ट्रंप, मैक्रों और स्टार्मर से मिलेंगे PM मोदी, G7 Summit में भारत पर रहेगी दुनिया की नजर

Published : Jun 16, 2026, 04:40 PM IST
PM Modi Arrives In France For G7 Summit 2026 Set To Meet Donald Trump And Other Global Leaders

सार

PM Narendra Modi G7 Summit: G7 Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किन प्रमुख वैश्विक नेताओं से मुलाकात करेंगे? इस बार G7 Summit में भारत की भूमिका और ग्लोबल साउथ को लेकर क्या अपेक्षाएं हैं? पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बैठक में किन अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है?

वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के बदलते परिदृश्य के बीच भारत एक बार फिर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंचों में से एक G7 शिखर सम्मेलन में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंगलवार को फ्रांस के एवियन (Evian) शहर पहुंच गए, जहां वह दो दिवसीय G7 Summit 2026 में हिस्सा लेंगे। यह लगातार सातवां अवसर है जब प्रधानमंत्री मोदी G7 शिखर सम्मेलन में शामिल हो रहे हैं। भारत की यह लगातार मौजूदगी वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती भूमिका और प्रभाव को दर्शाती है।

फ्रांस पहुंचते ही पीएम मोदी ने दिया संदेश

एवियन पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा करते हुए कहा कि वह विश्व नेताओं के साथ महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा और विचार-विमर्श को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि भारत एक अधिक टिकाऊ, समृद्ध और संतुलित विश्व व्यवस्था के लिए सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन, वैश्विक आर्थिक चुनौतियां, ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीतिक तनाव जैसे मुद्दे इस सम्मेलन के केंद्र में रह सकते हैं।

 

 

स्विट्जरलैंड में हुआ गर्मजोशी से स्वागत

फ्रांस पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने स्विट्जरलैंड के जिनेवा में संक्षिप्त प्रवास किया। जिनेवा एयरपोर्ट पर उनका स्वागत स्विस राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन ने किया। दोनों नेताओं ने आपसी सहयोग और भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी जिनेवा से लगभग 45 किलोमीटर दूर स्थित एवियन के लिए रवाना हुए।

भारत की 13वीं और पीएम मोदी की 7वीं लगातार भागीदारी

G7 Summit में भारत की यह 13वीं भागीदारी है। हालांकि भारत G7 समूह का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में भारत को लगातार आमंत्रित किया जाता रहा है। विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों के समाधान में भारत की बढ़ती भूमिका, दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में उसकी स्थिति और ग्लोबल साउथ के देशों के प्रतिनिधि स्वरूप के कारण भारत का महत्व लगातार बढ़ा है।

ग्लोबल साउथ की आवाज उठाएगा भारत

इस बार के सम्मेलन में भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों की चिंताओं और अपेक्षाओं को वैश्विक मंच पर प्रभावी ढंग से रखना होगा। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने विकासशील देशों के मुद्दों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रमुखता से उठाया है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री मोदी खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु वित्त और विकासशील देशों की आर्थिक चुनौतियों जैसे विषयों पर अपना पक्ष रख सकते हैं।

 

 

नई साझेदारियां और वैश्विक सहयोग पर होगी चर्चा

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री एक उच्च स्तरीय कार्य सत्र में हिस्सा लेंगे, जिसका विषय है, "नई साझेदारियों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना।" इस सत्र में G7 देशों के नेताओं के अलावा साझेदार देशों, विश्व बैंक और अफ्रीकी विकास बैंक के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी शामिल होंगे।

कनाडा, ब्रिटेन और यूएई के नेताओं से भी मुलाकात

शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कई अहम द्विपक्षीय बैठकों में भी हिस्सा लेंगे। कार्यक्रम के अनुसार उनकी मुलाकात कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से होगी। इन बैठकों में व्यापार, निवेश, ऊर्जा, रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

ट्रंप और मोदी की मुलाकात पर टिकी दुनिया की नजर

प्रधानमंत्री मोदी के इस दौरे का सबसे चर्चित और महत्वपूर्ण कार्यक्रम अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ प्रस्तावित बैठक मानी जा रही है। विश्लेषकों के अनुसार दोनों नेता रक्षा सहयोग, व्यापार, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रणनीतिक चुनौतियों सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कर सकते हैं। इसके अलावा वैश्विक सुरक्षा, रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया की स्थिति और अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह सम्मेलन?

G7 Summit केवल विकसित देशों का मंच नहीं रह गया है। पिछले कुछ वर्षों में यह वैश्विक चुनौतियों पर व्यापक संवाद का मंच बन चुका है। भारत के लिए यह सम्मेलन अपनी आर्थिक ताकत, रणनीतिक महत्व और वैश्विक नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित करने का अवसर है। साथ ही यह उन मुद्दों को सामने रखने का भी मौका है जो विकासशील देशों के भविष्य को प्रभावित करते हैं। ऐसे समय में जब दुनिया कई आर्थिक, राजनीतिक और पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रही है, G7 Summit 2026 में भारत की भूमिका पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की विशेष नजर बनी हुई है।

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