Bankipur Bypoll 2026: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान प्रतिशत उम्मीद से कम रहा। प्रशांत किशोर की एंट्री के बावजूद वोटिंग में बड़ी बढ़ोतरी नहीं दिखी। क्या बदलाव की राजनीति मतदाताओं को बूथ तक नहीं ला सकी?

Bankipur By Election: बिहार की राजनीति में बदलाव का दावा करने वाले जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के लिए बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव एक अहम राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा है। माना जा रहा था कि उनकी एंट्री से बड़ी संख्या में नए और नाराज मतदाता मतदान केंद्रों तक पहुंचेंगे। लेकिन मतदान के रुझानों ने ऐसी तस्वीर पेश नहीं की। पूरे दिन वोटिंग की रफ्तार अपेक्षा से धीमी रही और मतदान प्रतिशत भी पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले कम दर्ज हुआ। ऐसे में अब चर्चा इस बात की है कि क्या बदलाव की राजनीति का संदेश मतदाताओं तक प्रभावी ढंग से पहुंच पाया।

बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन मतदान नहीं बढ़ा

बांकीपुर विधानसभा सीट पर पिछले कई चुनावों में मतदान प्रतिशत लगभग 39 से 42 प्रतिशत के बीच रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि इस बार प्रशांत किशोर की मौजूदगी उन मतदाताओं को भी मतदान केंद्र तक ला सकती है, जो पारंपरिक रूप से भाजपा और राजद, दोनों से दूरी बनाए रखते हैं।

हालांकि, मतदान के शुरुआती घंटों से ही रफ्तार धीमी रही। सुबह 9 बजे तक केवल 4.21 प्रतिशत मतदान हुआ, जबकि 2025 के विधानसभा चुनाव में इसी समय तक 5.10 प्रतिशत वोट पड़ चुके थे। दोपहर 1 बजे तक भी मतदान 20.01 प्रतिशत ही पहुंचा, जो पिछले चुनाव के मुकाबले कम रहा। शाम 5 बजे तक कुल मतदान 33.57 प्रतिशत दर्ज किया गया।

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करीब 60% मतदाताओं पर था फोकस

प्रशांत किशोर की रणनीति उन मतदाताओं पर केंद्रित मानी जा रही थी, जो पारंपरिक राजनीतिक दलों से असंतुष्ट हैं और भ्रष्टाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा विकास जैसे मुद्दों पर बदलाव चाहते हैं।

राजनीतिक तौर पर यह माना जा रहा था कि यदि यह वर्ग बड़ी संख्या में मतदान करता है, तो चुनावी मुकाबले की दिशा बदल सकती है। लेकिन मतदान प्रतिशत में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं दिखी। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या बदलाव का संदेश मतदाताओं को मतदान केंद्र तक लाने में सफल नहीं हो सका।

अब 3 सितंबर को आएंगे नतीजे, तभी साफ होगी तस्वीर

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, केवल मतदान प्रतिशत के आधार पर चुनावी नतीजों का अनुमान लगाना आसान नहीं होता। कम मतदान कई बार सत्तारूढ़ दल के पक्ष में जाता है तो कई बार विपक्ष को भी फायदा पहुंचा देता है।

बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे 3 सितंबर को मतगणना के बाद सामने आएंगे। इसके बाद ही स्पष्ट होगा कि प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति मतदाताओं को प्रभावित कर पाई या नहीं और क्या जनसुराज बिहार की राजनीति में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने में सफल रही। फिलहाल, कम मतदान ने चुनावी समीकरणों को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

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