रमाणित किया जाता है, मौजूदा सरकार का नैतिक और संवैधानिक आधार खत्म हो जाता है। उन्होंने यहां तक कहा कि अगर मुख्यमंत्री पद छोड़ने से इनकार करती हैं, तो राज्यपाल पुलिस के जरिए उन्हें “बाहर निकलवा” सकते हैं। यह बयान अभूतपूर्व है और सीधे तौर पर राज्यपाल की शक्तियों को केंद्र में लाता है।

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संवैधानिक पेच: क्या सच में हटाए जा सकते हैं CM?

भारतीय संविधान के तहत मुख्यमंत्री “राज्यपाल की मर्जी” से पद पर बने रहते हैं। ऐसे में अगर नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हो चुका है, तो मौजूदा मुख्यमंत्री का पद पर बने रहना विवादास्पद हो जाता है।  राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति एक संवैधानिक संकट का रूप ले सकती है, जहां न्यायपालिका की भूमिका भी अहम हो सकती है।

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BJP की जीत और बढ़ता दबाव

इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) की निर्णायक जीत के बाद ममता बनर्जी पर दबाव और बढ़ गया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा शर्मा (Himanta Biswa Sarma) ने भी साफ कहा कि “अगर इस्तीफा नहीं दिया गया, तो बर्खास्तगी तय है।”

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कोर्ट या टकराव-अगला कदम क्या?

जेठमलानी ने सुझाव दिया कि अगर ममता बनर्जी के पास चुनावी धांधली के सबूत हैं, तो उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए। लेकिन अगर वह ऐसा नहीं करतीं और पद पर बनी रहती हैं, तो यह मामला सीधे टकराव की ओर बढ़ सकता है-जहां राज्यपाल, पुलिस और शायद कोर्ट-तीनों एक साथ सक्रिय हो सकते हैं।

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7 मई-डेडलाइन या निर्णायक दिन?

पश्चिम बंगाल विधानसभा का कार्यकाल 7 मई को समाप्त हो रहा है। यह तारीख अब सिर्फ एक औपचारिक सीमा नहीं, बल्कि एक निर्णायक मोड़ बन चुकी है। क्या उससे पहले इस्तीफा होगा, या फिर संवैधानिक कार्रवाई? इस पूरे घटनाक्रम ने भारतीय राजनीति में एक नई बहस छेड़ दी है-क्या जनादेश के बाद भी सत्ता से चिपके रहना संभव है, या फिर संविधान अंततः अंतिम फैसला सुनाएगा? आने वाले कुछ दिन इस रहस्य से पर्दा उठाने वाले हैं।

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