
Noida Sleeper Bus Case: दिल्ली-एनसीआर को झकझोर देने वाले नोएडा स्लीपर बस गैंगरेप मामले में एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर दौड़ने वाली जिस बस में 16 साल की नाबालिग से दरिंदगी हुई, उसका ट्रैक रिकॉर्ड ही पूरी तरह से गैर-कानूनी और बेखौफ रवैये की कहानी बयां कर रहा है। एक्सक्लूसिव दस्तावेजों के मुताबिक, इस स्लीपर बस पर अप्रैल से लेकर अब तक कुल 12 ट्रैफिक चालान काटे जा चुके हैं-और इनमें से ज्यादातर मामले केवल बेकाबू तेज रफ्तार (ओवरस्पीडिंग) के हैं।
एनडीटीवी (NDTV) के पास मौजूद रिकॉर्ड के अनुसार, स्लीपर बस का रजिस्ट्रेशन 28 अप्रैल को फिरोजाबाद RTO कार्यालय में हुआ था। इसके कुछ ही समय बाद बस ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन को लेकर कार्रवाई के दायरे में आ गई। 12 मई को यमुना एक्सप्रेसवे पर बस के खिलाफ तेज रफ्तार के दो चालान जारी हुए। इनमें से एक चालान माइलस्टोन 72 के पास का था। दोनों मामलों में ₹4,000 का जुर्माना लगाया गया। जून में भी बस नियम तोड़ते हुए पकड़ी गई। नोएडा के सेक्टर 168 में बिना इंडिकेटर लेन बदलने के मामले में चालान जारी किया गया। लेकिन जुलाई में चालानों की संख्या अचानक काफी बढ़ गई।
चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय छात्रा से गैंगरेप...
दिल्ली - चलती स्लीपर बस में 16 वर्षीय छात्रा से गैंगरेप। मैनपुरी की रहने वाली छात्रा नोएडा आने के लिए परी चौक से स्लीपर बस में बैठी थी।
चलती बस में ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप ने छात्रा से गैंगरेप किया। बस में पर्दे लगे… pic.twitter.com/QLi969AnZx— JOURNALIST SURENDRA KUMAR (@Surendr54007254) August 31, 2026
जुलाई में बस के खिलाफ सिर्फ 23 दिनों के भीतर नौ चालान काटे गए। इन सभी मामलों में कुल जुर्माना ₹56,000 बताया गया है। रिकॉर्ड में दर्ज जुलाई के चालानों का ब्योरा इस तरह है:
इस रिकॉर्ड से साफ है कि जुलाई में बस कई बार ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के चलते कार्रवाई की जद में आई थी।
पिछले कुछ वर्षों में ट्रैफिक चालानों की संख्या बढ़ने के पीछे विशेषज्ञ कई तकनीकी और ढांचागत बदलावों को भी वजह मानते हैं। अब पहले की तुलना में ज्यादा सड़कों और जंक्शनों पर कैमरों की निगरानी है। इसके अलावा ऑटोमेटेड डिटेक्शन सिस्टम भी काम कर रहे हैं। इनकी मदद से तेज रफ्तार या दूसरे ट्रैफिक उल्लंघनों का पता पहले के मैनुअल सिस्टम की तुलना में ज्यादा तेजी से लगाया जा सकता है। फिर भी इस मामले में बस के खिलाफ लगातार कार्रवाई का रिकॉर्ड इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि बाद में इसी वाहन में एक नाबालिग लड़की के साथ कथित अपराध का मामला सामने आया।
घटना के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बसों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा कदम उठाने की बात कही है। उन्होंने बताया कि दिल्ली सरकार पड़ोसी राज्यों से दिल्ली आने वाली बसों के GPS सिस्टम को दिल्ली सरकार के संबंधित विभाग के सिस्टम से जोड़ने की योजना पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली आने-जाने वाली बसों में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए पड़ोसी राज्यों के साथ बातचीत की जाएगी। इस प्रस्ताव का मकसद दिल्ली में प्रवेश करने और यहां से गुजरने वाली बसों की निगरानी को और बेहतर करना है।
पुलिस के अनुसार, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली 16 वर्षीय छात्रा 4 अगस्त की रात घर से निकली थी। पुलिस का कहना है कि मां की डांट से नाराज होकर वह नोएडा सेक्टर 63 जाने के लिए निकली थी, जहां उसका कजिन रहता है। रात करीब 9 बजे भारी बारिश के बीच वह कथित तौर पर ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर गलत जगह उतर गई। इसके बाद वह एक स्लीपर बस में सवार हुई। पुलिस के मुताबिक, कंडक्टर ने उससे कहा था कि बस सेक्टर 63 की तरफ जा रही है। इसी दौरान बस में उसके साथ कथित गैंगरेप की घटना हुई।
पुलिस के अनुसार, घटना के बाद लड़की को कश्मीरी गेट के पास छोड़ दिया गया था। पीड़िता ने पुलिस को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद जांच शुरू हुई। पुलिस ने बस का पता लगाकर उसे फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया। मामले में दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। यह घटना सामने आने के बाद दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर फिर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। मामले की तुलना 2012 के निर्भया कांड की भयावह यादों से भी की गई है। अब पुलिस चार्जशीट दाखिल करने की तैयारी में है। वहीं, बस के पुराने ट्रैफिक रिकॉर्ड ने जांच को एक और अहम पहलू दे दिया है-आखिर अप्रैल से लगातार ट्रैफिक उल्लंघनों के बावजूद इस बस की निगरानी और कार्रवाई का सिलसिला कितना प्रभावी था?
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