Dharmendra Pradhan Resignation Letter Key Points: धर्मेंद्र प्रधान के 543 शब्दों के इस्तीफे वाले पत्र में क्या लिखा है? जानें 5 बड़े पॉइंट्स, जिन्होंने पूरे देश का ध्यान खींचा है।
Dharmendra Pradhan Resignation: नीट (NEET-UG) पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 543 शब्दों की दो पन्नों की चिट्ठी लिखकर अपना इस्तीफा सौंपा। इस पत्र में उन्होंने शिक्षा, छात्रों, एग्जाम माफिया, बीते 10 दिनों की घटनाओं और अपने फैसले के पीछे की वजह पर खुलकर बात की। इस्तीफे की इस चिट्ठी के 5 शब्दों ने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जानिए वो 5 सबसे बड़ी बातें क्या हैं...
'एग्जाम माफिया' के खिलाफ सख्त संदेश
3 मई 2026 को आयोजित हुई NEET-UG परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक पर धर्मेंद्र प्रधान ने लिखा कि जैसे ही अनियमितताएं सामने आईं, सरकार ने तुरंत कार्रवाई की। जांच CBI को सौंपी गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा कराने का फैसला लिया गया। पत्र में उन्होंने लिखा, 'मैं पहले दिन से ही पूरी जिम्मेदारी ले रहा था और स्थिति से कभी पीछे नहीं हटा। मेरा यह संकल्प था कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य यह 'एग्जाम माफिया' बर्बाद न कर सके और किसी भी बच्चे के साथ अन्याय न हो।'
'पिछले 10 दिनों की घटनाओं से आहत हूं'
16 जुलाई को जारी हुए NEET-UG के नतीजों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि परिणाम संतोषजनक थे और गरीब परिवारों के कई प्रतिभावान बच्चों ने सफलता हासिल की। हालांकि, इसके बाद जो हुआ उसने उन्हें अंदर तक तोड़ दिया। प्रधान ने पत्र में अपना दर्द बयां करते हुए लिखा, 'जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और बाधाएं खड़ी करने की कोशिश की, जिससे मुझे गहरा दुख पहुंचा है। पिछले दस दिनों की घटनाओं से मैं बेहद आहत हूं। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की बात नहीं है।'
'देशविरोधी ताकतों' की साजिश का अंदेशा
जंतर-मंतर पर छात्रों के चल रहे विरोध प्रदर्शन और देश भर में उपजे असंतोष को लेकर धर्मेंद्र प्रधान ने एक गंभीर आशंका जताई। उन्होंने लिखा कि स्थिति का फायदा उठाकर कुछ ताकतें माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने साफ किया, 'जंतर-मंतर और देश भर के मौजूदा हालात को देखते हुए, मेरा उद्देश्य देशविरोधी ताकतों को इसका फायदा उठाने से रोकना, राष्ट्रीय एकता को बनाए रखना और यह सुनिश्चित करना है कि हमारे बच्चों का भविष्य कानूनी उलझनों में न फंसे।;
पीएम मोदी के प्रति आभार और 4 दशकों का सफर
अपने पत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा क्षेत्र में बिताए अपने चार दशकों के अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि एक मजबूत और समावेशी शिक्षा प्रणाली ही सशक्त राष्ट्र की नींव है। उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व में काम करने का अवसर मिलने पर उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा, 'मैंने हमेशा देश के युवाओं की आकांक्षाओं और भावनाओं का सम्मान किया है। हमारे राजनीतिक और सामाजिक जीवन में युवाओं के सपनों को साकार करना एक नैतिक प्रतिबद्धता रही है।'
'युवाओं को भ्रम में नहीं रहने दूंगा'
इस्तीफे की वजह को साफ करते हुए उन्होंने लिखा कि वे नहीं चाहते कि देश का युवा भ्रम और भ्रमजाल के ताने-बाने में फंसा रहे। छात्र मुकदमों और राजनीति से दूर रहकर सिर्फ अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान केंद्रित कर सकें, इसीलिए उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंपा है।


