
नॉर्वे की एक दुकान में सब्जियों के दाम देखकर एक भारतीय शख्स हैरान रह गया। लेकिन मामला सिर्फ महंगे टमाटर, नींबू और खीरे तक नहीं रुका। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो ने भारत में सब्जियों की कीमत और किसानों को मिलने वाले दाम के बीच के अंतर पर नई बहस छेड़ दी है।
X पर विनोद नाम के भारतीय ने नॉर्वे की दुकान का वीडियो शेयर किया। उनके मुताबिक, वहां ऑर्गेनिक नींबू करीब 850 रुपये किलो, टमाटर करीब 680 रुपये किलो और खीरा लगभग 300 रुपये प्रति पीस बिक रहा था। उन्होंने बताया कि कई साल नॉर्वे में रहने के बावजूद दुकान पर कीमतें देखकर उन्हें अब भी हैरानी होती है।
Even after living in Norway for years, it still surprises me every time I visit the butikk 😊🇳🇴
These are the daily prices of groceries:
Organic lemon: ₹850/kg, tomato: ₹680/kg, cucumber: ₹300 each 😳
In India’s metros, lemons can cost around ₹90–₹110/kg, tomatoes ₹60–₹80/kg, and cucumbers ₹20–₹30 each, depending on quality.
It’s 8 times cheaper than Norway, but salaries aren’t 8 times higher in Norway - not even close. Still, we complain as always.
It’s not about Norway’s cost structure, salaries, imports and so on… it just makes me wonder if we’re paying our farmers fair price, enough for their hard work in India. 🧡
What do you think, fam? Are we failing our farmers in India? 😌🇮🇳
— Vinod (@turiyatman) September 29, 2026
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विनोद ने इन कीमतों की तुलना भारत के बड़े शहरों में मिलने वाली कीमतों से की। उनके मुताबिक, भारत में नींबू करीब 90-110 रुपये किलो, टमाटर 60-80 रुपये किलो और खीरा लगभग 20-30 रुपये प्रति पीस मिल सकता है। हालांकि, सब्जियों की कीमत शहर, सीजन, गुणवत्ता और बाजार के हिसाब से लगातार बदलती रहती है।
विनोद का सवाल सिर्फ भारत और नॉर्वे की कीमतों का अंतर नहीं था। उन्होंने पूछा कि जब भारतीय उपभोक्ताओं को सब्जियां अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिलती हैं, तो क्या उस कीमत का उचित हिस्सा किसानों तक पहुंचता है? उन्होंने किसानों को उनकी उपज का सही मूल्य मिलने पर सवाल उठाया।
पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी अलग-अलग रहीं। कुछ यूजर्स ने किसानों की कम कमाई के लिए बिचौलियों और बाजार व्यवस्था को जिम्मेदार बताया। वहीं कुछ लोगों ने मांग और आपूर्ति को कीमत तय करने वाला प्रमुख कारक बताया। कई यूजर्स ने भारत और नॉर्वे की सीधी तुलना को भी उचित नहीं माना, क्योंकि दोनों देशों में खेती, आय, नियम और खाद्य बाजार की परिस्थितियां अलग हैं।
भारत और नॉर्वे में सब्जियों की खुदरा कीमतों का अंतर बड़ा है, लेकिन इससे किसानों की वास्तविक आय का सीधा निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। उत्पादन लागत, परिवहन, स्टोरेज, टैक्स, मजदूरी, आयात, खुदरा मार्जिन और स्थानीय मांग जैसे कई कारक अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं। फिर भी यह वीडियो एक अहम सवाल जरूर सामने लाता है—उपभोक्ता जो कीमत चुकाता है, उसमें किसान का हिस्सा कितना होता है?
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