
नई दिल्ली: देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की साख पर लगे बट्टे और चौतरफा सियासी दबाव के बीच मोदी सरकार एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक लेकर आई है, जिसने परीक्षा माफियाओं की रातों की नींद उड़ा दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में 'पब्लिक एग्ज़ामिनेशन्स (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन बिल, 2026' को आधिकारिक मंजूरी दे दी गई है। सोमवार को लोकसभा में पेश होने जा रहे इस प्रस्तावित कानून का सीधा मकसद है-पेपर लीक के सिंडिकेट को नेस्तनाबूद करना। लेकिन क्या यह नया चक्रव्यूह परीक्षा माफियाओं को रोक पाएगा, या फिर संसद में एक नए बड़े सियासी टकराव की वजह बनेगा?
सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बिल की गंभीरता को देखते हुए इसे सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। सरकार इस कानून को बिना किसी देरी के तुरंत लागू करना चाहती है। पिछले कुछ समय से परीक्षाओं में हुई धांधली को लेकर जो राजनीतिक गतिरोध बना हुआ था, यह बिल उसका एक सख्त कानूनी जवाब माना जा रहा है। वीकेंड की छुट्टी के बाद जब सोमवार को संसद की कार्यवाही शुरू होगी, तो यह बिल पटल पर रखा जाएगा, जिससे सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच एक बार फिर तीखी बहस होने की पूरी संभावना है।
मौजूदा 2024 के कानून को बेहद कड़ा और धारदार बनाने के लिए इस संशोधन विधेयक में मुख्य रूप से 6 बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा गया है, जो सीरियल वाइज नीचे दिए गए हैं:
विधेयक के साथ जारी 'उद्देश्य और कारण' के बयान में कहा गया है कि इन संशोधनों का मकसद सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता, पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करना है। सरकार का मानना है कि समयबद्ध जांच, तेज सुनवाई और कड़ी सजा से परीक्षा माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
इस विधेयक में यह भी प्रावधान है कि स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट के फैसलों के खिलाफ अपील सीधे हाई कोर्ट की डिवीज़न बेंच में होगी, जिसे तीन महीने के भीतर निपटाना होगा। सरकार का दावा है कि इन ऐतिहासिक बदलावों से परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता वापस लौटेगी। लेकिन सबसे बड़ा सस्पेंस यह है कि परीक्षा सुधारों को लेकर पहले से ही हमलावर विपक्षी दल संसद में इस सख्त कानून का समर्थन करेंगे, या इसे सरकार की एक और रणनीतिक ढाल बताकर सदन की कार्यवाही को दोबारा ठप कर देंगे। नजरें सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही पर टिकी हैं।
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