राज्यसभा से भी पास हुआ एंटी पेपर लीक बिल, अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद बनेगा कानून

Published : Jul 30, 2026, 10:59 PM IST
Rajya Sabha Passes Anti Paper Leak Bill 2026 Tougher Punishment and Fast Track Courts Proposed

सार

एंटी पेपर लीक बिल 2026 राज्यसभा से भी पास हो गया है। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून बन जाएगा। नए कानून में पेपर लीक पर 10 साल तक की जेल, 50 लाख रुपये जुर्माना, स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान किया गया है।

Rajya Sabha Passes Anti Paper Leak Bill 2026: देशभर में भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार का एंटी पेपर लीक बिल 2026 अब संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है। लोकसभा के बाद गुरुवार को राज्यसभा ने भी लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनि मत से मंजूरी दे दी। अब इस विधेयक को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलते ही यह कानून के रूप में लागू हो जाएगा। सरकार का दावा है कि नया कानून परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाएगा, जबकि विपक्ष का कहना है कि केवल सख्त सजा से समस्या खत्म नहीं होगी।

राज्यसभा से मिली मंजूरी, सरकार ने गिनाए बड़े बदलाव

राज्यसभा में विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि लोकसभा में लगभग 10 घंटे की चर्चा के बाद यह बिल पारित हुआ था और अब उच्च सदन से भी इसे मंजूरी मिल गई है।

उन्होंने कहा कि सरकार भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता मजबूत करने के लिए लगातार सुधार कर रही है। उनके अनुसार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) जैसी व्यवस्था की अवधारणा वर्षों पहले सामने आई थी, लेकिन इसे लागू करने का काम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि परीक्षा सुधार की इस पहल को सभी दलों का समर्थन मिलेगा।

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पेपर लीक पर 10 साल तक की जेल, 50 लाख रुपये तक जुर्माना

संशोधन विधेयक में पेपर लीक और परीक्षा से जुड़े संगठित अपराधों के खिलाफ सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। इसके तहत पेपर लीक के दोषियों को अधिकतम 10 साल की जेल और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

यदि मामला संगठित अपराध से जुड़ा पाया जाता है, तो कम से कम 7 साल की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। सरकार का कहना है कि इन प्रावधानों का उद्देश्य परीक्षा माफिया पर प्रभावी रोक लगाना और छात्रों का भरोसा बहाल करना है।

स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट का भी प्रावधान

विधेयक में केंद्र सरकार को पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का अधिकार दिया गया है। साथ ही प्रस्तावित धारा 12ए के तहत जांच दो महीने के भीतर पूरी करने और आरोप पत्र दाखिल होने के तीन महीने के भीतर सुनवाई पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके लिए सत्र न्यायालयों को स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट के रूप में नामित करने और विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति का भी प्रावधान किया गया है।

हालांकि, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि केवल सजा और जुर्माना बढ़ाने से पेपर लीक नहीं रुकेंगे। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत पर जोर दिया। अब इस विधेयक पर अंतिम मुहर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लगेगी, जिसके साथ ही यह देशभर में लागू कानून बन जाएगा।

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