
शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर से एक ऐसी सनसनीखेज और फिल्मी कहानी सामने आई है, जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस प्रशासन के होश उड़ा दिए हैं। मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट' (NEET) में लगातार दो बार फेल होने के बाद, माता-पिता के दबाव और डिप्रेशन के चलते 21 साल के एक युवक ने खुद को भारतीय सेना का 'ब्रिगेडियर' घोषित कर दिया। वह पिछले दो महीने से सेना की वर्दी पहनकर, अपनी कार पर सेना का झंडा लगाकर और साथ में नकली बंदूकधारी कमांडो लेकर सरेआम घूम रहा था। शाहजहांपुर पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने एक खुफिया जाल बिछाकर इस हाई-प्रोफाइल जालसाज को बेनकाब किया है।
पकड़े गए आरोपी की पहचान शाहजहांपुर के रोज़ा इलाके के रहने वाले आर्यन वर्मा के रूप में हुई है। आर्यन एक बेहद संभ्रांत और पढ़े-लिखे परिवार से ताल्लुक रखता है। उसके पिता अनिल वर्मा बागवानी विभाग में इंस्पेक्टर हैं और मां मनोज देवी एक सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। कड़ी पूछताछ में रोते हुए आर्यन ने बताया, “मेरी मां चाहती थीं कि मैं आर्मी ऑफ़िसर बनूं और पिता मुझे डॉक्टर बनाना चाहते थे। मैं उन्हें निराश नहीं करना चाहता था। इंटर के बाद मैं दिल्ली नीट की तैयारी करने गया, लेकिन दो बार फेल हो गया। परिवार के इसी दबाव को झेलने के लिए मैंने जनवरी में दिल्ली से ब्रिगेडियर की यूनिफॉर्म खरीदी और घर पर झूठ बोल दिया कि मेरा चयन सेना में हो गया है।”
🚨 BIG! Fake Brigadier Aryan Verma was caught at the Shahjahanpur Military Cantonment in Uttar Pradesh after months on the Army's radar.
He allegedly posed as a senior Army officer with two fake NSG commandos.
A fake Army ID and dummy pistol were recovered. His unusually… pic.twitter.com/hBlHA3BQDh— Megh Updates 🚨™ (@MeghUpdates) June 13, 2026
26 मई को जब आर्यन दिल्ली से शाहजहांपुर लौटा, तो उसने अपने पिता की टाटा हैरियर कार पर सेना का झंडा, 'डॉक्टर' और 'आर्मी' लिखवा लिया। उसने अपने तीन मंजिला मकान के बाहर बकायदा 'आर्मी ब्रिगेडियर' की नेमप्लेट भी टांग दी। इतना ही नहीं, उसने अपनी सुरक्षा के लिए दो स्थानीय लड़कों को नौकरी पर रखा और उन्हें नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) कमांडो की ब्लैक यूनिफॉर्म पहना दी। वह अक्सर सेना के कैंटोनमेंट (छावनी) इलाके में गाड़ी लेकर घूमने लगा। यहीं पर तैनात पूर्व सैनिकों को उसकी कम उम्र और हाव-भाव को देखकर गहरा शक हुआ। पूर्व सैनिकों ने तुरंत इसकी भनक स्टेशन हेडक्वार्टर के कर्नल जेएस जाग्रन को दी। सेना ने उसे पकड़ने के लिए एक ऐसा चक्रव्यूह रचा कि फर्जी ब्रिगेडियर खुद चलकर जाल में आ फंसा।
सेना के अधिकारी जानते थे कि अगर सीधे कार्रवाई की गई, तो आरोपी सतर्क होकर भाग सकता है। इसलिए उसे पकड़ने के लिए एक अनोखी योजना बनाई गई। आरोपी को जाल में फंसाने के लिए स्थानीय छात्रों को सम्मानित करने के बहाने 'शहीद संग्रहालय' में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि आमंत्रित किया गया। सम्मान की बात सुनकर आरोपी का हौसला बढ़ गया और वह बिना किसी भनक के सीधे सेना के बनाए जाल में आ फंसा। जैसे ही वह अपने पूरे तामझाम के साथ कार्यक्रम स्थल पर पहुंचा, पहले से घात लगाकर बैठे सेना के जवानों और पूर्व सैनिकों ने उसे और उसके साथियों को चारों तरफ से घेरकर हिरासत में ले लिया।
मंच पर पहुंचते ही वहां पहले से सादे कपड़ों में मौजूद सेना के असली अधिकारियों ने आर्यन को घेर लिया। अधिकारियों ने उससे सेना के नियमों, उसकी ट्रेनिंग और रेजिमेंट से जुड़े कुछ तकनीकी सवाल पूछने शुरू किए। एक के बाद एक मिलिट्री से जुड़े सवाल सुनकर आर्यन के पैर कांपने लगे, वह बुरी तरह नर्वस हो गया और कोई जवाब नहीं दे पाया। जब कड़ाई से पूछताछ हुई, तो उसने रोते हुए अपना सारा जुर्म उगल दिया।
आरोपी आर्यन वर्मा के साथ काले कपड़ों में मुस्तैद दो बाउंसर चल रहे थे, जो खुद को नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (NSG) के कमांडो बता रहे थे। इतना ही नहीं, उसकी गाड़ी के ड्राइवर के पास से भी भारत सरकार का एक फर्जी पहचान पत्र बरामद हुआ है, ताकि किसी भी चेकिंग के दौरान वह आसानी से बच सके।
हिरासत में लेने के बाद जब आरोपी और उसकी गाड़ी की तलाशी ली गई, तो सेना को कई आपत्तिजनक सामग्रियां मिलीं। अधिकारियों ने उसके पास से सेना के ब्रिगेडियर रैंक का एक हूबहू दिखने वाला नकली पहचान पत्र (ID Card), एक एयर पिस्टल, एएमसी रेजिमेंटल केन (Regimental Cane) और सेना के कई अन्य उपकरण व आधिकारिक चिन्ह बरामद किए हैं। शुक्रवार देर रात नायब सूबेदार अमित कुमार की लिखित शिकायत के आधार पर शाहजहांपुर के सदर बाजार पुलिस स्टेशन में आरोपी आर्यन वर्मा और उसके साथियों के खिलाफ धोखाधड़ी और सेना के प्रतीकों का गलत इस्तेमाल करने की गंभीर धाराओं के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज की गई। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या आर्यन ने इस फर्जी पहचान के जरिए किसी से पैसों की ठगी की थी या सेना की गोपनीय संपत्तियों को कोई नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी। फिलहाल, फर्जी ब्रिगेडियर जेल की सलाखों के पीछे है।
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