
मध्य प्रदेश विधानसभा में आज मोहन सरकार का तीसरा बजट पेश हुआ तो सियासी तापमान भी साथ-साथ बढ़ा। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने इसे “हर हाथ को काम, हर युवा को रोजगार और हर नारी को न्याय” देने वाला बजट बताया। उनके शब्दों में यह बजट प्रधानमंत्री के विकसित भारत के विजन के अनुरूप राज्य को आगे बढ़ाने की रूपरेखा है। हालांकि, बजट भाषण के दौरान विपक्षी कांग्रेस विधायकों ने हंगामा किया, जिस पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन में व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए।
वित्त मंत्री ने बताया कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, सागर और उज्जैन में 472 ई-बसें शुरू की गई हैं। यह कदम प्रदूषण कम करने और किफायती, आधुनिक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। महिला कल्याण योजनाओं के लिए कुल ₹1,27,555 करोड़ का प्रावधान और स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए ₹23,747 करोड़ का बजट रखा गया है—जो सामाजिक क्षेत्र पर सरकार के फोकस को रेखांकित करता है।
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बजट में ₹21,630 करोड़ की “मुख्यमंत्री मजरा-टोला सड़क योजना” को मंजूरी दी गई है। सरकार का दावा है कि पिछले बजट भाषण में किए गए वादों पर अमल हुआ है। ग्राम विकास के लिए “केंद्रीय मुख्यमंत्री वृंदावन योजना” और “अहिल्या बाई कौशल विकास योजना” शुरू की जा चुकी हैं, जिनका उद्देश्य ग्रामीण बुनियादी ढांचे और कौशल उन्नयन को गति देना है।
कृषि क्षेत्र में बड़ा ऐलान करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि ₹3000 करोड़ की लागत से 1 लाख सोलर पंप किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे सिंचाई लागत घटने और ऊर्जा पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत पात्र परिवारों को प्रतिवर्ष कुल ₹12,000 की सहायता जारी रहेगी।
सरकार का कहना है कि भावांतर योजना की सफलता से अन्य राज्यों ने भी रुचि दिखाई है। अब “कृषक उन्नति योजना” के तहत किसानों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। जैविक एवं प्राकृतिक खेती के लिए 21.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पंजीकृत किए जाने का दावा भी किया गया है, जो टिकाऊ कृषि की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
यह बजट शहरी परिवहन, ग्रामीण सड़कों, कृषि सौरिकीकरण और महिला-स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़े प्रावधानों के जरिए संतुलित विकास का संदेश देता है। हालांकि, विपक्ष का सवाल है कि घोषणाओं के साथ जमीनी क्रियान्वयन की गति और पारदर्शिता भी उतनी ही महत्वपूर्ण होगी।
आने वाले महीनों में असली परीक्षा यही होगी कि घोषित योजनाएं कितनी तेजी से धरातल पर उतरती हैं और युवाओं व किसानों तक उनका प्रत्यक्ष लाभ किस स्तर तक पहुंचता है। यदि क्रियान्वयन मजबूत रहा, तो यह बजट मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकता है।
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