उत्तर प्रदेश में 2017-18 से शिक्षा क्षेत्र में बड़े सुधार हुए हैं। स्कूल नेटवर्क विस्तार, साक्षरता वृद्धि, डिजिटल शिक्षा, बालिका सशक्तिकरण और उच्च शिक्षा विकास से राज्य की शिक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। सरकार शिक्षा को रोजगार और विकास से जोड़ रही है।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017-18 से शिक्षा को सर्वसुलभ, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारोन्मुख बनाने के लिए कई दूरदर्शी कदम उठाए हैं। युवाओं को कौशल विकास, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति से जोड़ते हुए शिक्षा को प्रदेश की प्रगति का मजबूत आधार बनाया जा रहा है। आर्थिक समीक्षा में स्पष्ट है कि प्राथमिक शिक्षा में ड्रॉपआउट रोकने से लेकर उच्च शिक्षा को वैश्विक स्तर तक ले जाने में उल्लेखनीय प्रगति हुई है।
स्कूल शिक्षा नेटवर्क विस्तार: राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का प्रभाव
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को लागू करते हुए उत्तर प्रदेश में शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए 2,62,358 विद्यालयों का बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया है। इनमें 1,35,658 प्राथमिक, 90,243 उच्च प्राथमिक, 11,938 माध्यमिक और 24,519 उच्च माध्यमिक विद्यालय शामिल हैं।
पीएमश्री योजना के तहत 1,722 स्कूलों को “हरित विद्यालय” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जिससे आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल शिक्षा वातावरण तैयार हो रहा है।
साक्षरता दर में सुधार: शिक्षा उपलब्धता और नामांकन में वृद्धि
2017-18 से 2023-24 के बीच शिक्षा के बुनियादी ढांचे, नामांकन और सामुदायिक सहभागिता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
- पुरुष साक्षरता दर 80.6% से बढ़कर 86% हुई।
- महिला साक्षरता दर 62.9% से बढ़कर 70.4% हो गई।
यह बदलाव प्रदेश में शिक्षा जागरूकता और पहुंच के विस्तार को दर्शाता है।
प्राथमिक शिक्षा बजट में वृद्धि: मजबूत शैक्षिक आधार का निर्माण
शिक्षा ढांचे को मजबूत बनाने के लिए सरकार ने बजट में लगातार वृद्धि की है।
- 2016-17 में प्राथमिक शिक्षा पर 32.91 हजार करोड़ रुपये खर्च हुए थे।
- 2024-25 में यह बढ़कर 68.46 हजार करोड़ और 2025-26 में 82.34 हजार करोड़ रुपये हो गया।
समग्र शिक्षा अभियान के तहत 2017-18 में 6322.07 करोड़ रुपये खर्च हुए, जो 2024-25 में बढ़कर 8263.37 करोड़ रुपये हो गए। लर्निंग-बाय-डूइंग कार्यक्रम 2274 स्कूलों से बढ़कर 2025-26 में 3288 स्कूलों तक पहुंच गया है।
डिजिटल शिक्षा और छात्र सुविधाएं: स्मार्ट क्लास, DBT और ICT लैब
2025-26 में कक्षा 1 से 8 तक के 1.47 करोड़ बच्चों को मुफ्त किताबें और वर्कबुक दी गईं। डीबीटी के जरिए यूनिफॉर्म, बैग, जूते, मोजे और स्टेशनरी के लिए प्रति छात्र 1200 रुपये दिए जा रहे हैं।
- 25,790 स्कूलों में स्मार्ट क्लास स्थापित।
- 880 ब्लॉक संसाधन केंद्र और 4688 स्कूलों में ICT लैब।
- 2025-26 में 5810 और स्कूलों में स्मार्ट क्लास तथा 8291 में ICT लैब स्थापित की जा रही हैं।
बालिका शिक्षा सशक्तिकरण: KGBV और आत्मरक्षा प्रशिक्षण
प्रदेश के 746 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में 87,700 बालिकाएं पढ़ रही हैं। आईआईटी गांधीनगर के सहयोग से 68,000 बालिकाओं में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाने के कार्यक्रम चल रहे हैं। “एक केजीबीवी एक खेल” योजना से खेल प्रोत्साहन दिया जा रहा है। रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा कार्यक्रम के तहत 10.22 लाख बालिकाओं को प्रशिक्षण मिल चुका है।
समावेशी शिक्षा पहल: दिव्यांग छात्रों के लिए विशेष योजनाएं
- 6-14 वर्ष के दिव्यांग बच्चों की पहचान और ट्रैकिंग के लिए समर्थ पोर्टल बनाया गया है।
- 2793 दृष्टि दिव्यांग बच्चों को ब्रेल किताबें।
- 4438 अल्प दृष्टि बच्चों को बड़े अक्षरों वाली किताबें।
विशेष जरूरतों वाले छात्रों को सहायक उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं।
ड्रॉपआउट दर में कमी और नामांकन वृद्धि: शिक्षा में सकारात्मक बदलाव
यू-डाइस प्लस रिपोर्ट के अनुसार:
- उच्च प्राथमिक सकल नामांकन दर 75.3% से बढ़कर 83.9% हुई।
- प्राथमिक स्तर ड्रॉपआउट 7.2% से घटकर लगभग शून्य हो गया।
- उच्च प्राथमिक ड्रॉपआउट 7.4% से घटकर 3.0% रह गया।
- रिटेंशन दर 77.8% से बढ़कर 86.9% हो गई है।
माध्यमिक शिक्षा सुधार: डिजिटल मॉनिटरिंग और करियर गाइडेंस
प्रदेश में 29,532 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं। परख, प्रज्ञान और पहुंच पोर्टल विकसित किए गए हैं, जबकि “पंख पोर्टल” से करियर मार्गदर्शन दिया जा रहा है। 8373 परीक्षा केंद्रों पर CCTV व वॉयस रिकॉर्डर से निगरानी की गई। प्रोजेक्ट अलंकार के तहत 500 विज्ञान लैब बनाने का लक्ष्य है और 1084 ICT लैब स्थापित हो चुकी हैं।
उच्च शिक्षा विस्तार: विश्वविद्यालय, शोध और वैश्विक सहयोग
महाविद्यालयों की संख्या 6681 से बढ़कर 8030 हो गई है। प्रदेश में 38 राज्य विश्वविद्यालय और 52 निजी विश्वविद्यालय संचालित हैं। 2025-26 में शोध व नवाचार के लिए 26916.03 लाख रुपये का बजट रखा गया है।
अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक सहयोग और वैश्विक रैंकिंग
विश्वविद्यालयों ने 289 अंतरराष्ट्रीय एमओयू किए हैं, जिनसे 97,197 छात्र और 259 शिक्षक लाभान्वित हुए हैं। NAAC A++ विश्वविद्यालय शून्य से बढ़कर 6 हो गए हैं। NAAC प्रत्यायित संस्थान 95 से बढ़कर 155 हो गए। QS रैंकिंग में अब 3 विश्वविद्यालय शामिल हैं।
तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा: कौशल विकास और स्टार्टअप संस्कृति
प्रदेश में 184 सरकारी व अनुदानित पॉलीटेक्निक संस्थान हैं, जिनकी क्षमता 55,127 सीटें है। 21 महिला पॉलीटेक्निक भी संचालित हैं। “कलाम अभ्युदय योजना” से स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है। राजकीय ITI में ड्रोन टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक ट्रेड्स शुरू किए गए हैं, जिससे उद्योग 4.0 के अनुरूप कौशल विकसित हो रहा है।


