
भोपाल: मध्य प्रदेश की शांत प्रशासनिक राजधानी भोपाल अचानक एक बड़े और खौफनाक राजनीतिक अखाड़े में तब्दील हो गई है। नर्मदापुरम से शुरू हुआ किसानों का एक विशाल हुजूम, पुलिस के तमाम चक्रव्यूहों और अभेद्य बैरिकेड्स को ताश के पत्तों की तरह बिखेरते हुए भोपाल की सीमा के भीतर दाखिल हो चुका है। करीब 2,000 से अधिक किसान अपने साथ अनाज की बोरियां, बिस्तर, खाना बनाने के बर्तन और हफ्तों का राशन लेकर राजधानी के सावरकर सेतु पर डेरा डाल चुके हैं। आधी रात को पुलिस बल की भारी तैनाती के बावजूद किसानों का यह आक्रामक मार्च थमा नहीं। माहौल में तनाव इस कदर है कि किसी भी वक्त 'सीएम हाउस मार्च' की चिंगारी पूरी भोपाल को अपनी चपेट में ले सकती है।
करीब 2,000 किसान ट्रैक्टरों, अनाज की बोरियों, बिस्तरों, खाना बनाने के बर्तनों और कई दिनों के राशन के साथ भोपाल पहुंचे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले निकले इस आंदोलन ने राजधानी के बाहरी इलाकों में पुलिस की कई बैरिकेडिंग पार कर ली। किसानों ने साफ कहा है कि यदि सरकार ने जल्द निर्णय नहीं लिया तो अगला पड़ाव मुख्यमंत्री आवास होगा। राजधानी में किसानों के पहुंचते ही प्रशासन सतर्क हो गया है। कई स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। हालांकि किसान नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन मांगें पूरी होने तक धरना जारी रहेगा।
#WATCH | Bhopal, MP | Farmers marched from Narmadapuram to Bhopal demanding 100% procurement of moong crop at Minimum Support Price (MSP) and related issues. (28.07) pic.twitter.com/xUVmEfBYR4
— ANI (@ANI) July 28, 2026
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) के बैनर तले दर्जनों किसान संगठनों ने इस बार सीधे सरकार की दुखती रग पर हाथ रखा है। उनकी सबसे बड़ी और प्राथमिक मांग है-राज्य में उत्पादित मूंग की 100 फीसदी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद। इसके साथ ही, किसान ई-टोकन व्यवस्था में आ रही तकनीकी दिक्कतों और समय पर खाद के उचित वितरण की मांग को लेकर अड़ गए हैं। किसानों ने दोटूक लहजे में चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित में ठोस फैसला नहीं होता, वे भोपाल की धरती से एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे। यह आंदोलन मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार के लिए इस साल की सबसे बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक परीक्षा बन चुका है।
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जैसे ही किसानों का दबाव भोपाल की सड़कों पर दिखने लगा, मंत्रालय के भीतर आनन-फानन में रणनीतियां बदली जाने लगीं। राज्य के किसान कल्याण और कृषि विकास मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए सीधे दिल्ली में बैठे केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को एक आपातकालीन चिट्ठी लिखी है। इस चिट्ठी में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। मंत्री ने बताया कि 14 मई से 3 जुलाई 2026 के बीच मध्य प्रदेश में लगभग 8.06 लाख मीट्रिक टन मूंग का बंपर उत्पादन हुआ है, जबकि केंद्र द्वारा तय किया गया खरीद लक्ष्य महज 4.54 लाख मीट्रिक टन है। अब तक 4.19 लाख मीट्रिक टन की खरीद हो भी चुकी है। सरकार को डर है कि अगर केंद्र ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया, तो आधे से ज्यादा किसान बिना लाभ के रह जाएंगे और यह आक्रोश एक बड़े विद्रोह का रूप ले लेगा।
#WATCH | Bhopal, Madhya Pradesh: Farmers stage a sit-in on the Bhopal–Narmadapuram highway while en route to gherao the Chief Minister's residence, raising several demands, including the procurement of moong at the Minimum Support Price (MSP) and the abolition of the e-token… pic.twitter.com/d6L4ifjLey
— ANI MP/CG/Rajasthan (@ANI_MP_CG_RJ) July 29, 2026
मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र को याद दिलाया है कि देश के कुल मूंग उत्पादन में अकेले एमपी की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत है। ऐसे में यह संकट सिर्फ एक राज्य का नहीं बल्कि पूरे देश की कृषि व्यवस्था से जुड़ा है। हालांकि, मंगलवार को कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने किसान प्रतिनिधियों के साथ मंत्रालय में एक लंबी बैठक की और उन्हें भरोसा दिलाया कि सरकार उनके हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठा रही है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि किसान सिर्फ भरोसे के दम पर घर लौटने को तैयार नहीं हैं। सावरकर सेतु पर जलते चूल्हे और सीएम हाउस की तरफ बढ़ने को आतुर किसानों के कदम यह साफ बयां कर रहे हैं कि भोपाल में आने वाले दिन बेहद नाटकीय और तनावपूर्ण होने वाले हैं!
"वापस नहीं जायेंगे, हमें गोली मार दो...,"
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में MSP पर मूँग ख़रीदने की मांग को लेकर हजारों किसानों ने होशंगाबाद से भोपाल तक रैली निकाली।
जब पुलिस ने बैरिकेडिंग लगा कर उन्हें रोकने की कोशिश की, उन्होंने बैरीकेडिंग हटा दी।
फिल्हाल पुलिस किसानों को… pic.twitter.com/g3rOwnbMu4— काश/if Kakvi (@KashifKakvi) July 28, 2026
संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन की मुख्य मांगें हैं-
भोपाल की सीमा पर डटे किसानों और केंद्र को भेजे गए पत्र ने इस पूरे मामले को केवल कृषि मुद्दा नहीं रहने दिया है, बल्कि इसे राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण बना दिया है। यदि खरीद लक्ष्य नहीं बढ़ाया जाता, तो आंदोलन मुख्यमंत्री मोहन यादव सरकार के लिए इस वर्ष की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक साबित हो सकता है। अब सभी की निगाहें केंद्र सरकार के अगले फैसले और किसानों के संभावित CM हाउस मार्च पर टिकी हैं।
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