पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने CCS की हाई लेवल बैठक की। भारतीयों और प्रवासी समुदाय की सुरक्षा, रबी सीजन के लिए खाद की उपलब्धता, ऊर्जा आपूर्ति और नाविकों की सुरक्षा को लेकर सरकार ने कई अहम निर्देश दिए।
पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी संघर्ष के बीच भारत सरकार ने हालात पर अपनी निगरानी और तैयारियों को और तेज कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की विशेष बैठक की अध्यक्षता करते हुए नागरिकों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति, उर्वरक उपलब्धता और विदेशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर कई अहम निर्देश दिए। यह इस मुद्दे पर बुलाई गई चौथी विशेष CCS बैठक थी।
भारतीयों और प्रवासी समुदाय की सुरक्षा पर सरकार का फोकस
बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर भारत और विदेशों में रह रहे भारतीयों पर नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने सभी मंत्रालयों को समन्वित तरीके से काम करने और हालात पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए।
प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से संघर्ष प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रहे भारतीय नाविकों (Seafarers) को लेकर चिंता जताई। उन्होंने अधिकारियों को ऐसा तंत्र विकसित करने का निर्देश दिया, जिससे नाविकों और उनके परिवारों को समय पर जानकारी, आपातकालीन सहायता और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग उपलब्ध कराई जा सके।
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रबी सीजन के लिए खाद और ईंधन आपूर्ति पर समीक्षा
बैठक में आगामी रबी सीजन के लिए उर्वरकों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। सरकार ने वैकल्पिक स्रोतों से खाद की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी स्थिति में उर्वरकों की कमी का सामना नहीं करना चाहिए और आपूर्ति निर्बाध बनी रहे।
कैबिनेट सचिव ने बैठक में बताया कि देश में पेट्रोल, डीजल, एलएनजी और एलपीजी की उपलब्धता पर्याप्त है। एलपीजी की खरीद के स्रोतों में विविधता लाई गई है और कच्चे तेल की पर्याप्त उपलब्धता के कारण सार्वजनिक क्षेत्र की रिफाइनरियां 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर काम कर रही हैं। इसके अलावा, पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) नेटवर्क और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन का भी विस्तार किया जा रहा है।
नवीकरणीय ऊर्जा और निगरानी तंत्र पर भी जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सौर ऊर्जा और अन्य गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्रोतों को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा पर लगातार निवेश और विस्तार किया जाना चाहिए।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रालयों को "Whole of Government" दृष्टिकोण अपनाने और एक एकीकृत समन्वित निगरानी तंत्र विकसित करने के निर्देश दिए। उनका कहना था कि इससे पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर नियमित नजर रखी जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर नागरिकों के हितों की रक्षा के लिए तुरंत निर्णय लिए जा सकेंगे। यह बैठक इस बात का संकेत है कि सरकार मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए बहु-स्तरीय तैयारी कर रही है।
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