
AAP Rajya Sabha MPs BJP Merger: दिल्ली और पंजाब की राजनीति में शुक्रवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जब आम आदमी पार्टी (AAP) के प्रमुख चेहरों में शामिल राघव चड्ढा ने पार्टी से इस्तीफा देने और भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने का ऐलान कर दिया। उनके साथ राज्यसभा सांसद संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने भी भाजपा का दामन थामने की घोषणा की। इस घटनाक्रम ने आम आदमी पार्टी की सियासत में हलचल तेज कर दी है। खासतौर पर इसलिए, क्योंकि राघव चड्ढा लंबे समय तक पार्टी के सबसे भरोसेमंद और युवा चेहरों में गिने जाते रहे हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ मिलकर फैसला लिया है कि राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य संविधान के प्रावधानों का उपयोग करते हुए भाजपा में विलय करेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया कि स्वाति मालीवाल भी भाजपा में शामिल होंगी। यह बयान राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे राज्यसभा में AAP की ताकत पर सीधा असर पड़ सकता है।
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राघव चड्ढा ने कहा कि उन्होंने अपने “खून-पसीने” से पार्टी को सींचा और अपनी जवानी के 15 साल AAP को दिए। लेकिन अब पार्टी अपने मूल सिद्धांतों, मूल्यों और नैतिकता से भटक चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी अब राष्ट्रीय हित के लिए नहीं, बल्कि व्यक्तिगत लाभ के लिए काम कर रही है। उनका कहना था कि उन्हें महसूस हुआ कि वह “गलत पार्टी में सही आदमी” बनकर रह गए हैं। यह बयान सीधे तौर पर AAP नेतृत्व, खासकर अरविंद केजरीवाल की कार्यशैली पर सवाल माना जा रहा है।
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राजनीतिक गलियारों में काफी समय से यह चर्चा थी कि Raghav Chadha और Arvind Kejriwal के बीच रिश्ते पहले जैसे नहीं रहे।
बताया जाता है कि जब केजरीवाल जेल में थे, उस दौरान राघव अपनी पत्नी Parineeti Chopra के साथ लंदन में थे और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा में रहीं। इसके बाद पार्टी के भीतर दूरी साफ नजर आने लगी।
लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्हें पंजाब की सक्रिय राजनीति से अपेक्षाकृत दूर रखा गया। हाल ही में AAP ने उन्हें राज्यसभा में डिप्टी लीडर पद से भी हटा दिया था और उनकी जगह Ashok Mittal को जिम्मेदारी दी गई थी।
जहां विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को AAP के भीतर गंभीर मतभेद का संकेत बता रहा है, वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह और नए उपनेता अशोक मित्तल ने इसे सामान्य संगठनात्मक प्रक्रिया बताया। उनका कहना है कि पार्टी अन्य सांसदों को भी जिम्मेदारी देना चाहती है और इसे किसी व्यक्तिगत विवाद से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
राघव का जाना सिर्फ एक नेता का पार्टी छोड़ना नहीं, बल्कि AAP के लिए एक बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। युवा, आक्रामक और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान रखने वाले नेता के रूप में उनकी अलग छवि रही है। ऐसे में उनका BJP में जाना आने वाले समय में दिल्ली, पंजाब और राष्ट्रीय राजनीति पर असर डाल सकता है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है, क्या यह सिर्फ एक व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला है, या फिर AAP के भीतर गहराते असंतोष की शुरुआत?
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