फिर क्यों फेल हुई US-ईरान डील? इंतज़ार करता रहा इस्लामाबाद, नहीं पहुंचे अमेरिकी दूत, अराघची भी लौटे

Published : Apr 26, 2026, 08:27 AM IST

Pakistan Mediation Failure: इस्लामाबाद में US-Iran शांति वार्ता शुरू होने से पहले ही ढह गई-डोनॉल्ड ट्रंप ने दौरा रद्द किया, अब्बास अराघची बिना मिले लौटे। Hormuz blockade, nuclear tension और अविश्वास के बीच डील अब भी रहस्य बनी हुई है।

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Islamabad Talks Collapse: 25 अप्रैल 2026 को इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता का दूसरा दौर शुरू होने से पहले ही बिखर गया। जिस बैठक को मध्य पूर्व में तनाव कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा था, वह अचानक अनिश्चितता में बदल गई। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची बिना अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का इंतज़ार किए लौट गए, और दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरी क्षणों में अपने दूतों की यात्रा रद्द कर दी।

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पाकिस्तान की कोशिशें और बढ़ती उम्मीदें

पाकिस्तान ने खुद को एक “ईमानदार मध्यस्थ” के रूप में पेश करते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी, आंशिक लॉकडाउन लागू किया और दोनों देशों को एक मंच पर लाने की पूरी तैयारी कर ली। इस्लामाबाद में माहौल ऐसा था मानो कोई ऐतिहासिक समझौता होने वाला हो। लेकिन घंटों के इंतज़ार के बाद, न अमेरिकी प्रतिनिधि पहुंचे और न ही वार्ता शुरू हो सकी—जिससे सारी कोशिशें धरी की धरी रह गईं।

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ईरान की ‘रेड लाइन्स’ और सख्त शर्तें

ईरान पहले से ही अपनी शर्तों पर अडिग था। उसने साफ कर दिया था कि किसी भी वार्ता से पहले होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटानी होगी। तेहरान के लिए यह सिर्फ एक शर्त नहीं, बल्कि उसकी रणनीतिक और आर्थिक सुरक्षा का सवाल था। अमेरिका की “अत्यधिक मांगों” को ईरान ने अवास्तविक बताते हुए खारिज कर दिया, जिससे बातचीत की जमीन और कमजोर हो गई।

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ट्रंप के बयान और बढ़ता अविश्वास

डोनाल्ड ट्रंप के सार्वजनिक बयान इस पूरी प्रक्रिया में सबसे विवादित तत्व बनकर उभरे। ईरानी रियायतों के उनके दावों को तेहरान ने तुरंत खारिज कर दिया, जिससे दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी और गहरी हो गई। ट्रंप का यह कहना कि “18 घंटे की उड़ान बेकार है” और “सारे पत्ते अमेरिका के पास हैं”, कूटनीतिक संतुलन को और बिगाड़ गया।

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मंच तैयार, खिलाड़ी गायब

जब इस्लामाबाद में पाकिस्तानी नेतृत्व ईरानी प्रतिनिधियों से मिल रहा था, तब अमेरिकी टीम का इंतज़ार होता रहा-जो कभी पहुंची ही नहीं। अराघची ने अपनी चिंताएं स्पष्ट करने के बाद बिना किसी प्रत्यक्ष वार्ता के शहर छोड़ दिया। उसी समय ट्रंप ने सोशल मीडिया पर यात्रा रद्द करने की घोषणा कर दी। यह एक ऐसा क्षण था जिसने पूरी पहल को ठंडे बस्ते में डाल दिया।

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क्या आगे भी बंद रहेगा संवाद का रास्ता?

इस विफलता ने यह साफ कर दिया कि अमेरिका और ईरान के बीच गहरा अविश्वास अभी भी सबसे बड़ी बाधा है। जहां एक ओर ट्रंप बातचीत के लिए दरवाज़ा खुला रखने की बात करते हैं, वहीं ईरान अमेरिकी नीतियों पर संदेह बनाए हुए है। फिलहाल, दोनों पक्ष इंतज़ार की स्थिति में हैं—कौन पहले झुकेगा, यह देखना बाकी है। इस्लामाबाद की यह नाकाम कोशिश सिर्फ एक बैठक का रद्द होना नहीं, बल्कि वैश्विक कूटनीति में मौजूद जटिलताओं का प्रतीक है। मध्य पूर्व में शांति की उम्मीदें अभी भी धुंधली हैं, और हर अगला कदम अनिश्चितता से भरा हुआ है।

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