Parbhani Hanuman Mandir: कभी पूरा गांव उजाड़ गया था, लेकिन नहीं हिला हनुमान मंदिर, अब उसी धाम में हादसा

Published : Jun 20, 2026, 06:58 PM IST
Maharashtra Hanuman Mandir

सार

Maharashtra Hanuman Mandir: परभणी के 400 साल पुराने हनुमान मंदिर में हादसे से 7 मौत। जानिए उस चमत्कारी धाम की कहानी, जहां पूरा गांव उजड़ने पर भी मंदिर अडिग रहा।

Parbhani Hanuman Mandir History: महाराष्ट्र के परभणी जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। शनिवार, 20 जून को प्रसिद्ध यशवाड़ी देवस्थान के हनुमान मंदिर में निर्माणाधीन सभामंडप की छत गिरने से 7 श्रद्धालुओं की मौत हो गई है, जबकि 25 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। मानवत तालुका के कोल्हा गांव में स्थित इस 'श्री त्रिमूर्ति हनुमान मंदिर' का इतिहास करीब 400 साल पुराना है। इसकी कहानी बेहद दिलचस्प है। कहा जाता है कि एक बार पूरा का पूरा गांव ही उजड़ गया था लेकिन यह मंदिर तब टस से मस भी नहीं हुआ था। आइए जानते हैं परभणी वाले हनुमान मंदिर की कहानी...

पत्थरों से बना प्राचीन मंदिर

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर करीब 400 साल पुराना माना जाता है। शुरुआती दौर में यहां एक छोटा सा मंदिर था, जहां आसपास के गांवों के लोग पूजा करने आते थे। मंदिर की सबसे खास बात इसका पुराना पत्थर वाला ढांचा माना जाता है। वर्षों तक यह मंदिर ग्रामीण क्षेत्र की पहचान बना रहा। धीरे-धीरे यहां श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई और मंदिर का स्वरूप भी बड़ा होता गया।

जब पूरा गांव खाली हो गया, लेकिन मंदिर वहीं खड़ा रहा

यह हनुमान मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों की आस्था और इतिहास का हिस्सा माना जाता है। इस मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित लोककथा यह है कि कई पीढ़ियां पहले किसी कारण से पूरा गांव उजड़ गया था। लोग अपना घर-बार छोड़कर दूसरी जगह चले गए, लेकिन गांव के बीच बना हनुमान मंदिर अपनी जगह पर बना रहा। आज भी बुजुर्गों के बीच यह कहानी सुनाई जाती है कि समय बदल गया, लोग बदल गए, बस्ती बदल गई, लेकिन मंदिर नहीं बदला। यही वजह है कि इस मंदिर को लेकर लोगों के मन में अलग तरह का सम्मान और विश्वास देखने को मिलता है।

त्रिमूर्ति हनुमान मंदिर कैसे बना?

समय के साथ मंदिर का विस्तार हुआ और इसे नया रूप दिया गया। आज यह स्थान 'त्रिमूर्ति हनुमान मंदिर' और 'हनुमंत राय मंदिर' के नाम से जाना जाता है। मंदिर परिसर में लगातार विकास कार्य किए गए, जिससे यह सिर्फ गांव का मंदिर न रहकर पूरे मराठवाड़ा क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक केंद्र बन गया।

साधु-संतों की तपोभूमि भी माना जाता है यह स्थान

मंदिर से जुड़ी एक और मान्यता इसे खास बनाती है। कहा जाता है कि यहां कई संतों और तपस्वियों ने साधना की थी। स्थानीय धार्मिक परंपराओं में इस स्थान को सिद्ध पीठ का दर्जा भी दिया जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि सालों की साधना और तप के कारण इस स्थान की आध्यात्मिक ऊर्जा आज भी लोगों को अपनी ओर खींचती है।

क्यों उमड़ती है इतनी भीड़?

अगर आप किसी सामान्य शनिवार को भी यहां पहुंच जाएं तो बड़ी संख्या में श्रद्धालु नजर आ जाएंगे। मंदिर में आने वाले भक्तों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई प्रार्थना जरूर सुनी जाती है। इसी विश्वास के कारण हर शनिवार हजारों लोग दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हनुमान जयंती, अमावस्या और विशेष धार्मिक आयोजनों के दौरान तो यहां श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है।

महाप्रसाद और भक्ति का माहौल

इस मंदिर की पहचान सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है। यहां भजन, कीर्तन, सामूहिक आरती और महाप्रसाद की भी खास परंपरा है। शनिवार के दिन सुबह से ही भक्तों का आना शुरू हो जाता है। दिनभर पूजा-पाठ चलता है और बाद में हजारों लोगों को प्रसाद वितरित किया जाता है। इसी वजह से यह मंदिर आसपास के जिलों के लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है।

बदल रहा है मंदिर का स्वरूप

बीते कुछ सालों में मंदिर परिसर को और भव्य बनाने का काम शुरू किया गया। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए नई सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। मंदिर परिसर के विस्तार, सभा मंडप और अन्य निर्माण कार्यों के जरिए इसे बड़े धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है।

 

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