Nepal Flood: ग्लेशियर टूटने से 100 KM तक तबाही, चीन से बिहार तक सैलाब, असल में क्या और कहां हुआ?

Published : Aug 30, 2026, 08:01 AM IST

Nepal Glacier Burst: क्या पहले भूकंपीय हलचल हुई या ग्लेशियर टूटा? नेपाल-चीन सीमा से निकला बर्फ, चट्टान और पानी का सैलाब 193 KM/H की रफ्तार से 100 KM तक की रफ्तार से आगे बढ़ा और नदियों के रास्ते भारत पहुंच गया-वैज्ञानिक अब भी असली ट्रिगर तलाश रहे हैं।

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नेपाल बॉर्डर पर 5,000 मीटर ऊपर क्या हुआ था?

Nepal Glacier Disaster: नेपाल में आई भीषण बाढ़ से पहले हिमालय में एक ऐसी घटना हुई, जिसने कुछ ही समय में तबाही का दायरा करीब 100 किलोमीटर तक पहुंचा दिया। नेपाल-चीन सीमा के पास पहाड़ से ग्लेशियर का एक हिस्सा नीचे आया और उसके साथ बर्फ, चट्टान, मिट्टी और पानी का भारी मलबा नदियों में उतर गया। यह सैलाब कई नदी धाराओं से होता हुआ नेपाल के बड़े इलाके में फैल गया। इसका सबसे लंबा रास्ता त्रिशूली नदी के जरिए बना। इस पूरी घटना ने वैज्ञानिकों के सामने भी कई सवाल खड़े किए हैं—आखिर शुरुआत किस वजह से हुई? क्या पहले भूकंप आया या ग्लेशियर और पहाड़ी ढलान के टूटने से भूकंपीय हलचल पैदा हुई?

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Nepal Glacier Collapse: आखिर 26 अगस्त को हिमालय में क्या हुआ?

आपदा की शुरुआत 26 अगस्त को नेपाल के स्थानीय समय के अनुसार सुबह 8:37 बजे हुई। भारतीय समय के हिसाब से यह सुबह करीब 8:22 बजे का वक्त था। उस समय इलाके में लगे मॉनिटरिंग सिस्टम ने जमीन के अंदर हुई हलचल को 4.4 तीव्रता के भूकंप के रूप में दर्ज किया। लेकिन अगले तीन दिनों तक वैज्ञानिक इस बात को लेकर निश्चित नहीं थे कि रिकॉर्ड किया गया सिग्नल वास्तव में किस घटना का संकेत था। बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS ने अपने शुरुआती आकलन में बदलाव किया। एजेंसी ने कहा कि भूकंपीय तरंगें संभवतः नेपाल के लांगटांग नेशनल पार्क में ग्लेशियर से जुड़े एक बड़े भूस्खलन के कारण पैदा हुई थीं। USGS के मुताबिक इस भूस्खलन से निकली ऊर्जा करीब 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर थी।

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Glacier Landslide Nepal: भूकंप आया या ग्लेशियर गिरा? वैज्ञानिकों में मतभेद

इस घटना को लेकर अलग-अलग संस्थाओं के शुरुआती आकलन एक जैसे नहीं थे। भारत के रिमोट सेंसिंग सेंटर ने शुरुआती जानकारी में कहा कि करीब 4.9 तीव्रता के भूकंप के कारण ग्लेशियर का हिस्सा गिरा और घटना की शुरुआत तिब्बत की तरफ हुई थी। वहीं, इंटरनेशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेटेड माउंटेन डेवलपमेंट (ICIMOD) का कहना है कि फिलहाल इस आपदा की निश्चित वजह बताना जल्दबाजी होगी। सैटेलाइट तस्वीरों से हुई जियोलॉजिकल जांच में घटनाक्रम की एक दूसरी तस्वीर सामने आई। इसके अनुसार ग्लेशियर का एक हिस्सा पहाड़ की नेपाल वाली ढलान पर नीचे खिसका।

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भूस्खलन हुआ या ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा ढहा?

इसके बाद मलबे ने तिब्बत की ओर बहने वाली एक नदी का रास्ता रोक दिया। पानी के इस तरह रुकने के बाद अचानक तेज बहाव बना। इसी बहाव ने आगे जाकर तबाही का रूप ले लिया और नेपाल में बड़े पैमाने पर नुकसान होने से पहले ही सीमा के पास मौजूद एक बॉर्डर पोस्ट भी इसकी चपेट में आ गया। USGS ने भी फिलहाल घटना को लेकर पूरी निश्चितता का दावा नहीं किया है। एजेंसी के मुताबिक यह साफ नहीं है कि शुरुआती ढलान टूटने की घटना ग्लेशियर के हिस्से से जुड़ा भूस्खलन थी या खुद ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा ढह गया था। यानी अभी यह सवाल खुला है कि भूकंप ने ग्लेशियर या ढलान को गिराया, या फिर ग्लेशियर के गिरने से ऐसी भूकंपीय हलचल पैदा हुई जिसे पहले भूकंप समझा गया।

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Nepal Flood: ल्हेन्डे खोला से त्रिशूली तक पहुंचा मलबे का सैलाब

शुरुआत चाहे जिस तरह हुई हो, इसके बाद का घटनाक्रम काफी हद तक स्पष्ट है। बर्फ, पत्थर, मिट्टी और पानी का विशाल मलबा ल्हेन्डे खोला से आगे बढ़ा। इसके बाद यह भोटे कोशी और फिर त्रिशूली नदी में पहुंचा। देखते ही देखते मलबे और पानी का यह सैलाब करीब 100 किलोमीटर के इलाके में फैल गया। नेपाल के रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में इसका गंभीर असर पड़ा। नेपाल के जल विज्ञान विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक त्रिशूली नदी का जलस्तर सिर्फ 30 मिनट के भीतर करीब नौ मीटर बढ़ गया। घटना का स्वरूप इतना अचानक और व्यापक था कि इसे जमीन पर आई सुनामी यानी ‘इनलैंड सुनामी’ जैसा बताया गया।

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Glacier Flood Nepal: चीन के ग्यिरोंग पोर्ट तक पहुंची तबाही

नेपाल पहुंचने से पहले ही इस मलबे ने चीन के तिब्बत क्षेत्र में भारी नुकसान किया। ल्हेन्डे खोला की ओर बढ़ते मलबे और पानी ने ग्यिरोंग पोर्ट (Gyirong Port) को अपनी चपेट में ले लिया। यह चीन का सीमा क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण इनलैंड पोर्ट है और घटना वाली जगह से करीब 13 किलोमीटर दूर बताया गया है। पोर्ट की इमारत मलबे और कीचड़ के तेज बहाव में पूरी तरह तबाह हो गई। वहां की बड़ी इमारत का लगभग कोई निशान नहीं बचा। ग्यिरोंग पोर्ट कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले हिंदू तीर्थयात्रियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मार्ग है। घटना के दौरान पोर्ट की इमारत को कीचड़ और पानी के भारी बहाव में डूबते हुए कैमरों में रिकॉर्ड किया गया।

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Nepal China Border Flood: तिमुरे और स्याप्रु बेसी में भी भारी तबाही

चीन से नेपाल में प्रवेश करने के बाद सैलाब भोटे कोशी नदी के रास्ते आगे बढ़ा और त्रिशूली नदी में जा मिला। इसके बाद रसुवा जिले के तिमुरे और स्याप्रु बेसी जैसे इलाकों में इसका असर दिखाई दिया। कई जगहों पर पानी के साथ आए मलबे ने रास्तों, बस्तियों और दूसरी बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया। USGS के extent map के अनुसार मलबे का मुख्य प्रवाह करीब 100 किलोमीटर तक लगातार आगे बढ़ता रहा। विशेषज्ञों के आकलन के मुताबिक शुरुआती 22 किलोमीटर के हिस्से में यह लहर औसतन करीब 193 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आगे बढ़ी। इस आपदा का असर नेपाल की जलविद्युत व्यवस्था पर भी पड़ा। 10 से अधिक हाइड्रोपावर परियोजनाएं बंद हो गईं और देश की बिजली उत्पादन क्षमता के 12 प्रतिशत से ज्यादा हिस्से पर असर पड़ा।

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Trishuli River Flood: आखिर कहां जाकर थमा सैलाब?

धाडिंग के आगे त्रिशूली नदी पहाड़ी क्षेत्र से बाहर निकलती है। देवघाट के पास इसका संगम काली गंडकी से होता है और इसके बाद नदी नारायणी के नाम से आगे बढ़ती है। नारायणी नदी पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर में गंडक बैराज के पास त्रिवेणी क्षेत्र से भारत में प्रवेश करती है। यही वजह है कि नेपाल की इस आपदा का असर भारत के नदी तंत्र तक भी पहुंचा।

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Bihar Flood Alert: गंडक बैराज तक पहुंचा नेपाल का पानी

बिहार के जल संसाधन विभाग के मुताबिक 26 अगस्त की दोपहर गंडक बैराज पर करीब 86,000 क्यूसेक पानी दर्ज किया गया था और उस समय जलस्तर लगातार बढ़ रहा था। विभाग के अनुसार बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए थे। रात तक पानी का बहाव बढ़कर करीब 1.50 लाख क्यूसेक पहुंच गया। हालांकि गुरुवार सुबह तक यह घटकर लगभग 1.04 लाख क्यूसेक रह गया। स्थिति चिंता पैदा करने वाली थी, लेकिन बैराज के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा प्रवाह नहीं था। बरसात के मौसम में यहां इससे अधिक मात्रा में पानी पहले भी दर्ज किया जा चुका है। बिहार के उपमुख्यमंत्री और जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी के मुताबिक विभाग ने स्थिति को देखते हुए तत्काल एहतियाती कदम उठाए।

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Nepal Flood Impact India: उत्तर प्रदेश तक पहुंचा असर, मिले सात शव

नेपाल में आई इस आपदा का असर उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में भी दिखाई दिया। उत्तर प्रदेश प्रशासन ने महाराजगंज और कुशीनगर जिलों को अलर्ट किया। इन इलाकों में नदियों से सात शव बरामद किए गए हैं। माना जा रहा है कि ये शव नेपाल से बहकर भारत पहुंचे। इस पूरी घटना में सबसे बड़ा सवाल अभी भी शुरुआती कारण को लेकर है। क्या 26 अगस्त की भूकंपीय हलचल ने ग्लेशियर या पहाड़ी ढलान को गिराया, या फिर ग्लेशियर के अचानक टूटने से जमीन में ऐसी हलचल पैदा हुई जिसे शुरुआत में भूकंप माना गया? वैज्ञानिक इस सवाल का जवाब तलाश रहे हैं। लेकिन एक बात साफ है-हिमालय के ऊंचे इलाके में शुरू हुई इस घटना ने कुछ ही घंटों में चीन से नेपाल और फिर भारत तक करीब 100 किलोमीटर लंबे इलाके में तबाही का असर दिखा दिया।

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