School Book Price Shock: कक्षा 5 की इंग्लिश बुक ₹1035! क्या पढ़ाई बन गई “महंगी डील”?

Published : Mar 26, 2026, 10:55 AM IST

Education Cost Alert: क्या कक्षा 5 की ₹1035 की किताब बड़े ‘एजुकेशन रैकेट’ का संकेत है? प्राइवेट स्कूलों पर पब्लिशर्स से मिलीभगत के आरोप, ₹8000+ बुक सेट और सोशल मीडिया पर भड़का गुस्सा-क्या सरकार अब सख्त एक्शन लेगी या यूं ही बढ़ता रहेगा पढ़ाई का बोझ?

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School Book Price Shock: देशभर में प्राइवेट स्कूलों की फीस को लेकर पहले से ही बहस चल रही थी, लेकिन अब एक नया मुद्दा आग की तरह फैल रहा है-किताबों की बढ़ती कीमतें। कक्षा 5 की एक इंग्लिश बुक की कीमत ₹1035 सामने आने के बाद माता-पिता का गुस्सा सोशल मीडिया पर फूट पड़ा है। क्या शिक्षा अब जरूरत नहीं, बल्कि महंगा बिज़नेस बनती जा रही है?

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कैसे सामने आया ₹1035 वाली किताब का मामला?

लखनऊ के एक नामी प्राइवेट स्कूल के कैम्ब्रिज सेक्शन में पढ़ने वाले बच्चों के लिए ‘बर्लिंगटन सीरीज़’ की एक इंग्लिश किताब की कीमत ₹1035 बताई गई। यहीं नहीं, पूरे बुक सेट की कीमत ₹8000 से ज्यादा बताई जा रही है। इससे माता-पिता के बीच चिंता बढ़ गई है, खासकर मिडिल क्लास और लो-इनकम परिवारों में।

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क्या प्राइवेट स्कूल और पब्लिशर्स के बीच ‘डील’ है?

यह कोई एक स्कूल की बात नहीं है। कई बड़े प्राइवेट स्कूलों में महंगी किताबें अब आम हो चुकी हैं। अक्सर ये स्कूल प्राइवेट पब्लिशर्स के साथ टाई-अप करते हैं और फिर उन्हीं की किताबें अनिवार्य कर दी जाती हैं। इनकी कीमत NCERT किताबों से कई गुना ज्यादा होती है। इसका मतलब कि छात्रों के पास सस्ती किताब चुनने का विकल्प ही नहीं होता।

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NCERT की सस्ती किताबें क्यों नहीं चलतीं?

माता-पिता का आरोप है कि NCERT की किताबें ₹50–₹100 में मिल जाती हैं, लेकिन प्राइवेट स्कूल उन्हें लागू नहीं करते।

वजह क्या बताई जा रही है?

  • प्राइवेट किताबों में ज्यादा “मार्जिन”
  • स्कूल और पब्लिशर्स के बीच कमाई का मॉडल
  • यही कारण है कि लोग कह रहे हैं-
  • “प्राइवेट स्कूल = आधा पढ़ाई, आधा बिज़नेस”
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सोशल मीडिया पर क्यों मचा बवाल?

माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर माता-पिता लगातार अपनी शिकायतें शेयर कर रहे हैं। लोग सरकार से मांग कर रहे हैं:

  • किताबों की कीमतों पर नियंत्रण हो
  • सभी स्कूलों में NCERT किताबें लागू हों
  • प्राइवेट वेंडर्स की जांच हो
  • कई यूज़र्स अधिकारियों को टैग कर तुरंत कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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क्या सरकार इस पर कोई कदम उठा रही है?

दिल्ली सरकार ने प्राइवेट स्कूल फीस को कंट्रोल करने के लिए School Level Fee Regulation Committees (SLFRCs) बनाने की योजना बनाई थी। लेकिन कोर्ट के आदेश के चलते अभी यह लागू नहीं हो पाया है। यानी फिलहाल स्कूल अपनी मनमानी फीस और किताबों के रेट जारी रख सकते हैं।

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क्या पहले भी किताबों को लेकर विवाद हुआ है?

हां हाल ही में NCERT को कक्षा 8 की एक सोशल साइंस किताब वापस लेनी पड़ी थी। वजह साफ है कि किताब में विवादित कंटेंट और सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप। इससे यह साफ है कि शिक्षा से जुड़े मुद्दे अब सीधे राष्ट्रीय बहस बन रहे हैं।

क्या आम परिवारों पर बढ़ रहा है बोझ?

आज के समय में पढ़ाई का खर्च तेजी से बढ़ रहा है:

  • स्कूल फीस
  • कोचिंग
  • किताबें
  • यूनिफॉर्म

इन सबको जोड़ें तो एक बच्चे की पढ़ाई लाखों में पहुंच सकती है। यही वजह है कि माता-पिता अब खुलकर विरोध कर रहे हैं। अगर इस मुद्दे पर जल्द सख्त नियम नहीं बने, तो आने वाले समय में पढ़ाई और महंगी हो सकती है। एक्सपर्ट मानते हैं कि सरकार को किताबों के दाम तय करने चाहिए। NCERT को बढ़ावा देना चाहिए और प्राइवेट स्कूलों की मॉनिटरिंग जरूरी है।

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