Why Pralhad Joshi Education Minister: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी प्रह्लाद जोशी को ही क्यों मिली? जानिए मोदी सरकार की 3 लेयर रणनीति।
Pralhad Joshi Education Minister: नीट यूजी (NEET-UG) विवाद के बाद जैसे ही धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया, पूरे देश में एक ही सवाल उठने लगा, 'अब शिक्षा मंत्रालय की कमान किसे सौंपी जाएगी?' जब पीएम मोदी ने अपने सीनियर कैबिनेट मंत्री प्रह्लाद जोशी को इस मंत्रालय का एक्स्ट्रा चार्ज दिया, तो बहुत लोग चौंक गए। कई लोगों के मन में सवाल आया कि जो मंत्री पहले से ही खाद्य एवं उपभोक्ता मामले (Consumer Affairs) और रिन्यूएबल एनर्जी संभाल रहे हैं, उन्हें अचानक शास्त्री भवन (शिक्षा मंत्रालय) का बॉस क्यों बना दिया गया? राजनीतिक जानकार इसे रैंडम फैसला नहीं मान रहे हैं। उनका मानना है कि इसके पीछे पीएम मोदी का एक बहुत बड़ा और सॉलिड गेमप्लान है। आइए समझते हैं सरकार की वो '3 लेयर की रणनीति', जिसके तहत पीएम मोदी ने अपने सबसे बड़े 'क्राइसिस मैनेजर' को मैदान में उतारा है...
पहली लेयर: संसद में विपक्ष को संभालने का 'मास्टर गेम'
अभी संसद का मानसून सत्र चल रहा है और नीट पेपर लीक के मुद्दे पर विपक्ष पूरे गुस्से में है। सरकार को पता था कि अगर कोई नया या कम अनुभवी मंत्री इस कुर्सी पर बैठा, तो संसद में विपक्ष के सवालों का सामना करना मुश्किल हो जाएगा। यहीं काम आता है प्रह्लाद जोशी का तगड़ा एक्सपीरियंस। प्रह्लाद जोशी संसद के पुराने खिलाड़ी है। साल 2019 से 2024 तक देश के संसदीय कार्य मंत्री (Parliamentary Affairs Minister) रह चुके हैं। उन्हें पता है कि संसद में जब हंगामा होता है, तो बात को कैसे संभाला जाता है। दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) में विपक्ष के तीखे हमलों का जवाब देने और बहस को लीड करने में उनका कोई मुकाबला नहीं है। सरकार ने सिर्फ एक शिक्षा मंत्री नहीं चुना है, बल्कि संसद में सरकार का बचाव करने के लिए एक मजबूत ढाल खड़ी की है।
दूसरी लेयर: NTA की सर्जरी और सिस्टम का क्लीन-अप
प्रह्लाद जोशी की छवि एक ऐसे मंत्री की है जो बिना कोई शोर मचाए, पर्दे के पीछे रहकर सिस्टम की गंदगी साफ करते हैं। उनके पास अभी 'कंज्यूमर अफेयर्स' (उपभोक्ता मामले) का मंत्रालय भी है। सरकार अब देश के 24 लाख से ज्यादा छात्रों और उनके पैरेंट्स को 'सिस्टम के कंज्यूमर' की तरह देख रही है, जिनके साथ कोई धोखा नहीं होना चाहिए। नए बॉस के आते ही NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) में दो बड़े बदलाव होने जा रहे हैं।
1. जोशी का पहला बड़ा टारगेट NTA के पूरे ढांचे को बदलना है। अब परीक्षाओं को तेजी से CBT (कंप्यूटर बेस्ड टेस्टिंग) पर शिफ्ट किया जाएगा ताकि पेपर लीक का चांस ही खत्म हो जाए।
2. हाल ही में बने सख्त एंटी-पेपर लीक कानूनों को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर होगी। गलती करने वालों को सीधे जेल और भारी जुर्माने का डर दिखाया जाएगा।
तीसरी लेयर: बिना रुकावट के देश की शिक्षा नीति को आगे बढ़ाना
जब किसी मंत्रालय में इतना बड़ा विवाद होता है, तो पुराने अच्छे काम भी रुक जाते हैं। पीएम मोदी नहीं चाहते थे कि नीट विवाद के चक्कर में देश की नई शिक्षा नीति (NEP 2020) और हायर एजुकेशन के दूसरे बड़े प्रोजेक्ट्स लटक जाएं। प्रह्लाद जोशी एक डिसिप्लिन वाले एडमिनिस्ट्रेटर (प्रशासक) माने जाते हैं। उनका काम यह तय करना होगा कि विवाद अपनी जगह सुलझता रहे, लेकिन देश के स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज से जुड़े रूटीन फैसले और सुधार बिल्कुल न रुकें। केंद्र और राज्य सरकारों के बीच तालमेल बिठाने में वो एक्सपर्ट हैं।


