Manoj Jarange: पहली और दूसरी सरकारी नोट में क्या बदला? आंकड़ों ने खोली पूरी तस्वीर

Published : Sep 18, 2026, 05:52 PM IST

Manoj Jarange Protest: मनोज जरांगे के 20 दिन के उपोषण के बाद सरकार की दोनों नोट में क्या बदला? कुणबी रिकॉर्ड, हैदराबाद गॅझेट, जाति प्रमाणपत्र और केसों के आंकड़ों की पूरी तुलना यहां पढ़ें।

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20 दिन के उपोषण के बाद सरकार की नोट में क्या बदला?

मराठा आरक्षण के मुद्दे पर मनोज जरांगे पाटील का 20 दिन लंबा उपोषण भले ही फिलहाल थम गया हो, लेकिन असली कहानी अब सामने आई है। सरकार की पहले और बाद की नोट को साथ रखकर देखें तो तस्वीर सिर्फ आश्वासन की नहीं, बल्कि बदले हुए आंकड़ों और नई समयसीमा की भी है। सवाल यही है, क्या सरकार ने फैसला बदला या सिर्फ उसकी भाषा और कार्यवाही का तरीका?

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20वें दिन क्यों थमा आंदोलन?

17 सितंबर को सरकार के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के बाद मनोज जरांगे पाटील ने उपोषण स्थगित किया। सरकार ने उनकी प्रमुख मांगों पर 90 दिनों में कार्रवाई का आश्वासन दिया। जरांगे ने भी साफ किया कि उपोषण रोकना आंदोलन खत्म करना नहीं है।

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कुणबी रिकॉर्ड में बदले आंकड़े

पहली नोट में छत्रपति संभाजीनगर विभाग में वितरित कुणबी प्रमाणपत्रों की संख्या 3,16,977 थी, जो नई नोट में 3,13,897 हो गई। राज्य का आंकड़ा भी 51,84,537 से घटकर 51,71,781 हुआ। हालांकि नई नोट में 90 दिनों में कार्रवाई, पेनड्राइव के जरिए डेटा उपलब्ध कराने, जिलानिहाय नोडल अधिकारी और शिंदे समिति का दौरा शुरू करने जैसे अतिरिक्त बिंदु जोड़े गए हैं।

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Hyderabad Gazette में भी बदली तस्वीर

हैदराबाद गॅझेट से जुड़े आंकड़ों में भी अंतर दिखता है। पहले 3,966 आवेदन प्राप्त होने की बात थी, जिनमें 3,806 प्रमाणपत्र जारी, 25 लंबित और 135 अस्वीकृत बताए गए थे। नई नोट में आवेदन 3,553, जारी प्रमाणपत्र 3,372, लंबित मामले 50 और अस्वीकृत आवेदन 131 बताए गए हैं। यानी लंबित मामलों की संख्या 25 से बढ़कर 50 हो गई।

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Satara-Kolhapur और मुकदमों में क्या बदला?

सातारा-कोल्हापुर गॅझेट को लेकर नई नोट में 31 अगस्त को महाधिवक्ता के पास प्रस्ताव भेजे जाने और संबंधित कानूनी अधिकारियों का उल्लेख है। पहले मौजूद 30-45 दिन के अध्ययन और Attorney General से जुड़े विस्तृत विवरण को नई नोट में उसी तरह नहीं रखा गया। हालांकि 90 दिनों की समयसीमा अब भी अहम है।

वहीं आंदोलन से जुड़े मामलों के आंकड़े नहीं बदले—1,509 केस दर्ज, 1,373 वापस, 118 अपात्र और 18 लंबित। लेकिन नई नोट में वापस लिए गए मामलों की सूची और अपात्र/लंबित मामलों की दोबारा जांच का उल्लेख है।

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जाति प्रमाणपत्र में भी बदले आंकड़े

छत्रपति संभाजीनगर में जाति प्रमाणपत्र के आंकड़ों में भी संशोधन हुआ। प्राप्त आवेदन 21,051 से 20,763, जारी प्रमाणपत्र 16,110 से 15,994 और नामंजूर आवेदन 64 से 60 हुए। अन्य कारणों से निपटाए गए आवेदन 2,456 से घटकर 2,176 हुए, जबकि सबसे अहम बदलाव लंबित मामलों में है—ये 2,421 से बढ़कर 2,533 हो गए। यानी 20 दिन बाद तस्वीर में कुछ नए कार्यवाही बिंदु जरूर जुड़े हैं, लेकिन कई मूल मांगों पर सरकार की स्थिति पूरी तरह बदल गई हो, ऐसा इन दोनों नोट्स की तुलना से सीधे नहीं कहा जा सकता। अब असली परीक्षा अगले 90 दिनों में इन आश्वासनों के जमीन पर उतरने की होगी।

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