
पुलिस का काम कानून व्यवस्था बनाए रखना है। लेकिन कई बार पुलिस की कार्रवाई ही सवालों के घेरे में आ जाती है। ऐसा ही एक मामला पुणे से सामने आया है, जहां एक सब-इंस्पेक्टर का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। वीडियो में अफसर एक कैफे में रेड के दौरान ग्राहकों के कॉफी कप और खाने का सामान अपनी लाठी से तोड़ते दिख रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद अफसर को सस्पेंड तो किया गया, लेकिन अब उन्हें बहाल कर दिया गया है, जिससे एक नई बहस शुरू हो गई है।
यह घटना पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज रोड पर स्थित 'फ्लाइंग जिप्सी कैफे' की है। वीडियो में सब-इंस्पेक्टर संदीप कदम रेड के दौरान कैफे में घुसते हैं और टेबल पर रखे कॉफी के कप और खाने-पीने की दूसरी चीज़ों को लाठी से मारकर नीचे गिरा देते हैं। उनका अंदाज़ ऐसा था, जैसे वो कोई बहुत बड़ा हीरो वाला काम कर रहे हों। वीडियो के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठी।
बढ़ते दबाव के बाद, 29 जून को विभागीय जांच के तहत सब-इंस्पेक्टर संदीप कदम को सस्पेंड कर दिया गया। लेकिन जांच में पाया गया कि कदम ने पुलिस के नियमों और प्रक्रिया के दायरे में रहकर ही कार्रवाई की थी। इसके बाद पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने उनका सस्पेंशन रद्द करने का आदेश दिया।
A recent incident at a café involving a Pune Police PSI is unacceptable। Police are public servants, not above public। Respect is mutual। They're meant to protect, not intimidate। Every citizen has the right to question misconduct and demand accountability। PSI is suspended now pic।twitter।com/iUEynrWZmz
— Varad Bhatkhande | Journalist (@VaradBhatkhande) July 1, 2026
पुलिस रिपोर्ट के मुताबिक, 'फ्लाइंग जिप्सी कैफे' के खिलाफ बार-बार शिकायतें मिल रही थीं। यह कैफे तय समय के बाद भी खुला रहता था। इस कैफे के खिलाफ नियमों के उल्लंघन के 6 मामले पहले से दर्ज हैं। डेक्कन पुलिस स्टेशन की टीम ने 7 जून को इसी सिलसिले में यह रेड मारी थी। जांच में पाया गया कि संदीप कदम ने जो भी किया, वह कानूनी तौर पर गलत नहीं था।
हालांकि, पुलिस के इस फैसले ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। कई लोग कह रहे हैं कि क्या कानून का पालन कराने के लिए तोड़फोड़ करना ज़रूरी है? वहीं, कुछ पूर्व पुलिस अधिकारियों का मानना है कि ऐसे मामलों में अफसर को तुरंत सस्पेंड करने से फोर्स का मनोबल गिरता है।
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