मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने नया मोड़ ले लिया है। पिछले 48 घंटों में ईरान समर्थित मिलिशिया ने फ्रांस, इटली और तुर्की से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इराक के इरबिल में ड्रोन हमले में एक फ्रांसीसी सैनिक की मौत हो गई, जबकि तुर्की के इन्किर्लिक एयरबेस पर मिसाइल हमले को रोक लिया गया। इससे NATO देशों की चिंता बढ़ गई है।

Iran-US War Day 14: मिडिल-ईस्ट में ईरान के साथ इजराइल-अमेरिका की जंग अब तीसरे विश्वयुद्ध की ओर तेजी से बढ़ती दिख रही है। दरअसल, पिछले 48 घंटों के भीतर ईरान समर्थित मिलिशिया गुटों ने सीधे तौर पर फ्रांस, इटली और तुर्की से जुड़े सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इन हमलों से न सिर्फ क्षेत्रीय तनाव बढ़ गया है, बल्कि आशंका जताई जा रही है कि नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गनाइजेशन (NATO) भी इस युद्ध में अब शामिल हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो ये तीसरे विश्वयुद्ध की शुरुआत होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार, इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में मौजूद सैन्य ठिकानों और तुर्की के एक अहम एयरबेस को मिसाइल और ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया। इसके बाद NATO देशों ने सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी है।

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इरबिल में ड्रोन हमले में फ्रांसीसी सैनिक की मौत

सबसे गंभीर घटना इराक के इरबिल के पास सामने आई। यहां ईरान समर्थित मिलिशिया के एक ड्रोन हमले में फ्रांस के एक सैनिक की जान चली गई। फ्रांसीसी सेना के मुताबिक, इरबिल से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित एक प्रशिक्षण केंद्र में सैनिक कुर्द बलों को ISIS के खिलाफ लड़ाई का प्रशिक्षण दे रहे थे। इसी दौरान वहां ड्रोन हमला हुआ। इस हमले में फ्रांसीसी सेना के अधिकारी अर्नो फ्रेयन की मौत हो गई, जबकि कम से कम 6 अन्य सैनिक घायल बताए जा रहे हैं।

फ्रांस के राष्ट्रपति की कड़ी प्रतिक्रिया

घटना के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहे सैनिकों पर हमला स्वीकार नहीं किया जा सकता और इसके जिम्मेदार लोगों को जवाब देना होगा।

इटली के सैन्य ठिकाने के पास भी हुआ मिसाइल हमला

इसी दौरान इरबिल में ही एक अन्य सैन्य ठिकाने को भी निशाना बनाया गया, जहां इटली के सैनिक तैनात हैं। मिसाइल हमले के दौरान बेस के आसपास जोरदार विस्फोट हुआ। हालांकि शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। सैन्य अधिकारियों का मानना है कि यह हमला भी ईरान समर्थित गुटों द्वारा किया गया हो सकता है। इस घटना ने इराक में तैनात NATO देशों की सेनाओं के लिए खतरे की घंटी बजा दी है।

तुर्की के इन्किर्लिक एयरबेस को भी बनाया निशाना

तीसरा हमला तुर्की के इन्किर्लिक एयरबेस पर किया गया। यह एयरबेस NATO के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां अमेरिकी तथा सहयोगी देशों की सेनाएं मौजूद रहती हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की ओर से दागी गई मिसाइल को NATO के एयरडिफेंस सिस्टम ने हवा में ही रोक लिया, जिससे बड़े नुकसान को टाल दिया गया। हालांकि इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है।

अमेरिकी सैन्य विमानों से जुड़ी घटनाएं भी सामने आईं

इस बीच युद्ध के दौरान अमेरिकी सैन्य विमानों से जुड़ी कुछ घटनाएं भी सामने आई हैं। एक अमेरिकी कार्गो विमान ने इजरायल के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग की। रिपोर्ट्स के अनुसार विमान की टेल क्षतिग्रस्त दिखाई दी, हालांकि इसके कारणों और विमान में मौजूद कार्गो के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं, अमेरिकी सेना के बोइंग KC-135 स्ट्रैटोटैंकर विमान के पश्चिमी इराक में क्रैश होने की भी पुष्टि हुई है।

अमेरिकी विमान हादसे में 4 लोगों की मौत

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक इस विमान में कुल 6 लोग सवार थे। हादसे में चार लोगों की मौत हो गई है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। अमेरिका ने साफ किया है कि यह हादसा दुश्मन की गोलीबारी का नतीजा नहीं था। हालांकि, इराक में सक्रिय ईरान समर्थित गुटों ने दावा किया था कि उन्होंने अमेरिकी विमान को मार गिराया है।