छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में फिर नजर आया पेरेग्रीन फाल्कन, वन्यजीव संरक्षण की बड़ी सफलता

Published : Jan 31, 2026, 10:10 AM IST
peregrine falcon seen udanti sitanadi tiger reserve chhattisgarh

सार

छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला पेरेग्रीन फाल्कन फिर देखा गया। शाहीन बाज की मौजूदगी राज्य के अनुकूल पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के सफल प्रयासों का संकेत मानी जा रही है।

रायपुर। पेरेग्रीन फाल्कन दुनिया का सबसे तेज उड़ने वाला पक्षी माना जाता है। शिकार के दौरान यह इतनी तेज रफ्तार से गोता लगाता है कि इसकी गति अविश्वसनीय लगती है। यह बाज प्रजाति ऊंचाई से शिकार पर झपट्टा मारने में माहिर है, इसलिए इसे “आसमान का चीता” भी कहा जाता है। पेरेग्रीन बाज बड़े और तेज शिकारी पक्षी होते हैं। इनके मजबूत और नुकीले पीले पंजे इन्हें उड़ते हुए भी दूसरे पक्षियों को पकड़ने में सक्षम बनाते हैं।

छत्तीसगढ़: दुर्लभ पक्षियों का पसंदीदा ठिकाना

छत्तीसगढ़ धीरे-धीरे दुनिया भर के पक्षियों के लिए पसंदीदा स्थल बनता जा रहा है। यहां की अनुकूल जलवायु और समृद्ध जैव विविधता के कारण कई दुर्लभ पक्षी लंबी दूरी तय कर पहुंच रहे हैं। इसी कड़ी में उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। यहां दुनिया के सबसे तेज उड़ने वाले पक्षी पेरेग्रीन फाल्कन, जिसे स्थानीय तौर पर शाहीन बाज कहा जाता है, को फिर से देखा गया है।

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दुर्लभ दृश्य दर्ज

इस दुर्लभ पक्षी को वन रक्षक श्री ओमप्रकाश राव ने अपने कैमरे में कैद किया है। इससे पहले भी आमामोरा ओड़ क्षेत्र के पास शेष पगार जलप्रपात के आसपास ड्रोन कैमरों में इसकी मौजूदगी दर्ज की गई थी। इससे साफ है कि यह पक्षी इस क्षेत्र में सक्रिय रूप से मौजूद है। पेरेग्रीन फाल्कन अपनी अद्भुत रफ्तार के लिए विश्व प्रसिद्ध है। शिकार का पीछा करते समय यह लगभग 320 किमी प्रति घंटे की गति से गोता लगा सकता है, जबकि सामान्य उड़ान में इसकी रफ्तार करीब 300 किमी प्रति घंटा रहती है। यह छोटे पक्षियों, कबूतरों और तोतों का शिकार करता है। ऊंचाई से तेज गोता लगाकर सटीक हमला करना इसकी खास शिकार तकनीक है।

वफादार जोड़ी और अनुकूल पर्यावरण का संकेत

विशेषज्ञों के मुताबिक यह पक्षी अपनी गति के साथ-साथ अपनी वफादारी के लिए भी जाना जाता है। ये आमतौर पर अकेले या जोड़े में रहते हैं और अक्सर जीवनभर एक ही साथी चुनते हैं। लगभग 12 से 15 साल तक जीवित रहने वाला यह पक्षी जब उदंती-सीतानदी के जंगलों में दिखता है, तो यह संकेत देता है कि छत्तीसगढ़ का पर्यावरण वन्यजीवों के लिए बेहद अनुकूल है। हाल में हुए बर्ड सर्वे के दौरान बारनवापारा अभयारण्य में ऑरेंज ब्रेस्टेड ग्रीन पिजन और ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर जैसे दुर्लभ और आकर्षक पक्षी भी देखे गए हैं।

वन्यजीव संरक्षण में वन विभाग के प्रयास

वन मंत्री श्री केदार कश्यप वन और वन्यजीव संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रहे हैं। उनके मार्गदर्शन और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में वन विभाग की टीम लगातार निगरानी और प्रभावी क्रियान्वयन में जुटी है। इन सतत प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब साफ दिखाई दे रहे हैं।

संरक्षण प्रयासों से मिल रही नई ऊर्जा

वन विभाग की यह उपलब्धि सिर्फ रिकॉर्ड के लिहाज से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि राज्य में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों को नई ऊर्जा देने वाली भी है। इससे यह भरोसा मजबूत होता है कि सही दिशा में किए गए प्रयासों से जैव विविधता को सुरक्षित रखा जा सकता है।

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