मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन के लिए ठाणे में हाईवे-3 पर 100 मीटर लंबा और 1405 मीट्रिक टन वजनी स्टील ब्रिज लॉन्च हुआ। यह महाराष्ट्र में प्रोजेक्ट का पहला स्टील ब्रिज है। इसके पार्ट्स 1300 किलोमीटर दूर बने हैं। अब तक 28 में से 16 ब्रिज पूरे हो चुके हैं।
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का काम अब और रफ्तार पकड़ रहा है। सोमवार को ठाणे जिले के भिवंडी इलाके (दिवे-अंजुर गांव) में नेशनल हाईवे-3 (नासिक हाईवे) के ऊपर एक विशाल स्टील ब्रिज सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया।
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अधिकारियों के मुताबिक, महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए बनकर तैयार होने वाला यह पहला स्टील ब्रिज है।इस पुल की सबसे खास बात यह है कि इसके पार्ट्स तमिलनाडु के त्रिची की एक वर्कशॉप में बनाए गए थे। यह जगह ठाणे से करीब 1,300 किलोमीटर दूर है। वहां से इन भारी-भरकम स्ट्रक्चर्स को ट्रेलरों पर लादकर महाराष्ट्र लाया गया और फिर साइट पर ही इन्हें जोड़कर पुल का रूप दिया गया।
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यह स्टील ब्रिज सिर्फ एक जगह से दूसरी जगह सामान लाकर जोड़ने का मामला नहीं है। यह दिखाता है कि भारतीय इंडस्ट्री अब देश के सबसे हाई-टेक रेल प्रोजेक्ट्स के लिए भी मुश्किल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में पूरी तरह सक्षम है।
पुल के निर्माण में कटिंग, ड्रिलिंग, वेल्डिंग और पेंटिंग का काम एकदम सटीक तरीके से डिजाइन के हिसाब से किया गया है। स्टील के हर बैच की अल्ट्रासोनिक टेस्टिंग (UT) की गई। इसके अलावा, काम करने वाले वेल्डर्स और सुपरवाइजर्स को इंटरनेशनल वेल्डिंग एक्सपर्ट्स ने सर्टिफाई किया था।
यह प्रोजेक्ट 'मेक इन इंडिया' के विजन को सच साबित कर रहा है। इससे पता चलता है कि हाई-स्पीड रेल नेटवर्क बनाने में हमारी अपनी तकनीक और क्षमता कितनी मजबूत हो चुकी है।
साइट पर इस 100 मीटर लंबे पुल को जमीन से करीब 17.5 मीटर की ऊंचाई पर अस्थायी ढांचों (trestles) पर असेंबल किया गया। इसके लिए 22 स्किड अरेंजमेंट और 54,076 खास तरह के हाई-स्ट्रेंथ बोल्ट्स (TTHSB) का इस्तेमाल हुआ। पुल को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और कंपन (vibration) रोकने के लिए इसमें C5 प्रोटेक्टिव पेंटिंग सिस्टम और इलास्टोमेरिक बियरिंग्स लगाए गए हैं।
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पुल तैयार होने के बाद, इसे ऑटोमैटिक सिस्टम की मदद से अपनी सही जगह पर खींचा गया। इस काम में 150 मीट्रिक टन क्षमता वाले दो होलो जैक और मैकअलॉय बार्स का इस्तेमाल किया गया। हाईवे से गुजरने वाले लोगों को परेशानी न हो, इसलिए यह पूरा काम रात के समय ट्रैफिक रोककर बहुत ही सावधानी से किया गया।
आपको बता दें कि हाईवे, एक्सप्रेसवे, बड़ी नदियों और रेलवे लाइनों को पार करने के लिए स्टील ब्रिज सबसे अच्छे माने जाते हैं, क्योंकि वहां लंबे स्पैन (दूरी) की जरूरत होती है।
इस पुल की लंबाई 100 मीटर, वजन 1,405 मीट्रिक टन, ऊंचाई 14 मीटर और चौड़ाई भी 14 मीटर है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के लिए कुल 28 स्टील ब्रिज बनाए जाने हैं, जिनमें से 16 अब पूरे हो चुके हैं।
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