दाने-दाने को तरस रहा पाक, पानी पर दिखा रहा हेकड़ी! अब कैमरे पर बिलबिलाए शहबाज के मंत्री- VIDEO

Published : Jun 30, 2026, 09:07 AM IST
Indus Waters Treaty Row

सार

सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान की तरफ से एक बार फिर गीदड़भभकी दी गई है। इस बार पाकिस्तानी मंत्री मुसादिक मलिक ने हाथ काटने की धमकी दी है। जानिए पूरा मामला और मंत्री के बयान का VIDEO...

Indus Waters Treaty Row: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर तनाव एक बार फिर चर्चा में है। अब खस्ताहाल अर्थव्यवस्था से जूझ रहे पाकिस्तान के जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत को नई गीदड़भभकी दी है। इस्लामाबाद में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के क्लाइमेट चेंज मंत्री मुसादिक मलिक और सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने भारत के खिलाफ जमकर जहर उगला। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर दावा करने की कोशिश की, तो 'हम उन हाथों को काट देंगे।' मंत्री का यह बयान ऐसे समय आया है, जब सिंधु जल संधि को लेकर दोनों देशों के बीच पहले से ही तनाव बना हुआ है।

पाकिस्तान के मंत्री ने क्या धमकी दी?

सूचना मंत्री अताउल्ला तरार के साथ एक जॉइंट प्रेस कॉन्फ्रेंस में जलवायु परिवर्तन मंत्री मुसादिक मलिक ने भारत पर सीधा निशाना साधा। उनका कहना था कि भारत पाकिस्तान का पानी रोकने की कोशिश कर रहा है, और इसके लिए उन्होंने बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल किया। मलिक ने कहा, 'एक टैप है जिसे पड़ोसी देश का प्रधानमंत्री कंट्रोल कर रहा है। वो कहता है कि पाकिस्तान में पानी की एक बूंद भी नहीं जाने देगा।' वो यहीं नहीं रुके, बल्कि गीदड़भभकी देते हुए कहा, 'जो भी हमारे पानी के हिस्से पर दावा करेगा, हम उसके हाथ काट देंगे।' ये बयान पाकिस्तानी न्यूज चैनल 24NewsHD समेत कई और मीडिया आउटलेट्स ने रिपोर्ट किया और इसके वीडियो क्लिप्स भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए।

 

 

पाकिस्तानी सूचना मंत्री का दावा- संधि अब भी लागू है

इसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में सूचना मंत्री अताउल्ला तरार ने एक अलग ही दावा कर दिया। उनका कहना था कि सिंधु जल समझौता आज भी कानूनी रूप से बाध्यकारी है, और इसे कोई भी देश अकेले ना रद्द कर सकता है, ना संशोधित कर सकता है। तरार ने कहा कि भारत के स्टैंड को दुनिया के किसी भी मंच पर समर्थन नहीं मिला है, इसलिए संधि अब भी पूरी तरह लागू मानी जानी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के उस पुराने बयान को भी दोहराया, जिसमें कहा गया था कि 'पानी हमारी लाइफलाइन है और हमारी रेड लाइन भी।'

इंटरनेशनल सेमिनार बुलाने की भी तैयारी

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तानी मंत्रियों ने एक और बड़ा ऐलान किया। उनका कहना है कि इस्लामाबाद में मंगलवार को सिंधु जल समझौते पर पहला इंटरनेशनल सेमिनार आयोजित किया जा रहा है, जिसमें कानूनी एक्सपर्ट्स, वाटर स्पेशलिस्ट्स और विदेशी डेलीगेट्स शामिल होंगे। इस सेमिनार में संधि के कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होने की बात कही गई है।

सिंधु जल संधि विवाद शुरू कैसे हुआ?

दरअसल, सिंधु जल समझौता साल 1960 में वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता से हुआ था, जिसके तहत भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी सिस्टम का पानी बांटा जाता है। इस समझौते के मुताबिक भारत को रावी, ब्यास और सतलुज जैसी पूर्वी नदियों का अधिकार मिला, जबकि पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों का ज्यादातर पानी मिलता है। दशकों तक जंग और तनाव के बावजूद यह संधि बनी रही, लेकिन अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। इस हमले में 26 लोगों की जान गई थी और भारत ने इसके पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकियों का हाथ बताया। इसके बाद भारत ने ऐलान कर दिया कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को 'भरोसेमंद और हमेशा के लिए' खत्म नहीं करता, तब तक यह संधि स्थगित रहेगी। पाकिस्तान ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया।

पहले सेना, फिर पाक मंत्री की धमकी

ये पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान की तरफ से इस तरह की धमकी आई हो। इससे पहले पाकिस्तान के डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा आसिफ ने भी कह दिया था कि अगर पानी की सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ, तो पाकिस्तान भारत के खिलाफ जंग का रास्ता भी अपना सकता है। ARY न्यूज से बातचीत में आसिफ ने कहा था, 'जिस पल हमें लगेगा कि हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे में है और पानी इसका हिस्सा है, हम भारत के खिलाफ युद्ध करेंगे। बिल्कुल करेंगे।'

भारत का करारा जवाब, संधि अब पुरानी पड़ चुकी

भारत ने अपने स्टैंड पर दो टूक जवाब दिया है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 62वें सेशन में भारत की फर्स्ट सेक्रेटरी अनुपमा सिंह ने कहा कि जो देश आतंकवाद को अपनी नीति का हिस्सा बना चुका है, उससे ये उम्मीद रखना ही गलत है कि भारत उसके साथ भरोसे और दोस्ती के आधार पर सहयोग जारी रखेगा। सिंह ने आगे कहा कि 1960 में हुई एक संधि को हमेशा के लिए हक के तौर पर नहीं माना जा सकता, खासकर जब पिछले छह दशकों में हालात इतने बदल चुके हैं। उन्होंने पाकिस्तान को नसीहत भी दे डाली कि वो अपने घरेलू मसलों पर ध्यान दे, बजाय इसके कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बेबुनियाद मुद्दे उठाए। भारत हमेशा से यही कहता रहा है कि 'जम्मू-कश्मीर था, है, और हमेशा भारत का अभिन्न हिस्सा रहेगा', और पाकिस्तान सिर्फ अपनी आतंकवाद से जुड़ी नाकामियों और घरेलू संकटों से दुनिया का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे मुद्दे उठाता रहता है।

 

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