CM मोहन यादव का संदेश: गुड़ी पड़वा से शुरू हुआ विक्रम संवत् 2083, विक्रमादित्य के आदर्शों पर चलने की बात

Published : Mar 19, 2026, 09:24 PM IST
mohan yadav photo gudi padwa

सार

भोपाल में विक्रमोत्सव-2026 के दौरान CM मोहन यादव ने गुड़ी पड़वा और विक्रम संवत् 2083 की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने सम्राट विक्रमादित्य के आदर्शों को अपनाने और समाज के विकास के लिए काम करने की बात कही।

भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज गुड़ी पड़वा का पावन दिन है। इस दिन से भारतीय नववर्ष और नव संवत्सर की शुरुआत होती है। उन्होंने कहा कि यह दिन सृष्टि के आरंभ का प्रतीक है और इसे पूरे उत्साह और खुशी के साथ मनाया जाता है।

नव संवत्सर और भारतीय संस्कृति का महत्व

मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय परंपरा में नव संवत्सर का संबंध प्रकृति, सृष्टि और मानव जीवन से है। यह केवल एक नया साल नहीं, बल्कि नई ऊर्जा और सकारात्मक शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हमारे यहां संवत् की शुरुआत सृष्टि, प्रकृति और शासक के पुरुषार्थ से जुड़ी होती है।

विक्रमादित्य और विक्रम संवत् 2083 का महत्व

मुख्यमंत्री ने सम्राट विक्रमादित्य का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने शकों को हराया और समाज में फैली अराजकता को खत्म किया। उन्होंने अपनी प्रजा को कर्जमुक्त कर सामाजिक समरसता की नींव रखी। उनके ही प्रयासों से शुरू हुआ विक्रम संवत् अब 2083वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने विक्रमादित्य को लोकतंत्र का महानायक बताया।

विक्रमोत्सव-2026 कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का संबोधन

मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित विक्रमोत्सव-2026 के तहत “कोटि सूर्य उपासना” कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने गुड़ी पड़वा, चेती चंद, नववर्ष विक्रम संवत् 2083, घट स्थापना, नवरात्रि, ज्योर्तिविज्ञान दिवस और नवरेह जैसे सभी पर्वों की प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

ब्रह्म ध्वज स्थापना और एकता का संदेश

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने ब्रह्म ध्वज की स्थापना की और कहा कि यह ध्वज हमें एकजुट होकर देश और प्रदेश की सेवा करने की प्रेरणा देता है। उन्होंने विक्रमोत्सव के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य की शासन व्यवस्था ने लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत किया और आने वाले शासकों को जनकल्याण की दिशा दिखाई।

लोकतंत्र और भारतीय समाज की पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय समाज स्वभाव से अनुशासित और समावेशी है। हम “जियो और जीने दो” की भावना के साथ आगे बढ़ते हैं। उन्होंने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य के प्रयासों से लोकतंत्र के सिद्धांत आज भी हमारे जीवन का हिस्सा हैं और हमारी पहचान बन चुके हैं।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुति और सम्मान

कार्यक्रम में सम्राट विक्रमादित्य पर आधारित नाटक का मंचन भी किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी कलाकारों का सम्मान किया। इस अवसर पर विधायक भगवानदास सबनानी ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में सुशासन के नए मानक स्थापित हो रहे हैं। उज्जैन की धरती से लोकतंत्र की ज्योति जली और आज उसे और मजबूत किया जा रहा है।

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